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कपसाड़ कांड: 'दसवीं की मार्कशीट नहीं, पांचवीं के कागजों से हो पारस की उम्र का फैसला', जानें कोर्ट में क्या हुआ
Tue, 03 Feb 2026 10:45 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
Published by: मोहम्मद मुस्तकीम
Updated Tue, 03 Feb 2026 10:45 PM IST
सार
Meerut News: रूबी के अपहरण और उसकी मां सुनीता की हत्या का मामला कोर्ट में चल रहा है। वादी पक्ष ने पांचवीं के रिकॉर्ड के आधार पर पारस की उम्र का फैसला करने की मांग तो की, मगर उससे संबंधित कागजात नहीं दिखा पाए। अब कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।
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पारस सोम और रूबी।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कपसाड़ गांव की रूबी के अपहरण और उसकी मां सुनीता की हत्या के आरोपी पारस सोम की उम्र पर शनिवार को अपर जिला जज स्पेशल कोर्ट एससीएसटी एक्ट में सुनवाई हुई। वादी पक्ष के अधिवक्ता मंगलवार को इस संबंध में कोई साक्ष्य नहीं दे पाए। ऐसे में अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश पत्रावली में सुरक्षित रख लिया है।
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यह घटना 8 जनवरी को सरधना थाना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में हुई थी। पारस सोम पर रूबी का अपहरण करने और विरोध करने पर उसकी मां सुनीता की फरसे से प्रहार कर हत्या करने का आरोप है। वर्तमान में पारस जेल में बंद है। पारस के परिजनों ने अधिवक्ताओं के पैनल के माध्यम से अदालत में एक प्रार्थना पत्र दायर कर आरोपी के नाबालिग होने का दावा किया था। इस प्रार्थना पत्र की सुनवाई एससी एसटी एक्ट न्यायालय एडीजे मोहम्मद असलम सिद्दीकी की अदालत में चल रही है।
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शनिवार को हुई सुनवाई में वादी रूबी पक्ष ने न्यायालय में तर्क दिया कि आरोपी की उम्र की जांच के लिए उसका पांचवीं कक्षा का रिकॉर्ड तलब किया जाना चाहिए। वहीं आरोपी के अधिवक्ता संजीव राणा ने इसका कड़ा विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि जन्मतिथि का निर्धारण दसवीं कक्षा की मार्कशीट के आधार पर होना चाहिए, इसलिए पारस सोम की दसवीं की मार्कशीट से संबंधित रिकॉर्ड तलब किया जाए।
इसके बाद वादी के अधिवक्ता ने पांचवीं कक्षा से संबंधित दस्तावेज रिकॉर्ड तलब करने के लिए विधि व्याख्या देने हेतु समय मांगा था लेकिन मंगलवार को हुई सुनवाई में वादी अधिवक्ता द्वारा कोई साक्ष्य प्रस्तुत न करने पर दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायालय ने आदेश के लिए पत्रावली आरक्षित कर ली।