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मां के स्पर्श से नवजातों को मिलती है नई जिंदगी : डॉ. अनुपमा
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- मेरठ मेडिकल कॉलेज में कंगारू मदर केयर दिवस मनाया गया
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। मेरठ मेडिकल कॉलेज के बाल एवं शिशु रोग विभाग द्वारा शनिवार को अंतरराष्ट्रीय कंगारू मदर केयर डे उत्साह से मनाया गया। उत्तर प्रदेश एनएनएफ के तत्वावधान में जागरूकता कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कम वजन वाले एवं समय से पहले जन्मे नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण में कंगारू मदर केयर (केएमसी) की महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति माताओं, परिजनों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम का नेतृत्व बाल एवं शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अनुपमा वर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि कंगारू मदर केयर केवल एक चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि मां और शिशु के बीच स्नेह, सुरक्षा एवं विश्वास का सबसे सशक्त माध्यम है। डॉ. अनुपमा वर्मा ने कहा कि हर नवजात को मां का स्पर्श और देखभाल मिले, यही स्वस्थ भविष्य की सबसे मजबूत नींव है। इस दौरान एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज के पोस्ट नेटल वार्ड एवं मैटरनिटी वार्ड में नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया, जिसे नर्सिंग स्टाफ की टीम सुचिता, निशु एवं उज्ज्वला ने प्रस्तुत किया। नाटक के माध्यम से केएमसी के लाभों को सरल एवं प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया। माताओं को बताया गया कि कंगारू मदर केयर शिशु के शरीर का तापमान नियंत्रित रखने, स्तनपान को बढ़ावा देने, वजन बढ़ाने तथा मां-शिशु के बीच गहरे भावनात्मक संबंध विकसित करने में सहायक है। इस अवसर पर डॉ. रवि चौहान, डॉ. सुरूचि, डॉ. आयशा सैफी, डॉ. तूबा कमर सहित लगभग 60 प्रसूता माताएं, 20 नर्सिंग स्टाफ और 20 पीडियाट्रिक रेजिडेंट्स उपस्थित रहे। समापन पर डॉ. अनुपमा वर्मा ने कहा कि यह कार्यक्रम नवजात शिशु स्वास्थ्य की दिशा में एक सार्थक कदम साबित हुआ, जो सरकारी एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों में इस चिकित्सा पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित करने वाला रहा।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। मेरठ मेडिकल कॉलेज के बाल एवं शिशु रोग विभाग द्वारा शनिवार को अंतरराष्ट्रीय कंगारू मदर केयर डे उत्साह से मनाया गया। उत्तर प्रदेश एनएनएफ के तत्वावधान में जागरूकता कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य कम वजन वाले एवं समय से पहले जन्मे नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य संरक्षण में कंगारू मदर केयर (केएमसी) की महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति माताओं, परिजनों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम का नेतृत्व बाल एवं शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अनुपमा वर्मा ने किया। उन्होंने कहा कि कंगारू मदर केयर केवल एक चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि मां और शिशु के बीच स्नेह, सुरक्षा एवं विश्वास का सबसे सशक्त माध्यम है। डॉ. अनुपमा वर्मा ने कहा कि हर नवजात को मां का स्पर्श और देखभाल मिले, यही स्वस्थ भविष्य की सबसे मजबूत नींव है। इस दौरान एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज के पोस्ट नेटल वार्ड एवं मैटरनिटी वार्ड में नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया, जिसे नर्सिंग स्टाफ की टीम सुचिता, निशु एवं उज्ज्वला ने प्रस्तुत किया। नाटक के माध्यम से केएमसी के लाभों को सरल एवं प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया। माताओं को बताया गया कि कंगारू मदर केयर शिशु के शरीर का तापमान नियंत्रित रखने, स्तनपान को बढ़ावा देने, वजन बढ़ाने तथा मां-शिशु के बीच गहरे भावनात्मक संबंध विकसित करने में सहायक है। इस अवसर पर डॉ. रवि चौहान, डॉ. सुरूचि, डॉ. आयशा सैफी, डॉ. तूबा कमर सहित लगभग 60 प्रसूता माताएं, 20 नर्सिंग स्टाफ और 20 पीडियाट्रिक रेजिडेंट्स उपस्थित रहे। समापन पर डॉ. अनुपमा वर्मा ने कहा कि यह कार्यक्रम नवजात शिशु स्वास्थ्य की दिशा में एक सार्थक कदम साबित हुआ, जो सरकारी एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों में इस चिकित्सा पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित करने वाला रहा।
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