कबाड़ी बाजार के कोठे कराए जाएंगे खाली
- 23 अप्रैल को कोठे खाली कराने की रिपोर्ट के साथ डीएम, एसएसपी और सीएमओ को हाईकोर्ट ने किया है तलब
- 75 कोठों के पास ही चल रहे तीन सरकारी स्कूल और कारोबार, कई बार मुक्त कराई जा चुकी हैं नाबालिग किशोरियां
- कई सेक्स वर्कर की एड्स से हो चुकी मौत, अनेक अभी भी एचआईवी पॉजिटिव, स्थानीय निवासी और व्यापारी भी त्रस्त
- किसने और कब दिया इस गौरखधंधे का लाइसेंस, नवीनीकरण किया या नहीं, इसकी अफसरों को भी नहीं जानकारी
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विस्तार
कबाड़ी बाजार में सेक्स वर्करों के कोठे खाली कराए जाएंगे। इसकी तैयारी शुरू हो गई है। 23 अप्रैल को हाईकोर्ट ने डीएम, एसएसपी और सीएमओ को कोठे खाली कराने की रिपोर्ट के साथ तलब किया है। ऐसे में इन अधिकारियों के पास केवल तीन दिन का समय है और दबाव ज्यादा है। इन कोठों के आसपास ही तीन सरकारी स्कूल हैं, इस कारण कबाड़ी बाजार से ही बच्चों का आना-जाना होता है। इसके अलावा यहां कई बार छापेमारी में नाबालिग लड़कियों से जबरन यह धंधा कराया जाता मिला। इन किशोरियों का समय-समय पर रेस्क्यू कराया गया। इन कोठों और यहां आने वाले नशेड़ियों व आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के कारण स्थानीय लोग और व्यापारी भी परेशान हैं। इस गोरखधंधे को लाइसेंस किस विभाग ने या कब दिया, इससे अफसर भी अनजान हैं।
पुलिस के अनुसार कबाड़ी बाजार में 75 कोठे संचालित हैं, जिनमें 400 सेक्स वर्कर हैं। इनकी रिपोर्ट के अनुसार, 2009 से मेरठ में यह गोरखधंधा चल रहा है। जबकि वास्तविकता में यहां दशकों से कोठे संचालित हैं। इस प्रकरण में जनहित याचिका डालने वाले हाईकोर्ट के अधिवक्ता सुनील चौधरी ने आरटीआई के तहत तीनों विभागों से जानकारी जुटाने के बाद रिट दायर की थी। उन्होंने बताया कि नगर निगम मेरठ का कहना है कि कबाड़ी बाजार में तीन स्कूल चल रहे हैं। मेरठ के स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट है कि इन कोठों में सात सेक्स वर्करों की मौत हो चुकी है। इनमें एक मौत एड्स से, दूसरी छत से कूदकर हुई। एक सेक्स वर्कर को ग्राहक गोली मारकर चला गया था। छह अन्य सेक्स वर्करों में एचआईवी पॉजिटिव पाया गया।
हाईकोर्ट ने कोठों पर ताले लगाने की रिपोर्ट मांगी
पुलिस प्रशासन ने कोठों के मामले में झूठी रिपोर्ट प्रस्तुत की है। पुलिस ने कोर्ट में हलफनामा देकर कहा कि याची अपने स्वार्थ के लिए बिना वजह आरोप लगा रहा है। यहां किसी तरह कोई परेशानी नहीं है। याची के मुताबिक, 23 अप्रैल की तारीख नियत हुई है। कोर्ट ने तीनों विभागों रिपोर्ट के साथ तलब किया है। कोर्ट के आदेश है कि सेक्स वर्करों का रेस्क्यू कराकर कोठों पर ताले लगाकर रिपोर्ट लेकर आएं।
कई किशोरियों का हुआ रेस्क्यू
मेरठ एंटी ह्यमून ट्रैफिकिंग यूनिट की टीम ने कोठों पर कई बार छापेमारी कर नाबालिग लड़कियों का रेस्क्यू कराया है। पुलिस ने बताया कि किशोरियों को बंधक बनाकर गलत काम कराने की बात सामने आती है। पश्चिम बंगाल, राजस्थान, कोलकाता समेत कई राज्यों की किशोरियों को यहां से मुक्त कराया गया। इसको लेकर मेरठ को कई बार शर्मसार होना पड़ा।
कोठे से कूदकर भागने का प्रयास करती हैं किशोरियां
कई बार ह्यमून ट्रैफिकिंग यूनिट के पास शिकायत आई कि जबरन बंधक बनी किशोरियों ने कोठे से कूदकर भागने का प्रयास किया, जिसकी जानकारी स्थानीय पुलिस को भी दी गई। आरोप है कि कोठों की सेटिंग पुलिस से भी है, जिसके चलते कभी मजबूत कार्रवाई नहीं हुई। कई बार एनजीओ छापेमारी कराती और पुलिस कोठा संचालिकाओं से पैसा लेकर चली जाती है।
कैसे चल सकता है यहां कोठा
अधिवक्ता का कहना है कि नियमानुसार शिक्षण संस्थानों से दूर कोठे होने चाहिए, जबकि मेरठ में करीब 50 साल से तीन स्कूल कबाड़ी बाजार में चलने बताए गए हैं।
कारोबारी और नागरिक भी परेशान
कबाड़ी बाजार में थोक का कारोबार है। किराना, लोहे और अन्य सामान बेचने की दुकानें हैं। इनके ऊपर कोठे बने हैं। इससे कारोबारी भी बुरी तरह से त्रस्त हैं। सभी का मानना है कि इन कोठों को यहां से हटना ही चाहिए।
मैंने देखा है दर्द : अधिवक्ता
अधिवक्ता सुनील चौधरी कहते हैं कि मैंने इन किशोरियों का दर्द देखा है। प्रयागराज में कोठों के सामने उनका स्कूल होता था। 30 साल पहले एक किशोरी कोठे से भगाकर बाजार में ‘बचाओ बचाओ’ चिल्ला रही थी। किसी ने उसे बचाने का प्रयास नहीं किया। मैं खुद तमाशबीन बना था, लेकिन बाद में मैंने पहल की। इलाहाबाद से कोठे बंद कराए और अब मेरठ की तैयारी चल रही है। इसके लिए मुझे कई बार धमकी मिली। उसी किशोरी के नाम पर ‘ज्योति’ संस्था बनाई।
400 सेक्स वर्करों का पुनर्वास भी बड़ी समस्या
एक पूरे प्रकरण में एक सवाल यह भी उठता है कि यदि कोठे खाली कराए गए, तो इन 400 सेक्स वर्करों के पुनर्वास के लिए क्या किया जाएगा। इनके रहने और रोजी-रोटी के लिए क्या प्रबंध किए जाएंगे। साथ ही इन कोठों में रहने वाले सेक्स वर्करों के बच्चों के लिए शिक्षा आदि की क्या व्यवस्था रहेगी, यह भी देखना होगा।
कबाड़ी बाजार में नृत्य-मनोरंजन आदि के लिए कोई लाइसेंस दिया जाता है या नहीं, यह मेरी जानकारी में नहीं है। मुझे आए हुए अभी मात्र एक माह हुआ है। इस मामले को दिखवाता हूं।
शत्रुघ्न सिन्हा, जिला प्रोबेशन अधिकारी
एड्स जागरूकता अभियान के तहत यूपी स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी ने सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की थी। उसी एनजीओ की रिपोर्ट को हमने कोर्ट में सबमिट किया था। स्वास्थ्य विभाग ने न तो कभी कोई सर्वे कराया और न ही इनके वेलफेयर के लिए कोई योजना बनाई।
- डा. राजकुमार, मुख्य चिकित्साधिकारी
हमें 23 अप्रैल को हाईकोर्ट ने बुलाया है। लेकिन इस मामले में हमसे कोई जवाब नहीं मांगा है। हाईकोर्ट का जो भी आदेश होगा, उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
- नितिन तिवारी, एसएसपी मेरठ