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कारोबारी की बैलेंस शीट-बैंक स्टेटमेंट में भारी अंतर
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Fri, 14 Oct 2016 02:08 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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परिवार सहित मौत को गले लगाने वाले कारोबारी विनीत अरोड़ा के घर से मिले सुसाइड नोट के साथ लगी बैलेंस शीट और बैंक में दिए गए स्टेटमेंट में भारी अंतर बताया गया है। जो कहीं न कहीं संदेह पैदा करता है। पड़ताल में यह तथ्य सामने आया है।
रघुकुल विहार टीपी नगर के स्पेयर पार्ट्स कारोबारी परिवार के घर से पुलिस को सुसाइड नोट के साथ बैलेंस शीट भी मिली थी। उसमें कारोबारी ने अपनी फर्म का कुल स्टॉक (स्टॉक इन हैंड) और माल की उधारी ( गुड्स डेबेटर्स) दोनों 10-10 लाख रुपये दिखाए थे। इस बैलेंस शीट की तुलना में फर्म द्वारा सितंबर माह में बैंक को दिए गए स्टॉक स्टेटमेंट में जमीन-आसमान का फर्क है।
शास्त्रीनगर स्थित पीएनबी के ब्रांच मैनेजर वीके बंसल के अनुसार विनीत अरोड़ा ने अपनी फर्म का अगस्त माह का स्टॉक स्टेटमेंट सितंबर में दिया था। इस स्टेटमेंट में उसने अपने पास करीब एक करोड़ से अधिक का स्टॉक बताया था। जबकि बैलेंस शीट के अनुसार फर्म के पास कुल स्टॉक और माल उधारी की रकम 20 लाख रुपये बैठती है। बैंक के अनुसार दो माह पूर्व के स्टॉक स्टेटमेंट में यह रकम करीब डेढ़ करोड़ रुपये बैठती है। दोनों में करीब 1.30 करोड़ रुपये का अंतर बैठ रहा है। जो अपने आप में हैरान करने वाला है। इसको लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं।
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सवाल एक
दो माह में आखिर फर्म का स्टॉक और उधारी इतनी कम कैसे हो गई। अगस्त में यदि एक करोड़ का स्टॉक था तो बैलेंस शीट में वह 10 लाख कैसे रह गया। 90 लाख का स्टॉक (बैलेंस शीट के अनुसार) कम कैसे हो गया।
सवाल दो
उधार दिए गए माल की रकम भी करीब 50 लाख (स्टॉक स्टेटमेंट) से घटकर 10 लाख (बैलेंस शीट में) कैसे रह गई। करीब 40 लाख रुपये की उधारी कैसे घटी।
सवाल तीन
यदि मान लें कि स्टॉक स्टेटमेंट में दिए गए स्टॉक की बिक्री हुई है तो उससे प्राप्त रकम की एंट्री बैलेंस शीट में होनी चाहिए थी। यदि माल उधार गया है तो बैलेंस शीट में माल उधारी रकम बढ़नी चाहिए थी। लेकिन वह बढ़ने की बजाय कम क्यों हो गई?
जांच जरूरी
संभव है कि फर्म द्वारा दिए गए स्टाक स्टेटमेंट में स्टॉक और उधारी अधिक दिखाई गई हो। क्योंकि नियमानुसार कैश क्रेडिट लिमिट की तुलना में पार्टी का स्टॉक और माल उधारी रकम कुल मिलाकर करीब 125 प्रतिशत तक अधिक होनी चाहिए। सच क्या है यह तो बैंक और पुलिस की जांच के बाद ही सामने आएगा।
अच्छा था कारोबारी का व्यवहार
बैंक प्रबंधक वीके बंसल के अनुसार विनीत की फर्म को 2011 में कैश क्रेडिट लिमिट जारी हुई थी। वर्तमान में यह लिमिट 96 लाख की थी। नियमानुसार बैंक से कैश क्रेडिट बनवाने वाली सभी व्यापारिक फर्मों को प्रत्येक माह अपना स्टॉक स्टेटमेंट बैंक को देना होता है। उनकी फर्म भी स्टेटमेंट देती थी। खाता बिल्कुल सही ढंग से संचालित हो रहा था। खातेदार का व्यवहार भी अच्छा था। ब्याज को लेकर कभी भी बैंक को सख्ती नहीं करनी पड़ी। अब इस खाते फ्रीज कर दिया गया है।
स्टॉक स्टेटमेंट (अगस्त माह, सितंबर में जमा किया)
कुल स्टॉक - करीब एक करोड़
माल उधारी करीब 50 लाख
बैलेंस शीट (सुसाइड नोट के साथ लगी)
कुल स्टॉक 10 लाख
माल उधारी 10 लाख
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रघुकुल विहार टीपी नगर के स्पेयर पार्ट्स कारोबारी परिवार के घर से पुलिस को सुसाइड नोट के साथ बैलेंस शीट भी मिली थी। उसमें कारोबारी ने अपनी फर्म का कुल स्टॉक (स्टॉक इन हैंड) और माल की उधारी ( गुड्स डेबेटर्स) दोनों 10-10 लाख रुपये दिखाए थे। इस बैलेंस शीट की तुलना में फर्म द्वारा सितंबर माह में बैंक को दिए गए स्टॉक स्टेटमेंट में जमीन-आसमान का फर्क है।
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शास्त्रीनगर स्थित पीएनबी के ब्रांच मैनेजर वीके बंसल के अनुसार विनीत अरोड़ा ने अपनी फर्म का अगस्त माह का स्टॉक स्टेटमेंट सितंबर में दिया था। इस स्टेटमेंट में उसने अपने पास करीब एक करोड़ से अधिक का स्टॉक बताया था। जबकि बैलेंस शीट के अनुसार फर्म के पास कुल स्टॉक और माल उधारी की रकम 20 लाख रुपये बैठती है। बैंक के अनुसार दो माह पूर्व के स्टॉक स्टेटमेंट में यह रकम करीब डेढ़ करोड़ रुपये बैठती है। दोनों में करीब 1.30 करोड़ रुपये का अंतर बैठ रहा है। जो अपने आप में हैरान करने वाला है। इसको लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं।
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सवाल एक
दो माह में आखिर फर्म का स्टॉक और उधारी इतनी कम कैसे हो गई। अगस्त में यदि एक करोड़ का स्टॉक था तो बैलेंस शीट में वह 10 लाख कैसे रह गया। 90 लाख का स्टॉक (बैलेंस शीट के अनुसार) कम कैसे हो गया।
सवाल दो
उधार दिए गए माल की रकम भी करीब 50 लाख (स्टॉक स्टेटमेंट) से घटकर 10 लाख (बैलेंस शीट में) कैसे रह गई। करीब 40 लाख रुपये की उधारी कैसे घटी।
सवाल तीन
यदि मान लें कि स्टॉक स्टेटमेंट में दिए गए स्टॉक की बिक्री हुई है तो उससे प्राप्त रकम की एंट्री बैलेंस शीट में होनी चाहिए थी। यदि माल उधार गया है तो बैलेंस शीट में माल उधारी रकम बढ़नी चाहिए थी। लेकिन वह बढ़ने की बजाय कम क्यों हो गई?
जांच जरूरी
संभव है कि फर्म द्वारा दिए गए स्टाक स्टेटमेंट में स्टॉक और उधारी अधिक दिखाई गई हो। क्योंकि नियमानुसार कैश क्रेडिट लिमिट की तुलना में पार्टी का स्टॉक और माल उधारी रकम कुल मिलाकर करीब 125 प्रतिशत तक अधिक होनी चाहिए। सच क्या है यह तो बैंक और पुलिस की जांच के बाद ही सामने आएगा।
अच्छा था कारोबारी का व्यवहार
बैंक प्रबंधक वीके बंसल के अनुसार विनीत की फर्म को 2011 में कैश क्रेडिट लिमिट जारी हुई थी। वर्तमान में यह लिमिट 96 लाख की थी। नियमानुसार बैंक से कैश क्रेडिट बनवाने वाली सभी व्यापारिक फर्मों को प्रत्येक माह अपना स्टॉक स्टेटमेंट बैंक को देना होता है। उनकी फर्म भी स्टेटमेंट देती थी। खाता बिल्कुल सही ढंग से संचालित हो रहा था। खातेदार का व्यवहार भी अच्छा था। ब्याज को लेकर कभी भी बैंक को सख्ती नहीं करनी पड़ी। अब इस खाते फ्रीज कर दिया गया है।
स्टॉक स्टेटमेंट (अगस्त माह, सितंबर में जमा किया)
कुल स्टॉक - करीब एक करोड़
माल उधारी करीब 50 लाख
बैलेंस शीट (सुसाइड नोट के साथ लगी)
कुल स्टॉक 10 लाख
माल उधारी 10 लाख