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जुटाए खजाना प्यार का वो नाम केवल मां ...
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 07 May 2018 02:07 AM IST
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मेरठ
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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नौचंदी मेला परिसर स्थित पटेल मंडप में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें कवियों ने अपनी कविताओं के माध्यम से श्रोताओं को खूब हंसाया।
कार्यक्रम का उद्घाटन महापौर सुनीता वर्मा ने किया। कवियित्री डॉ. ममता वार्ष्णेय ने मां सरस्वती वंदना पढ़ी। इसके उपरांत ‘किसी के गम मिटाकर होठों की मुस्कान हो जाना, मुखोटों से अपनी नई पहचान हो जाना’ गाकर श्रोताओं की तालियां बटोरीं। कवि आर्यन उपाध्याय ने कहा कि ‘जुटाए जो खजाना प्यार का वो नाम केवल मां, वहीं इक तीर्थ मेरा और चारों धाम केवल मां’.., इन पंक्तियों में कवि ने मां को सम्मान देने का काम किया। कवि अशोक भाटी ने पढ़ा कि ‘पीते हैं तो तबीयत खराब होती है, नहीं पीते हैं तो नीयत खराब होती है... एक दिन पीते एक दिन नहीं पीते, न तबीयत न नीयत खराब होती है’। इन पंक्तियों को सुनकर पटेल मंडप ठहाकों से गूंज उठा।
कवि वेदप्रकाश मणि ने यूं कहा कि ‘चरण जिधर भी हमें ले जाएंगे, वहीं आचरण का पता बताएंगे’। डॉ. आलोक बेजान ने भी अपनी रचनाओं से खूब तालियां बटोरीं। हास्य कवि बलबीर खिचड़ी ने श्रोताओं को यूं हंसाया कि ‘अंधों को आंख और बहरों को कान देते हैं, बाबा जी बंदों को संतान देते हैं’। इन पंक्तियों को सुनकर श्रोताओं ने खूब तालियां बजायी। कवि ईश्वर चंद गंभीर ने कविता पढ़ी कि ‘बहुत कम आदमी के दाम देखे, कई बिकते बड़े भी काम देखे। बिमलेन्द्र सागर ने पढ़ा कि ‘हिचकियां आने लगी ख्वाबों में, उसने फिर याद कर लिया होगा’। इस अवसर पर दक्षिण विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर, चीफ इंजीनियर कुलभूषण वार्ष्णेय, बुद्धप्रकाश, नरेंद्र राष्ट्रवादी, शकील सैफी आदि मौजूद रहे।
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कार्यक्रम का उद्घाटन महापौर सुनीता वर्मा ने किया। कवियित्री डॉ. ममता वार्ष्णेय ने मां सरस्वती वंदना पढ़ी। इसके उपरांत ‘किसी के गम मिटाकर होठों की मुस्कान हो जाना, मुखोटों से अपनी नई पहचान हो जाना’ गाकर श्रोताओं की तालियां बटोरीं। कवि आर्यन उपाध्याय ने कहा कि ‘जुटाए जो खजाना प्यार का वो नाम केवल मां, वहीं इक तीर्थ मेरा और चारों धाम केवल मां’.., इन पंक्तियों में कवि ने मां को सम्मान देने का काम किया। कवि अशोक भाटी ने पढ़ा कि ‘पीते हैं तो तबीयत खराब होती है, नहीं पीते हैं तो नीयत खराब होती है... एक दिन पीते एक दिन नहीं पीते, न तबीयत न नीयत खराब होती है’। इन पंक्तियों को सुनकर पटेल मंडप ठहाकों से गूंज उठा।
कवि वेदप्रकाश मणि ने यूं कहा कि ‘चरण जिधर भी हमें ले जाएंगे, वहीं आचरण का पता बताएंगे’। डॉ. आलोक बेजान ने भी अपनी रचनाओं से खूब तालियां बटोरीं। हास्य कवि बलबीर खिचड़ी ने श्रोताओं को यूं हंसाया कि ‘अंधों को आंख और बहरों को कान देते हैं, बाबा जी बंदों को संतान देते हैं’। इन पंक्तियों को सुनकर श्रोताओं ने खूब तालियां बजायी। कवि ईश्वर चंद गंभीर ने कविता पढ़ी कि ‘बहुत कम आदमी के दाम देखे, कई बिकते बड़े भी काम देखे। बिमलेन्द्र सागर ने पढ़ा कि ‘हिचकियां आने लगी ख्वाबों में, उसने फिर याद कर लिया होगा’। इस अवसर पर दक्षिण विधायक डॉ. सोमेंद्र तोमर, चीफ इंजीनियर कुलभूषण वार्ष्णेय, बुद्धप्रकाश, नरेंद्र राष्ट्रवादी, शकील सैफी आदि मौजूद रहे।
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