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सियासी स्टंट नहीं, हक मांग रहे जाट: अजित
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Mon, 22 Feb 2016 01:50 AM IST
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जाट आरक्षण आंदोलन की चिंगारी से पूरा हरियाणा जल रहा है। इसकी तपिश पड़ोसी राज्यों, खासतौर से वेस्ट यूपी तक पहुंच चुकी है। दरअसल, जाट आरक्षण की मांग पहली बार नहीं उठी है। केंद्र की पिछली सरकार के समय जाटों ने केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण के लिये आंदोलन की हुंकार भरी ही थी कि उनकी मांगों पर मुहर लगा दी गई। इसके बाद केंद्र में राजग की सरकार के आते ही सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षण रद्द कर दिया।
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फिलहाल, इसे लेकर देशभर के जाट लामबंदी की तैयारी में ही लगे हैं। इस बीच, हरियाणा में राज्य सेवाओं में आरक्षण के लिये जाटों ने उग्र आंदोलन छेड़ दिया है, जिससे वहां के हालात बेकाबू हो उठे हैं। उनके समर्थन में दूसरे राज्यों के जाट भी उतर आए हैं। वर्तमान हालात पर अमर उजाला ने आरक्षण के लिये लंबी लड़ाई लड़ने वाले राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह से बातचीत की। उन्होंने दो टूक कहा कि यह कोई सियासी या चुनावी स्टंट नहीं, बल्कि अधिकारों की लड़ाई है। पेश है आरक्षण आंदोलन पर उनकी बेबाक राय..
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सवाल- हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन विकराल रूप ले चुका है। हालात बेकाबू हो गए हैं? क्या इतना उग्र होकर अपनी मांग रखना जायज है?
अजित- यह अधिकारों की लड़ाई है। अहम बात यह है कि देश में ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी जाति को आरक्षण देकर उससे छीना गया हो। यह बात सही है कि यह पूरी कम्यूनिटी का नुकसान है। दरअसल, भाजपा पूरी तरह से आरक्षण विरोधी है। उसने मुजफ्फरनगर में जाट बनाम मुस्लिम का खेल खेला। वह इसी तर्ज पर हरियाणा में जाट बनाम गैर जाट का खेल खेलने की कोशिश में लगी है।
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सवाल- भाजपा ने आरक्षण के विरोध में सीधे-सीधे तो कभी भी अपना रुख साफ नहीं किया। अब यही कहा जा रहा है कि आरक्षण पर सरकार गंभीरता से विचार भी कर रही है?
अजित- बिहार चुनाव से पहले संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण पर सवाल उठाकर साफ कर दिया था कि वह आरक्षण विरोधी हैं। याद करें, हरियाणा चुनाव से पहले अमित शाह ने कहा था कि हरियाणा में गैर जाट को मुख्यमंत्री बनाएंगे। यानी भाजपा जाटों की सबसे बड़ी विरोधी है।
सवाल- इस तरह तो आरक्षण की यह लड़ाई जाति दर जाति बढ़ती जाएगी। इसे कैसे रोका जा सकता है?
अजित- बिल्कुल सही। मैं भी यही कहता हूं कि यह लड़ाई बढ़ती रहेगी। मंडल कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि जाट, यादव, कुर्मी जैसी जातियों का सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक स्तर एक जैसा है, जब उन्हें आरक्षण दिया जा सकता है तो जाटों को क्यों नहीं?
सवाल- केंद्र द्वारा दिया गया जाट आरक्षण तो सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया?
अजित- भाजपा ने पैरवी ही नहीं की। जब जाट आरक्षण लागू हुआ तो चीफ जस्टिस ने इसे सही मानते हुए इस पर स्टे तक नहीं दिया था। सरकार बदली, जस्टिस बदले तो सब बदल गया। कहते हैं कि जाति के आधार पर आरक्षण नहीं होगा। फिर तो सबका आरक्षण खत्म करो। जब तक नए मानक नहीं बनेंगे, तब तक तो जाति के आधार पर ही आरक्षण दोगे?
सवाल- ऐसे मसलों में सुप्रीम कोर्ट सर्वोपरि माना जाता है? सरकार को आरक्षण देने का अधिकार नहीं है?
अजित- बस यही बात है, यह सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि किसको आरक्षण देना है या किसे नहीं? यह सरकार का अधिकार है, जमीनी हकीकत तो सरकार को ही पता होती है। जब उत्तर प्रदेश में आरक्षण हुआ तो हाईकोर्ट ने इसे अप्रूवल दिया। सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई, तो वहां जज ने इसके खिलाफ सुनवाई तक नहीं की।
सवाल- आरक्षण के लिये किये गए सर्वे पर भी सवाल उठाए गए हैं कि यह सही ढंग से नहीं हुआ?
अजित- मंडल कमीशन ने कौन सा सर्वे किया था? वर्ष-1979 में कमीशन हुआ। वर्ष-1993 में इसे मंजूरी दी गई। यानी 14 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने आयोग की रिपोर्ट स्वीकार की। नई रिपोर्ट को कहते हैं कि 10 साल पुरानी है। यह कोई आधार नहीं और यदि जजमेंट की मानी जाए तो फिर सभी का आरक्षण समाप्त होना चाहिए।
सवाल- हरियाणा में इस समय हालात बेकाबू हैं। इसे कैसे रोका जाये?
अजित- दरअसल, यह वहां के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के बस की बात नहीं है। वह बस तमाशा देख सकते हैं। हरियाणा के किसी भी इश्यू को वे संभाल नहीं पाए हैं। आरक्षण तो मिलना ही चाहिए।
सवाल- क्या भाजपा आलाकमान इस मामले को जल्द निपटाएगा?
अजित- हो सकता है कि अब राजनाथ सिंह इस बारे में कुछ घोषणा कर दें। हालांकि, पिछले चुनाव में वह भी आरक्षण के विरोध में ही बोल रहे थे।
सवाल- पूरे आंदोलन से क्या रालोद या दूसरे दल चुनाव में लाभ लेने की जमीन तैयार करेंगे?
अजित- अभी कहां चुनाव होने हैं? यूपी में भी पूरा एक साल है। भाजपा से जनता का विश्वास उठ चुका है। सच बताऊं, लोकसभा चुनाव भाजपा या आरएसएस ने नहीं जीता है। लोगों की धार्मिक भावनाओं में रंगकर चुनाव लड़ा। अब जनता समझ गई है। जाट आंदोलन सियासी या चुनावी स्टंट नहीं, अधिकारों की लड़ाई है।