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‘जंग’ के अफसर अब करेंगे पीएचडी
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Thu, 01 Sep 2016 03:25 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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जल, थल और वायु सेना के बड़े अधिकारी सीसीएसयू से पीएचडी करने के लिए लाइन में लगे हैं। देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रहे अधिकारियों ने स्पेशल परमिशन के बाद आवेदन किया है। वाइस एडमिरल से लेकर एयर मार्शल और मेजर जनरल तक रैंक के अधिकारी शामिल हैं। सब एरिया के जीओसी ने भी पीएचडी के लिए आवेदन किया है। तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों के 50 से अधिक आवेदन विवि को मिले हैं। किसी को कोर्स वर्क तो किसी को आरडीसी का इंतजार है। इनमें एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं।
सेनाओं के अधिकारियों ने डिफेंस स्टडी विषय में पीएचडी के लिए आवेदन किया है। 50 से अधिक अधिकारियों के आवेदन मिले हैं। एंट्रेंस से छूट वाली कैटेगरी में सबसे अधिक आवेदन डिफेंस स्टडी विषय में ही आए हैं। वीआईपी की नजर इस विषय पर है। आर्मी, नेवी और एयरफोर्स में बड़े ओहदे संभालने वाले इन अधिकारियों में अधिकांश ने एमफिल कर रखा है। किसी ने नेशनल डिफेंस कॉलेज दिल्ली तो किसी ने आर्मी स्टॉफ कॉलेज चेन्नई से एमफिल की है।
इन्होंने किया है आवेदन
पीएचडी के लिए आवेदन करने वालों में एयर मार्शल एस नीलाकंठन (कार्मिक प्रभारी एयर फोर्स), वाइस एडमिरल अजित कुमार पी (डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटिड डिफेंस स्टॉफ), लेफ्टिनेंट जनरल एके आहूजा, मेजर जनरल एके शुक्ला, मेजर जनरल बिपिन बख्शी (एनएसजी कमांडेंट), मेजर जनरल अश्विनी शर्मा, मेजर जनरल मनमीत सिंह जीओसी पश्चिम यूपी सब एरिया, लेफ्टिनेंट जनरल नितिन कोहली, मेजर जनरल आरपी सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल पीके सिंह और आईएएस अमित घोष शामिल हैं।
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नॉलेज का फायदा, भविष्य का प्लान
जिस उम्र में लोग रिटायरमेंट की तरफ बढ़ने लगते हैं, उसमें सेनाओं के अधिकारियों का पीएचडी करने की दो मुख्य वजह हैं। पहले वह जिन ओहदों पर काम कर रहे हैं या कर चुके हैं, उस पर उनके पास इंफोरमेशन का अच्छा खासा इनपुट होता है। इसका इस्तेमाल वह इजाजत लेकर रिसर्च में करते हैं। दूसरे बिंदु एकेडमीशियन बनने का है। वाइस चांसलर बनने से लेकर एकेडमिक्स में तमाम मौके हैं। एजूकेशन की अच्छी बैक ग्राउंड होती ही है।
ये कहते हैं अधिकारी
वाइस एडमिरल अजित कुमार पी का कहना है पीएचडी करने का मकसद अपने अनुभव से एकेडमिक में कुछ अच्छा देने का है। फील्ड का वर्क और इनपुट से रिसर्च का फायदा होगा। एजूकेशन तो वैसे भी इंसान जिंदगी भर लेता है। मेजर जनरल अश्विनी शर्मा का कहना सर्विस के दौरान बहुत कुछ सीखा है। वह किसी रिसर्च से कम नहीं है। काम करते-करते कुछ विषयों पर एक्सपर्ट हो जाते हैं। उसका फायदा पीएचडी में उठाना चाहते हैं। हायर एजूकेशन आपके आगे के रास्ते खोलती है। लेफ्टिनेंट जनरल नितिन कोहली का कहना है सर्विस के बाद वह एकेडमिक्स में इनपुट देना चाहते हैं, जो सीखा है, उसे डिलिवर करना चाहते हैं।
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सेनाओं के अधिकारियों ने डिफेंस स्टडी विषय में पीएचडी के लिए आवेदन किया है। 50 से अधिक अधिकारियों के आवेदन मिले हैं। एंट्रेंस से छूट वाली कैटेगरी में सबसे अधिक आवेदन डिफेंस स्टडी विषय में ही आए हैं। वीआईपी की नजर इस विषय पर है। आर्मी, नेवी और एयरफोर्स में बड़े ओहदे संभालने वाले इन अधिकारियों में अधिकांश ने एमफिल कर रखा है। किसी ने नेशनल डिफेंस कॉलेज दिल्ली तो किसी ने आर्मी स्टॉफ कॉलेज चेन्नई से एमफिल की है।
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इन्होंने किया है आवेदन
पीएचडी के लिए आवेदन करने वालों में एयर मार्शल एस नीलाकंठन (कार्मिक प्रभारी एयर फोर्स), वाइस एडमिरल अजित कुमार पी (डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटिड डिफेंस स्टॉफ), लेफ्टिनेंट जनरल एके आहूजा, मेजर जनरल एके शुक्ला, मेजर जनरल बिपिन बख्शी (एनएसजी कमांडेंट), मेजर जनरल अश्विनी शर्मा, मेजर जनरल मनमीत सिंह जीओसी पश्चिम यूपी सब एरिया, लेफ्टिनेंट जनरल नितिन कोहली, मेजर जनरल आरपी सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल पीके सिंह और आईएएस अमित घोष शामिल हैं।
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जिस उम्र में लोग रिटायरमेंट की तरफ बढ़ने लगते हैं, उसमें सेनाओं के अधिकारियों का पीएचडी करने की दो मुख्य वजह हैं। पहले वह जिन ओहदों पर काम कर रहे हैं या कर चुके हैं, उस पर उनके पास इंफोरमेशन का अच्छा खासा इनपुट होता है। इसका इस्तेमाल वह इजाजत लेकर रिसर्च में करते हैं। दूसरे बिंदु एकेडमीशियन बनने का है। वाइस चांसलर बनने से लेकर एकेडमिक्स में तमाम मौके हैं। एजूकेशन की अच्छी बैक ग्राउंड होती ही है।
ये कहते हैं अधिकारी
वाइस एडमिरल अजित कुमार पी का कहना है पीएचडी करने का मकसद अपने अनुभव से एकेडमिक में कुछ अच्छा देने का है। फील्ड का वर्क और इनपुट से रिसर्च का फायदा होगा। एजूकेशन तो वैसे भी इंसान जिंदगी भर लेता है। मेजर जनरल अश्विनी शर्मा का कहना सर्विस के दौरान बहुत कुछ सीखा है। वह किसी रिसर्च से कम नहीं है। काम करते-करते कुछ विषयों पर एक्सपर्ट हो जाते हैं। उसका फायदा पीएचडी में उठाना चाहते हैं। हायर एजूकेशन आपके आगे के रास्ते खोलती है। लेफ्टिनेंट जनरल नितिन कोहली का कहना है सर्विस के बाद वह एकेडमिक्स में इनपुट देना चाहते हैं, जो सीखा है, उसे डिलिवर करना चाहते हैं।