शहरवासी पांच गुना तक हाउस टैक्स भरने के लिए रहें तैयार
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बढ़ोतरी के लिए दो बड़ी वजह
पिछले साल निगम प्रशासन ने अगस्त-2014 के शासनादेश का हवाला देते हुए भूमि सर्किल रेट की दरों में वृद्धि के अनुपात में हाउस टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव बनाया था। इसका महापौर और पार्षदों ने विरोध कर आपातकालीन बैठक बुला ली थी। साथ ही प्रस्ताव पास कर शहर की जनता से आपत्तियां मांग ली गई थीं। हालांकि, अभी तक इन आपत्तियों का निस्तारण नहीं हो सका है। अब जब मेरठ स्मार्ट सिटी की दौड़ से बाहर हुआ तो निगम प्रशासन और महापौर को फिर से शासनादेश की याद आई है।
स्मार्ट सिटी का हवाला देते हुए स्पष्ट कहा है कि शासनादेश के अनुसार वर्ष-2004 में जिस अनुपात में जमीन का सर्किल रेट बढ़ा है, उसी हिसाब से हाउस टैक्स की दरें बढ़ाई जाएंगी। इससे न सिर्फ कॉमर्शियल, बल्कि आवासीय भवनों का टैक्स भी दो से पांच गुना तक बढ़ जाएगा।
महापौर खुद प्रयास में जुटे
महापौर हरिकांत अहलूवालिया के अनुसार जनवरी में नगरायुक्त को पत्र लिखकर हाउस टैक्स पर आई आपत्तियों के निस्तारण के निर्देश दिए गए थे, लेकिन निगम प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। बीते मंगलवार ही महापौर ने इस संबंध में अपर नगरायुक्त से भी बात की थी। साथ ही स्मार्ट सिटी के लिए हाउस टैक्स की बढ़ी दरें निर्धारित करने के निर्देश दे दिए थे।
पांच बार बढ़ा भूमि सर्किल रेट
निगम प्रशासन की मानें तो 2004 के बाद महानगर की भूमि का सर्किल रेट पांच बार बढ़ चुका है, लेकिन हाउस टैक्स की वृद्धि नहीं की गई। जबकि निगम एक्ट की धारा 174-1- ख, के तहत प्रत्येक दूसरे वर्ष हाउस टैक्स में वृद्धि होनी चाहिए थी।
केवल खानापूर्ति ही होगी
कर निर्धारण अधिकारी दिनेश यादव के अनुसार नगर निगम 2004 के शासनादेश के मुताबिक प्रस्तावित हाउस टैक्स की दरें पिछले साल ही निर्धारित कर ली गई थी। अब केवल कमेटी गठित कर आपत्तियों का निस्तारण होना है। जबकि निगम सूत्रों के अनुसार यह कमेटी केवल खानापूर्ति के लिए बनेगी। शासनादेश के आगे सभी आपत्तियां खारिज कर दी जाएंगी।
कोट
स्मार्ट सिटी में शामिल न होने के पीछे बड़ा कारण निगम में राजस्व की कम वसूली भी रहा है। वैसे भी 2004 के बाद अब तक हाउस टैक्स नहीं बढ़ाया गया है। जबकि अन्य नगर निगमों में कई बार यह दरें बढ़ चुकी हैं। अब जो भी प्रस्तावित दरें होंगी, उनको बोर्ड में रखा जाएगा। सभी की सहमति के बाद इसे लागू कराएंगे। -हरिकांत अहलूवालिया, महापौर