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काला पीलिया: दबे पांव कर रहा बड़ा हमला

Thu, 02 May 2024 02:50 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 02 May 2024 02:50 PM IST
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काला पीलिया: दबे पांव कर रहा बड़ा हमला
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मेडिकल कॉलेज में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 16 हज़ार मरीज़ों का चल रहा इलाज

माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के युवा काला पीलिया ( हेपेटाइटिस सी) की चपेट में आ रहे हैं। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में 16038 मरीज़ों का इलाज चल रहा है। ये मरीज़ मेरठ के अलावा गौतमबुद्धनगर, गाज़ियाबाद, हापुड़, बुलन्दशहर, बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, बिजनौर, रामपुर, मुरादाबाद और अमरोहा आदि जिलों के हैं। इनमें 25 से 55 साल उम्र वालों की संख्या सबसे ज़्यादा है।
यह तो वह संख्या है जो मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने के लिए आए। इनके अलावा ऐसे मरीज़ भी बड़ी संख्या में हैं, जिनका अपने जिले में इलाज चल रहा है। मेडिकल में मरीज़ को 18 नंबर में लिवर ओपीडी में दिखाना होता है, यहां से उसका सैंपल जांच के लिए माइक्रोबायोलॉजी लैब भेजा जाता है, जांच में हेपेटाइटिस सी की पुष्टि होने पर इलाज शुरू किया जाता है। तीन माह दवाइयां खानी पड़ती हैं, फिर जांच होती है, सही होने पर दवाइयां बन्द कर दी जाती हैं, नहीं तो दवाइयां अगले तीन माह के लिए जारी रखी जाती हैं। ठीक होने तक यही प्रक्रिया अपनाई जाती है।
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यह है हेपेटाइटिस-सी
हेपेटाइटिस सी (यकृतशोथ ग) इसे काला पीलिया भी कहते हैं। यह एक संक्रामक रोग है, जो हेपेटाइटिस सी वायरस एचसीवी की वजह से होता है और यकृत को प्रभावित करता है।
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इलाज से हो जाता है ठीक काला पीलिया
मेडिकल की माइक्रोबायोलॉजी लैब के प्रभारी डॉ अमित गर्ग ने बताया कि इलाज और देखभाल से यह ठीक हो जाता है। इस बीमारी का पता शुरू में नहीं लग पाता। इस कारण यह जानलेवा हो जाती है। मेडिकल में इसका इलाज निशुल्क किया जा रहा है।


इन कारणों से होती है बीमारी
- दूषित सिरिंज का उपयोग करना।
- दूषित रेजर या टूथब्रश का इस्तेमाल।
- दूषित रक्तदान, अंगदान या लंबे समय तक डायलिसिस द्वारा।
- दूषित सुईं से टैटू बनवाना या एक्यूपंचर करवाना।
- असुरक्षित यौन संबंध।

सतर्क रहें तो नहीं है खतरा
मेडिकल के प्राचार्य डॉ आरसी गुप्ता ने बताया कि कोई भी ऐसा कार्य या गतिविधि जिसमें खून से खून का संपर्क होने की संभावना है, संक्रमण का संभावित स्रोत हो सकता है। अगर सावधानी बरतें, तो इन बीमारियों से बचे रह सकते हैं।

एेसे करें रोकथाम
- साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
टैटू के लिए स्टरलाइज नीडल का इस्तेमाल करें।
- अपने टूथब्रश और रेजर किसी के साथ साझा न करें।
- शराब का सेवन न करें या अत्यंत कम मात्रा में करें।
- विशेषकर टॉयलेट से आने के बाद सफाई का ध्यान रखें।
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लक्षण...
- डायरिया
- थकान
- भूख न लगना
- उल्टी होना
- पेट में दर्द होना
- दिल घबराना
- मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना
- वजन कम होना
- सिर दर्द
- चक्कर आना
- यूरिन का रंग गहरा होना
- मल का रंग पीला हो जाना
- खुजली रहना
- त्वचा, आंखों के सफेद भाग, जीभ का रंग पीला पड़ जाना (ये लक्षण पीलिया में दिखाई देते हैं)
- महिलाओं में मासिक धर्म का गड़बड़ा जाना
- लिवर का आकार बढ़ जाना
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