चौंकाने वाली रिपोर्ट: फर्जीवाड़े की मार, जीएसटी को नहीं मिल पा रही धार
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वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पर फर्जीवाड़े की मार पड़ रही है। नतीजतन, उम्मीद के मुताबिक बढ़ोतरी नहीं हो रही है। अलबत्ता, तीन माह के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। बढ़ोतरी के बजाय टैक्स कम हो गया है। यह स्थिति यूपी के मेरठ जिले की है।
आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2018 में 103.54 करोड़ रुपए जीएसटी वसूला गया था। लेकिन जनवरी 2019 में यह घटकर 92.74 करोड़ रुपए रह गया। फरवरी 2019 में 95.19 करोड़ रुपए वसूला गया। कुछ जालसाज टैक्स देना तो दूर, सरकार को चूना लगाने के लिए फर्जी बिल बनाकर करोड़ों रुपए रिफंड ले चुके हैं। जीएसटी लागू होने के बाद मेरठ में 19039 नए व्यापारियों ने जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराया है। इससे पूर्व 32 हजार व्यापारी वैट में पंजीकृत थे। अब जीएसटी में 51039 व्यापारी पंजीकृत हैं।
ऐसे कर रहे फर्जीवाड़ा
जालसाज बड़े पैमाने पर फर्जी टैक्स इनवॉइस तैयार कर इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम करते हैं। फर्जी कंपनियां को सिर्फ कागजों में बनाते हैं। कहीं कोई ऑफिस नहीं होता है। इन कंपनियों को जीएसटी के तहत पंजीकृत भी करा दिया जाता है। कामकाज के फर्जी बिल बनाए जाते हैं। बिना किसी लेन-देन के इन कंपनियों के नामों पर व्यापार दिखाकर टैक्स इनवॉइस तैयार कर लेते हैं। सरकार इन्हें रिफंड भी देती है।
इन फर्जीवाड़ों पर नजर
वाणिज्य कर विभाग और जीएसटी काउंसिल का मुख्य फोकस अब इस तरह के टैक्स चोरी के मामलों पर होगा, जिनमें बिलबुक के जरिए फर्जीवाड़ा, टर्नओवर छिपाकर, रिफंड के जरिए, फर्जी बिल बनाकर और तथ्यों को छिपाकर फर्जीवाड़ा किया गया होगा।
60 करोड़ का लिया क्लेम
पिछले दिनों सीजीएसटी टीम ने खुलासा किया था, जिसमें फर्जी कंपनियों के फर्जी जीएसटी बिल 297 करोड़ तक के बना लिए थे। इन फर्जी कंपनियों के फर्जी बिलों पर सरकार से 60 करोड़ रुपये रिफंड भी मिल गया था। इस फर्जीवाड़े में टैक्स अधिवक्ता, चार्टेड अकाउंटेंट भी शामिल थे, जिन्हें गिरफ्तार किया गया था। इसमें दिल्ली, गाजियाबाद के लोग भी शामिल थे।
टैक्स चोरी के डेढ़ दर्जन मामले
जीएसटी के तहत 25 लाख से ज्यादा की टैक्स चोरी के करीब डेढ़ दर्जन मामलों की सूची जीएसटी काउंसिल को भेजी जा रही है, जीएसटी काउंसिल की इन्वेस्टिगेशन विंग ऐसे मामलों की निगरानी करेगी।
होगी सख्ती, टैग सिस्टम लागू होने पर बढ़ेगा टैक्स
ट्रकों आदि वाहनों पर लगने वाले टैग सिस्टम के लागू होने से टैक्स में बढ़ोतरी होगी। यह सिस्टम चुनाव बाद लागू हो पाएगा। वैट में बढ़ोतरी 14-15 प्रतिशत सालाना होती थी, जीएसटी में भी कमोबेश यही स्थिति है। - वीएन सिन्हा, एडिशनल कमिश्नर, वाणिज्य कर
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