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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   GST: On the last day, the clouds of curiosity kept roaming in mind

GST : आखिरी दिन भी मन में घुमड़ते रहे जिज्ञासाओं के बादल

Sat, 01 Jul 2017 10:04 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Updated Sat, 01 Jul 2017 10:04 AM IST
सार

अमर उजाला ने किया कार्यशाला का आयोजन, व्यापारियों ने किए सवाल, वाणिज्य कर अधिकारियों ने दिए जवाब

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GST: On the last day, the clouds of curiosity kept roaming in mind
अमर उजाला की कार्यशाला में व्यापारी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

विस्तार

एक देश, एक टैक्स। कैसे बदलेगा कारोबार का तरीका। देश का सबसे बड़ा टैक्स सुधार कहा जाने वाले जीएसटी को लेकर जीएसटी लागू होने से पहले भी तमाम तरह की जिज्ञासाएं, सवाल और भ्रम हैं, जो परेशान कर रहे हैं। आज से जीएसटी के साथ व्यापारी किस तरह से कारोबार करेंगे, इन अनसुलझे सवालों और इन्हें लेकर जो असमंजस की स्थिति है इसे दूर करने की कोशिश अमर उजाला ने की। शुक्रवार को अमर उजाला कार्यालय में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें वाणिज्य कर विभाग के असिस्टेंट कमिश्नर वीएन सिन्हा, असिस्टेंट कमिश्नर पीपी सिंह और डिप्टी कमिश्नर रश्मि श्रीवास्तव और शहर के कारोबारी मौजूद रहे। उन्होंने व्यापारियों से बात की। व्यापारियों के सवालों के जवाब दिए और जिज्ञासाओं का समाधान किया।
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जीएसटी को लेकर व्यापारियों के सवाल, वाणिज्य कर अधिकारियों के जवाब

मनजीत सिंह कोछड़- जिसे कंप्यूटर-इंटरनेट की जानकारी नहीं, वह कैसे जीएसटी का पालन कर पाएगा। 
जवाब- व्यापारी कंप्यूटर-इंटरनेट जानकार की मदद ले सकता है। लेकिन यह जरूरी है, चीजें ऑनलाइन ही होंगी।

अरुण वशिष्ठ- जीएसटी लागू होने के बाद भी क्या इसकी कार्यशालाएं होंगी।
जवाब- जीएसटी लागू होने के बाद भी कार्यशालाएं जारी रहेंगी। लोगों को जीएसटी के प्रति जागरूक किया जाता रहेगा। हेल्प डेस्क बनाई जाएंगी।

गौरव शर्मा- क्या ट्रांसपोर्टर को टैक्स देना पड़ेगा। हम तो विभिन्न टैक्स पहले ही देते आए हैं। ट्रांसपोर्टर सुविधा प्रदत्त सेवा है। इसे तो जीएसटी से मुक्त होना चाहिए।
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जवाब- ट्रांसपोर्टर को सीधा टैक्स नहीं देना होगा। इसकी कैटगरी अलग रहेगी। हालांकि इसे जीएसटी से मुक्त नहीं रखा गया है।

मनोज अग्रवाल- जीएसटी लागू होने की तारीख पर आईटीसी कैरी फार्वर्ड करने की क्या व्यवस्था है।
जवाब- जीएसटी लागू होने की तिथि पर उपलब्ध आईटीसी कैरी फार्वर्ड होगी। व्यापारी के पिछले छह माह के सभी रिटर्न दाखिल होने चाहिए।

लोकेश अग्रवाल- वैट में कर मुक्त और जीएसटी में कर योग्य वस्तु केस्टॉक का क्या होगा।
जवाब- उपलब्ध स्टॉक में कच्चे माल, सेमीफिनिश्ड गुड्स, फिनिश्ड गुड्स से संबंधित एक वर्ष के अंदर खरीद की गई वस्तुओं से संबंधित इनवायस में अंकित कर की समस्त धनराशि दी जाएगी।
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कुलभूषण सहाय- आईटीसी का लाभ किसे मिलेगा
जवाब- आईटीसी का लाभ सिर्फ उन्हीं व्यापारियों को मिलेगा, जो वैट अधिनियम के तहत पंजीकृत हों और जीएसटी लागू होने से छह माह पूर्व के जिन्होंने सभी रिटर्न दाखिल किए हों।
 
अतुल्या गुप्ता- क्या एक व्यक्ति एक ही पैन कार्ड केसाथ अलग-अलग राज्यों में एक ही पंजीयन पर व्यापार कर सकता है।
जवाब- नहीं, हर व्यक्ति जो पंजीयन कराने के लिए उत्तरदायी है, उसे हर राज्य में अलग-अलग पंजीयन करना होगा।

इसरार सिद्दीकी- अगर 11 महीने तक टर्नओवर 20 लाख से कम हो और 12वें महीने में 20 लाख से ज्यादा हो जाए तो क्या करना होगा।
जवाब- 20 लाख से कम टर्न ओवर पर जीएसटी नहीं लगेगा, जब टर्नओवर 20 लाख से ज्यादा हो जाएगा तो जीएसटी में पंजीयन कराना पड़ेगा।

कमल ठाकुर- रियल स्टेट में जीएसटी किस तरह लागू होगा। हम तो हर वर्ग के मकान डेवलप करते हैं।
जवाब- अगर बुकिंग पर आवास बेच रहे तो जीएसटी लगेगा। अगर अपने पैसे से डेवलप कर एक मुश्त  बिक्री करके बेच रहे हैं तो जीएसटी नहीं लगेगा।

रजनीश कौशल- अब तक 100 रुपये दवाओं पर पांच प्रतिशत वैट लगने के बाद 22 प्रतिशत लाभ मिल जाता था और 12 प्रतिशत लगाएंगे तो लाभ 15 प्रतिशत रह जाएगा। 
 जवाब- दवा कंपनियां अपनी एमआरपी तय करेंगी। जो पुराना स्टॉक है उस पर कंपनियां लाभ देंगी।

मुकेश गर्ग- ग्राहक पांच-10 रुपये का भी सामान खरीदता है, क्या उसका बिल बनाना पड़ेगा।
जवाब- अगर वह बिल मांगता है तो देना पड़ेगा। अगर नहीं मांगता तो 200 रुपये से कम के सभी लेनदेन के बदले पूरे दिन में एक बिल बना सकते हैं। खरीदार जीएसटी में अपंजीकृत होना चाहिए।

मुकेश चौहान-रिसीट और रिफंड वाउचर क्या हैं। हम तो कांट्रेक्टर हैं। भुगतान भी अलग अलग प्रतिशत से कर्मचारियों को करते हैं।
जवाब- पंजीकृत व्यापारी को किसी वस्तु और सेवा के लिए एडवांस भुगतान मिलता है तो उसे रिसीट वाउचर बनाना पड़ेगा। बाद में वस्तु एवं सेवा की आपूर्ति नहीं हुई तो पैसे लौटाते समय रिफंड वाउचर बनेगा। अलग अलग भुगतान करने से दिक्कत नहीं होगी। बस हिसाब बनाना होगा।

अजय मित्तल- भट्ठा व्यवसाय में एक साल का फिक्स टैक्स देना पड़ता है। चालान से माल जाता था। अब क्या होगा।
जवाब- भट्ठे से जो भी माल बेचेंगे उस पर पांच प्रतिशत टैक्स देना पड़ेगा।

सुनील दुआ- बिल ऑफ सप्लाई क्या है, इसे कौन जारी करेगा।
जवाब- कर से छूट वाली वस्तुएं और सेवाओं के लिए जो बिल बनेगा उसे बिल ऑफ सप्लाई कहा जाएगा। इसमें भी व्यक्ति को 200 रुपये से कम की आपूर्ति के लिए बिल जरूरी नहीं है।


मनोज शर्मा- अगर गुजरात के किसी व्यापारी ने मेरठ केकिसी व्यापारी को कोई कर योग्य आपूर्ति की जाती है तो वह उस पर कौन सा कर वसूल करेगा।
जवाब- इस स्थिति में टैक्स इनवाइस जारी कर एसजीएसटी (राज्य वस्तु एवं सेवा कर) तथा सीजीएसटी (केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर) दोनों कर समान दर से वसूल करेगा। इसका लाभ आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) के रूप में मिलेगा।

दिनेश रस्तोगी- क्या सबको एक जैसे बिल बनाना पड़ेगा।
जवाब- कर दाता इसके लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन बिल बनाने के लिए कुछ जानकारियां देनी जरूरी हैं, वे होनी चाहिए।

गौरव सिंघल- क्या छोटे कारोबारियों के लिए बिल पर प्रोडक्ट कोड नंबर (एचएसएन) लिखना जरूरी है।
जवाब- जिनका सालाना कारोबार डेढ़ करोड़रुपये तक है, उन्हें बिल पर एचएसएभन कोड लिखने की जरूरत नहीं है।


राजीव त्यागी- जीएसटी में सचल दल की कार्यप्रणाली क्या होगी।
जवाब- सचल दल सिर्फ बिना प्रपत्रों और फर्जी प्रपत्रों पर परिवहन किए जा रहे माल को ही रोकेंगे।

विनेश जैन- व्यापारी को ऑडिट की सूचना कब दी जाएगी।
जवाब- ऑडिट शुरू करने से कम से कम 15 दिन पहले इसकी पूर्व सूचना दी जाएगी। इसे तीन महीने में पूरा करना होगा।

संजीव मारवाह- क्रेडिट और डेबिट नोट कब जारी होंगे।
जवाब- बिल बनाने के बाद अगर पता चला कि कीमत कम है तो तब वह क्रेडिट नोट जारी करेगा। इसी तरह अगर बाद में पता चला कि कीमत ज्यादा है तो डेबिट नोट जारी होगा। खरीदार ने सामान लौटाया या सामान की मात्रा कम निकली तब भी क्रेडिट नोट जारी करना होगा।


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जीएसटी: कोई समस्या हो, यहां करें संपर्क
जीएसटीएन-0124-4688999
वाणिज्य कर विभाग उत्तर प्रदेश-0522-2721944, 3312600
एडिशनल कमिश्नर वाणिज्य कर (मेरठ)- 7235001602
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यह भी रहा सवाल
सवाल- समाधान के व्यापारी के लिए क्या व्यवस्था है।
जवाब- समाधान के व्यापारी त्रैमासिक रिटर्न देंगे। वे व्यापारी समाधान योजना का लाभ ले सकते हैं, जिनका पिछले वर्ष का टर्न ओवर 75 लाख रुपये से कम हो। 
अमर उजाला ने किया कार्यशाला का आयोजन, व्यापारियों ने किए सवाल, वाणिज्य कर अधिकारियों ने दिए जवाब
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