{"_id":"5f0a209a8ebc3e638c772592","slug":"government-schemes-only-on-paper-surface-empty-meerut-news-mrt490791136","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकारी योजनाएं केवल कागजों में, धरातल खाली","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकारी योजनाएं केवल कागजों में, धरातल खाली
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सरकारी योजनाएं केवल कागजों में, धरातल खाली
मेरठ। जनसंख्या दिवस पर शहर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हुए लेकिन तस्वीर इसके उलट हैं। परिवार नियोजन में प्रदेश में मेरठ का दूसरा और नसबंदी में तीसरा स्थान है। सुनने और देखने में यह आंकड़ा जनसंख्या नियंत्रण का सब्जबाग दिखाता है। मगर हकीकत इससे कोसों दूर है। सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों में हैं, धरातल खाली है। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग लोगों को जागरूक नहीं कर पा रहा है। यही वजह है कि नसबंदी में मेरठ के पुरुषों की भागीदारी पांच फीसदी से भी कम है। परिवार नियोजन की योजनाओं का लाभ पाने के लिए भी लोग भटकते रहते हैं। 2019-20 के कई लक्ष्य भी पूरे नहीं हुए हैं।
पुरुष नसबंदी का महज 460 का लक्ष्य था, जो 330 पर रुक गया। आईयूसीडी 11247 का लक्ष्य था, जो 10196 तक पहुंच सका। प्रसव के बाद आईयूसीडी 5260 का लक्ष्य था, 4686 ही हो सका। हालांकि, महिला नसबंदी, गर्भ निरोधक इंजेक्शन, गर्भ निरोधक गोली के प्रयोग में लोगों ने लक्ष्य से ज्यादा इन्हें अपनाया। पिछले एक साल में स्वास्थ्य विभाग ने अपनी योजनाएं 9 लाख 67 हजार 128 लोगों तक पहुंचाई, जिस पर 98 लाख 87 हजार रुपये खर्च हुए। 2011 की जनगणना के मुताबिक, जिले की आबादी 34 लाख से ज्यादा है और अब यह 40 लाख के पार पहुंच चुकी है। यानी आधी आबादी तक भी योजनाएं नहीं पहुंच सकी हैं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015 से 2020 तक मेरठ जिले में 20 हजार 580 नसबंदी ऑपरेशन हुए हैं, इनमें 19 हजार 626 महिलाओं तथा 954 पुरुषों ने नसबंदी कराई है। स्वास्थ्य विभाग अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर पा रहा है। पिछले पांच सालों से महिलाओं और पुरुषों का लक्ष्य तय है। मगर एक भी साल यह पूरा नहीं हो पाया है। मेरठ में प्रतिवर्ष नसबंदी ऑपरेशन का लक्ष्य करीब 16 हजार है।
फिर शुरू की जाएंगी योजनाएं
सीएमओ डा. राजकुमार का कहना है कि कोरोना संक्रमण के कारण परिवार नियोजन सेवा रोक दी गई थी। महिला व पुरुष नसबंदी को छोड़कर अन्य परिवार नियोजन सेवाएं फिर से संचालित की जाएंगी। कोविड-19 की ड्यूटी में लगी फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मी आशा, एएनएम क्षेत्र भ्रमण के दौरान कंडोम और गर्भ निरोधक गोलियों का भी वितरण करें। दो बच्चों के बीच अंतराल विधियों के बारे में प्रचार-प्रसार किया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
मेरठ। जनसंख्या दिवस पर शहर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हुए लेकिन तस्वीर इसके उलट हैं। परिवार नियोजन में प्रदेश में मेरठ का दूसरा और नसबंदी में तीसरा स्थान है। सुनने और देखने में यह आंकड़ा जनसंख्या नियंत्रण का सब्जबाग दिखाता है। मगर हकीकत इससे कोसों दूर है। सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों में हैं, धरातल खाली है। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग लोगों को जागरूक नहीं कर पा रहा है। यही वजह है कि नसबंदी में मेरठ के पुरुषों की भागीदारी पांच फीसदी से भी कम है। परिवार नियोजन की योजनाओं का लाभ पाने के लिए भी लोग भटकते रहते हैं। 2019-20 के कई लक्ष्य भी पूरे नहीं हुए हैं।
पुरुष नसबंदी का महज 460 का लक्ष्य था, जो 330 पर रुक गया। आईयूसीडी 11247 का लक्ष्य था, जो 10196 तक पहुंच सका। प्रसव के बाद आईयूसीडी 5260 का लक्ष्य था, 4686 ही हो सका। हालांकि, महिला नसबंदी, गर्भ निरोधक इंजेक्शन, गर्भ निरोधक गोली के प्रयोग में लोगों ने लक्ष्य से ज्यादा इन्हें अपनाया। पिछले एक साल में स्वास्थ्य विभाग ने अपनी योजनाएं 9 लाख 67 हजार 128 लोगों तक पहुंचाई, जिस पर 98 लाख 87 हजार रुपये खर्च हुए। 2011 की जनगणना के मुताबिक, जिले की आबादी 34 लाख से ज्यादा है और अब यह 40 लाख के पार पहुंच चुकी है। यानी आधी आबादी तक भी योजनाएं नहीं पहुंच सकी हैं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015 से 2020 तक मेरठ जिले में 20 हजार 580 नसबंदी ऑपरेशन हुए हैं, इनमें 19 हजार 626 महिलाओं तथा 954 पुरुषों ने नसबंदी कराई है। स्वास्थ्य विभाग अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर पा रहा है। पिछले पांच सालों से महिलाओं और पुरुषों का लक्ष्य तय है। मगर एक भी साल यह पूरा नहीं हो पाया है। मेरठ में प्रतिवर्ष नसबंदी ऑपरेशन का लक्ष्य करीब 16 हजार है।
विज्ञापन
फिर शुरू की जाएंगी योजनाएं
सीएमओ डा. राजकुमार का कहना है कि कोरोना संक्रमण के कारण परिवार नियोजन सेवा रोक दी गई थी। महिला व पुरुष नसबंदी को छोड़कर अन्य परिवार नियोजन सेवाएं फिर से संचालित की जाएंगी। कोविड-19 की ड्यूटी में लगी फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मी आशा, एएनएम क्षेत्र भ्रमण के दौरान कंडोम और गर्भ निरोधक गोलियों का भी वितरण करें। दो बच्चों के बीच अंतराल विधियों के बारे में प्रचार-प्रसार किया जाए।
विज्ञापन