Meerut: दंपती हत्याकांड में तीन को उम्रकैद, आठ साल बाद मिला इंसाफ, बेरहमी से की थी हत्या
स्कूल से लौटते वक्त बाइक सवार बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर उनकी हत्या कर दी थी। अब अदालत ने इस मामले में फैसला सुनाया है।
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मेरठ में जिला जज रजत जैन की अदालत ने अधिवक्ता सतेंद्र सिंह और उनकी पत्नी चंद्रकांता की हत्या के मामले में दोषी करार दिए गए अरुण उर्फ पिंटू निवासी रामपुर मोती, सुमित उर्फ अजीत निवासी बागपत और जितेंद्र निवासी शामली को उम्रकैद की सजा और 10 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है।
वहीं एक आरोपी रवि को दोषमुक्त करार दिया गया। दंपती की 15 जनवरी 2015 को कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र में सेंट फ्रांसिस स्कूल के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
अदालत में दायर वाद के अनुसार सरूरपुर थाना क्षेत्र के गांव रामपुर मोती निवासी सतेंद्र सिंह और उनकी पत्नी चंद्रकांता अपने पोते-पोती को स्कूल में कार से छोड़ने गए थे। स्कूल से लौटते समय कार में उनके साथ एक दो साल का पोता भी था। इसी दौरान बाइक सवार बदमाशों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर उनकी हत्या कर दी थी।
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पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता एडीजीसी पद्म सिंह, वरिष्ठ फौजदारी अधिवक्ता प्रमोद कुमार त्यागी और शुचि शर्मा ने बताया कि सतेंद्र के भाई राजेंद्र उनके साथ जमीनी विवाद को लेकर रंजिश रखते थे। राजेंद्र के बेटे अरुण उर्फ पिंटू ने पहले भी जान से मारने की धमकी दी थी। बाद में पिंटू ने अपने दोस्त अजीत उर्फ सुमित, जितेंद्र, रवि, जितेंद्र हुड्डा और मैनपाल ने दंपती की गोली मारकर हत्या कर दी। अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में 14 गवाह पेश किए गए।
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न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद राजेंद्र के पुत्र अरुण, अजीत और जितेंद्र को हत्या का दोषी माना। वहीं हत्यारोपी रवि को दोषमुक्त करार दिया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान मैनपाल की मौत हो चुकी है और जितेंद्र हुड्डा अब तक फरार है। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद यह सजा सुनाई।