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घनी आबादी छोड़ ‘वीआईपी’ बने सीओ ब्रह्मपुरी
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
Updated Sat, 04 Feb 2017 11:35 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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ब्रह्मपुरी के संवेदनशील इलाके और घनी आबादी छोड़कर सीओ ब्रह्मपुरी ऑफिस शहर से बाहर शिफ्ट करने का पुलिस अफसरों का मकसद समझ से परे है। लगता है कि सीओ ब्रह्मपुरी ने पब्लिक की नहीं बल्कि अपनी सहूलियत ज्यादा देखी। किसकी स्वीकृति से यह ऑफिस ट्रांसफर हुआ, इस पर कोई अधिकारी बोलने तक को तैयार नहीं है।
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सीओ ब्रह्मपुरी ऑफिस पहले शारदा रोड के बाजार के बीच देहली गेट चौराहे पर था। जो शहर के बीचोबीच से हटाकर दिल्ली रोड स्थित शॉप्रिक्स मॉल के सामने बनाया गया है। इसे पूरी तरह से कॉरपोरेट लुक दिया गया है। यह ऑफिस शिफ्ट होने को लेकर स्थानीय व्यापारियों और लोगों में नाराजगी थी। लेकिन शारदा रोड से सटी गली में व्यापारी सुशील वर्मा के गोदाम पर डकैती और बेटे अभिषेक की हत्या पर व्यापारियों का गुस्सा भड़क गया। गुस्साए व्यापारी बोले कि सीओ का ऑफिस अच्छा हो, यह सब लोग चाहते हैं। लेकिन पब्लिक के बीच से हटाकर उसको दूर ले जाएं, यह कौन चाहता है। व्यापारियों की बात आम जनता भी सही बता रही है। सीओ ऑफिस होने के चलते यहां पुलिस चेकिंग करती थी। पुलिस का मूवमेंट रहता था।
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लोगों ने बताया है ब्रह्मपुरी इलाके में कोई आपराधिक या सांप्रदायिक वारदात होने पर यदि पुलिस का कोई बड़ा अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंच जाए तो स्थिति जल्द ही कंट्रोल हो जाती है। शायद यही सोचकर सीओ ब्रह्मपुरी ऑफिस देहली गेट चौराहे पर कई सालों पहले बनाया गया होगा। यहां पहले पुलिस चौकी भी थी, जो बंद हो गई। अब सीओ ऑफिस भी चला गया। कोई वारदात होने पर थाने और सीओ ऑफिस पुलिस कैसे जल्द पहुंचेगी।
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अपनी सहूलियत ज्यादा देखी
बगैर किसी की स्वीकृति के सीओ ब्रह्मपुरी ऑफिस शिफ्ट हुआ। जमीन के अलावा ऑफिस बनाने में 10 से 15 लाख रुपये खर्च हो गए। ऑफिस में चार एसी और दो एलईडी लगी हैं। शासन से कोई पैसा नहीं स्वीकृत हुआ। सवाल है कि पुलिस ने जिससे भी पैसा लगवाया, अब उनके खिलाफ कैसे कार्रवाई करेगी। दिल्ली रोड पर ऑफिस शिफ्ट करने के लिए सीओ ब्रह्मपुरी ने केवल अपनी सहूलियत देखी, न कि पब्लिक की।