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पांडवानी की रानी की कहानी, होगी मेरठ की जुबानी
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मेरठ।
पांडवों की कहानी को एकतारे के साथ गाकर सुनाने वाली अद्भुत कलाकार पद्मश्री तीजनबाई की कहानी अब फिल्मी पर्दे पर दिखेगी। खास बात यह कि कौरव-पांडवों के बीच हुए महाभारत युद्ध की गवाह हस्तिनापुर की धरती से ही इस गायिका क ी बायोपिक क ी शुरुआत होगी। मशहूर अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी की पत्नी आलिया सिद्दीकी पद्मश्री तीजनबाई की बायोपिक बनाने की तैयारी कर रही हैं। फिल्म में तीजनबाई का किरदार प्रियंका चोपड़ा, विद्या बालन और जूूही चावला में से कोई निभा सकता है। तीजनबाई क ो पांडवानी कलाकार बनाने वाले उनके नाना ब्रजलाल की भूमिका महानायक अतिमाभ बच्चन निभाएंगे। जल्द ही फिल्म की शूटिंग शुरू होगी। शूटिंग में हस्तिनापुर सर्किट के भी कुछ दृश्य शामिल किए जाएंगे।
रंगीन फुंदने वाले एकतारे को हाथ में लेकर कभी भीम की गदा, कभी कृष्ण का चक्र और कभी अर्जुन का धनुष बनाकर कथा गाने वाली कलाकार तीजनबाई की कहानी पर आलिया सिद्दीकी शोध कर रही हैं। इसी सिलसिले में पिछले दिनों आलिया और नवाजुद्दीन तीजनबाई से मिले थे। आलिया के साथ इस फिल्म को मंजू गढ़वाल निर्देशित करेंगी। फिल्म वाईएस इंटरटेनमेंट के बैनर तले बनेगी।
कापालिक शैली की अकेली पांडवानी गायिका हैं तीजन
24 अप्रैल 1956 को भिलाई, दुर्ग के गनियारी गांव में जन्मी तीजनबाई बेहद सामान्य परिवार से ताल्लुक रखती हैं। नाना ब्रजलाल महाभारत की कहानियां गाते थे। नाना की कहानियों को तीजनबाई छिपकर सुनती और याद करती। एक दिन नाना ने जब तीजन को गाना सुनते पकड़ा तो उन्हें भी पांडवानी गाना सिखा दिया। पांडवानी वेदमती और कापालिक दो शैलियों में गाई जाती है। वेदमती शैली यानि बैठकर कथा सुनाना जो केवल स्त्रियां करती हैं। कापालिक यानि खड़े होकर पांडवानी गाना इस शैली को सिर्फ पुरुष ही गाते हैं। तीजनबाई पहली ऐसी लोक कलाकार हैं जिन्होंने कापालिक शैली में पांडवानी गाना शुरू किया। मधुर कं ठ, रंगीन फुंदनेदार एकतारे को लेकर कहानी का सजीव चित्रण करने क ी कला में माहिर तीजनबाई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुति दे चुकी हैं। पद्मश्री, पद्मभूषण समेत संगीत नाटक अकादमी सम्मान से सम्मानित हैं। बिलासपुर विवि ने उन्हें डीलिट की मानद उपाधि भी प्रदान की है।
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मेरठ आने पर जतायी थी संभावना
तीजनबाई पिछले वर्ष मेरठ में स्पिक मैके के तहत प्रस्तुति देने आई थीं। उन्होंने विद्या ग्लोबल स्कूल में पांडवानी की प्रस्तुति दी थी। तब हुई बातचीत में फिल्म बनने की बात पर संभावना जताई थी। तीजनबाई ने कहा था कि कुछ यहीं मेरठ इसके आसपास के लोग हैं जो मेरी बायोपिक बनाना चाहते थे। फिल्म कब तक बनेगी अभी बता नहीं सकती।
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पांडवों की कहानी को एकतारे के साथ गाकर सुनाने वाली अद्भुत कलाकार पद्मश्री तीजनबाई की कहानी अब फिल्मी पर्दे पर दिखेगी। खास बात यह कि कौरव-पांडवों के बीच हुए महाभारत युद्ध की गवाह हस्तिनापुर की धरती से ही इस गायिका क ी बायोपिक क ी शुरुआत होगी। मशहूर अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी की पत्नी आलिया सिद्दीकी पद्मश्री तीजनबाई की बायोपिक बनाने की तैयारी कर रही हैं। फिल्म में तीजनबाई का किरदार प्रियंका चोपड़ा, विद्या बालन और जूूही चावला में से कोई निभा सकता है। तीजनबाई क ो पांडवानी कलाकार बनाने वाले उनके नाना ब्रजलाल की भूमिका महानायक अतिमाभ बच्चन निभाएंगे। जल्द ही फिल्म की शूटिंग शुरू होगी। शूटिंग में हस्तिनापुर सर्किट के भी कुछ दृश्य शामिल किए जाएंगे।
रंगीन फुंदने वाले एकतारे को हाथ में लेकर कभी भीम की गदा, कभी कृष्ण का चक्र और कभी अर्जुन का धनुष बनाकर कथा गाने वाली कलाकार तीजनबाई की कहानी पर आलिया सिद्दीकी शोध कर रही हैं। इसी सिलसिले में पिछले दिनों आलिया और नवाजुद्दीन तीजनबाई से मिले थे। आलिया के साथ इस फिल्म को मंजू गढ़वाल निर्देशित करेंगी। फिल्म वाईएस इंटरटेनमेंट के बैनर तले बनेगी।
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कापालिक शैली की अकेली पांडवानी गायिका हैं तीजन
24 अप्रैल 1956 को भिलाई, दुर्ग के गनियारी गांव में जन्मी तीजनबाई बेहद सामान्य परिवार से ताल्लुक रखती हैं। नाना ब्रजलाल महाभारत की कहानियां गाते थे। नाना की कहानियों को तीजनबाई छिपकर सुनती और याद करती। एक दिन नाना ने जब तीजन को गाना सुनते पकड़ा तो उन्हें भी पांडवानी गाना सिखा दिया। पांडवानी वेदमती और कापालिक दो शैलियों में गाई जाती है। वेदमती शैली यानि बैठकर कथा सुनाना जो केवल स्त्रियां करती हैं। कापालिक यानि खड़े होकर पांडवानी गाना इस शैली को सिर्फ पुरुष ही गाते हैं। तीजनबाई पहली ऐसी लोक कलाकार हैं जिन्होंने कापालिक शैली में पांडवानी गाना शुरू किया। मधुर कं ठ, रंगीन फुंदनेदार एकतारे को लेकर कहानी का सजीव चित्रण करने क ी कला में माहिर तीजनबाई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुति दे चुकी हैं। पद्मश्री, पद्मभूषण समेत संगीत नाटक अकादमी सम्मान से सम्मानित हैं। बिलासपुर विवि ने उन्हें डीलिट की मानद उपाधि भी प्रदान की है।
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मेरठ आने पर जतायी थी संभावना
तीजनबाई पिछले वर्ष मेरठ में स्पिक मैके के तहत प्रस्तुति देने आई थीं। उन्होंने विद्या ग्लोबल स्कूल में पांडवानी की प्रस्तुति दी थी। तब हुई बातचीत में फिल्म बनने की बात पर संभावना जताई थी। तीजनबाई ने कहा था कि कुछ यहीं मेरठ इसके आसपास के लोग हैं जो मेरी बायोपिक बनाना चाहते थे। फिल्म कब तक बनेगी अभी बता नहीं सकती।