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Meerut News: नगर निगम की बोर्ड बैठक से पहले विपक्ष पार्षदों ने मोर्चा खोला
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- पुनरीक्षित बजट और पार्षदों के प्रति भेदभाव पर उठाए गए सवाल
फोटो
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। नगर निगम की बोर्ड बैठक से पहले ही विपक्ष के पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया। आरोप लगाया कि निगम अधिकारी शहर में विकास कार्यो में भेदभाव कर रहे हैं। कार्यकारणी बैठक में घोषित पुनरीक्षित बजट और विपक्ष के पार्षदों के वार्ड में 15-15 लाख रुपये के कार्य न होने पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी पार्षदों का कहना है कि बोर्ड बैठक की 96 घंटे पहले सूचना देनी होती है, लेकिन अधिकारियों ने अभी तक भी कई पार्षदों को जानकारी नहीं दी है। बैठक में विपक्ष के पार्षदों को बोलने तक नहीं दिया जाता है।
30 दिसंबर को नगर निगम की बोर्ड बैठक होनी तय है। इससे पहले सर्वदलीय विपक्ष के पार्षदों की दिल्ली रोड स्थित मारवाड़ी भोज में बैठक हुई। पार्षदों ने पुनरीक्षित बजट पर सवाल उठाते हुए कहा कि आगामी तीन महीने (अक्तूबर, नवंबर, दिसंबर) का मनगढ़ंत तरीके से बजट बनाकर पेश किया गया है। यह बजट सिर्फ सितंबर तक बनाना चाहिए था। कहा कि दलित, अल्पसंख्यक और मलिन बस्तियों की हालत खराब है। वहां पर सफाई भी नही हो पा रही है और ज्यादातर खंभों पर लाइट बंद पड़ी हुई है। पानी की आपूर्ति भी ठीक नहीं है। पहली बोर्ड बैठक में सभी पार्षदो से 15-15 लाख रुपये के प्रस्ताव लिए गए थे, जिनके अभी तक टेंडर नहीं निकाले गए।
नगर निगम के 15 वित्त आयोग निधि का पैसा एयर क्वालिटी, इम्मेन्ट और सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट में लगाया गया है, जबकि महानगर की कई सड़क की हालत बहुत ज्यादा खराब है। सड़क पर धूल उड़ने में लोगों को सांस लेने में भी काफी परेशानी होती है। पार्षदों ने कहा कि कार्यकारिणी की बैठक और सदन की बैठक में विपक्षी पार्षदों को बोलने तक नहीं दिया जाता। कार्यवृत्त में विपक्षी पार्षदों के प्रस्ताव को शामिल तक नहीं किया जाता है। शनिवार को सदन की बैठक में विपक्ष के पार्षद जनता के हित और निगम हित को नियमानुसार मजबूती के साथ रखेंगे। आपत्ति करने पर सभी विपक्ष के पार्षद एक साथ विरोध करेंगे, जरूरत पड़ने पर बैठक का बहिष्कार कर देंगे। बैठक में पार्षद पति रंजन शर्मा, पार्षद कीर्ति घोपला, पार्षद पति शाहिद अब्बासी, इकराम सैफी, सुमित शर्मा, रिहाना, सुखपाल निम्मी उर्फ लल्लू और अन्य पार्षद मौजूद थे।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। नगर निगम की बोर्ड बैठक से पहले ही विपक्ष के पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया। आरोप लगाया कि निगम अधिकारी शहर में विकास कार्यो में भेदभाव कर रहे हैं। कार्यकारणी बैठक में घोषित पुनरीक्षित बजट और विपक्ष के पार्षदों के वार्ड में 15-15 लाख रुपये के कार्य न होने पर सवाल उठाए हैं। विपक्षी पार्षदों का कहना है कि बोर्ड बैठक की 96 घंटे पहले सूचना देनी होती है, लेकिन अधिकारियों ने अभी तक भी कई पार्षदों को जानकारी नहीं दी है। बैठक में विपक्ष के पार्षदों को बोलने तक नहीं दिया जाता है।
30 दिसंबर को नगर निगम की बोर्ड बैठक होनी तय है। इससे पहले सर्वदलीय विपक्ष के पार्षदों की दिल्ली रोड स्थित मारवाड़ी भोज में बैठक हुई। पार्षदों ने पुनरीक्षित बजट पर सवाल उठाते हुए कहा कि आगामी तीन महीने (अक्तूबर, नवंबर, दिसंबर) का मनगढ़ंत तरीके से बजट बनाकर पेश किया गया है। यह बजट सिर्फ सितंबर तक बनाना चाहिए था। कहा कि दलित, अल्पसंख्यक और मलिन बस्तियों की हालत खराब है। वहां पर सफाई भी नही हो पा रही है और ज्यादातर खंभों पर लाइट बंद पड़ी हुई है। पानी की आपूर्ति भी ठीक नहीं है। पहली बोर्ड बैठक में सभी पार्षदो से 15-15 लाख रुपये के प्रस्ताव लिए गए थे, जिनके अभी तक टेंडर नहीं निकाले गए।
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नगर निगम के 15 वित्त आयोग निधि का पैसा एयर क्वालिटी, इम्मेन्ट और सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट में लगाया गया है, जबकि महानगर की कई सड़क की हालत बहुत ज्यादा खराब है। सड़क पर धूल उड़ने में लोगों को सांस लेने में भी काफी परेशानी होती है। पार्षदों ने कहा कि कार्यकारिणी की बैठक और सदन की बैठक में विपक्षी पार्षदों को बोलने तक नहीं दिया जाता। कार्यवृत्त में विपक्षी पार्षदों के प्रस्ताव को शामिल तक नहीं किया जाता है। शनिवार को सदन की बैठक में विपक्ष के पार्षद जनता के हित और निगम हित को नियमानुसार मजबूती के साथ रखेंगे। आपत्ति करने पर सभी विपक्ष के पार्षद एक साथ विरोध करेंगे, जरूरत पड़ने पर बैठक का बहिष्कार कर देंगे। बैठक में पार्षद पति रंजन शर्मा, पार्षद कीर्ति घोपला, पार्षद पति शाहिद अब्बासी, इकराम सैफी, सुमित शर्मा, रिहाना, सुखपाल निम्मी उर्फ लल्लू और अन्य पार्षद मौजूद थे।
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