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नकली सिगरेट प्रकरण: कंबोडिया से एक साल पहले लाई गई थी 3 करोड़ की मशीन
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आठ महीने में 40 करोड़ की सिगरेट बाजार में बेच चुके थे आरोपी
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। दूधली गांव के खादर में पकड़ी गई नकली सिगरेट फैक्टरी में सिगरेट निर्माण की पूरी आधुनिक मशीनरी लगी हुई थी। चार मशीनों वाले इस सेटअप की बाजार में कीमत करीब तीन से पांच करोड़ रुपये है। एक वर्ष पूर्व कंबोडिया से यह मशीन भारत में लाई गई थी। इसके बाद करीब आठ महीने पहले हस्तिनापुर में लाई गई। मशीन संचालित होने से अब तक आरोपी करीब 40 करोड़ रुपये की सिगरेट बाजार में बेच चुके हैं। पुलिस इस मामले में अन्य आरोपियों को भी तलाश रही है।
आईटीसी कंपनी की टीम और हस्तिनापुर पुलिस ने बृहस्पतिवार को छापा मारकर एक कॉलेज के भवन में नकली सिगरेट बनाने की फैक्टरी पकड़ी थी। वहां से करीब तीन करोड़ रुपये कीमत की सिगरेट बरामद की थी। मुख्य संचालक रवि किशोर को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। वह आठ महीने से यहां यह फैक्टरी चला रहा था। पुलिस की जांच में सामने आया कि मौके से मिली मशीन आधुनिक है। मोलिंस मार्क 9.5 मॉडल की मशीन तंबाकू और सिगरेट उद्योग में इस्तेमाल होने वाली एक उच्च-गति सिगरेट बनाने वाली मशीन है।
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नेटवर्क का असली मास्टरमाइंड कौन
-हस्तिनापुर। नकली सिगरेट का कारोबार अब सिर्फ स्थानीय स्तर का खेल नहीं रह गया है। फैक्टरी में मिली मशीनों ने जांच की दिशा सीधे कंबोडिया तक पहुंचा दी है। मशीनों पर मिले तकनीकी संकेतों से विदेशी कनेक्शन सामने आने के बाद पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर इन मशीनों को भारत और फिर हस्तिनापुर तक पहुंचाने वाले नेटवर्क में कौन-कौन शामिल है और कौन मास्टरमाइंड है। पुलिस यह खंगाल रही है कि मशीनें सीधे कंबोडिया देश से मंगाई गईं या किसी दूसरे देश के रास्ते भारत पहुंचीं।
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10 करोड़ के निवेश के पीछे कौन
हस्तिनापुर। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि स्थानीय स्तर पर फैक्टरी का संचालन कौन कर रहा था और इसके पीछे कौन-कौन लोग जुड़े थे। सबसे बड़ा सवाल करीब 10 करोड़ रुपये के निवेश को लेकर है। किस-किस ने इस फैक्टरी निवेश किया था। पुलिस की प्रारंभिक जांच में फैक्टरी के संचालन से जुड़े करीब पांच लोगों के नाम सामने आने की बात कही जा रही है। इनमें हस्तिनापुर और मवाना क्षेत्र के लोग शामिल बताए जा रहे हैं। जांच में गिरफ्तार मुख्य संचालक रवि किशोर के द्वारा बताए गए तरुण और दीपक के नाम सामने आए हैं। हालांकि उनका पता उसे भी मालूम नहीं था। अब पुलिस ने दीपक का पता सत्यापित कर लिया है, जबकि तरुण के बारे में अभी पूरी जानकारी नहीं मिल सकी है। दोनों को मवाना क्षेत्र का निवासी बताया जा रहा है। थाना पुलिस के साथ सर्विलांस और स्वाट टीम समेत कई जांच टीमें पूरे नेटवर्क की पड़ताल में जुटी हैं। शनिवार को स्वाट टीम प्रभारी के नेतृत्व में टीम थाना पुलिस के साथ दूधली के समीप स्थित फैक्टरी में पहुंची। टीम ने काफी देर तक मौके पर जांच-पड़ताल की है।
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वर्जन- एसपी देहात अभिजीत कुमार का कहना है कि पुलिस गहनता से जांच कर रही है। इसमें शामिल अन्य आरोपियों की भी तलाश की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि कहां-कहां पर माल की सप्लाई होती थी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। दूधली गांव के खादर में पकड़ी गई नकली सिगरेट फैक्टरी में सिगरेट निर्माण की पूरी आधुनिक मशीनरी लगी हुई थी। चार मशीनों वाले इस सेटअप की बाजार में कीमत करीब तीन से पांच करोड़ रुपये है। एक वर्ष पूर्व कंबोडिया से यह मशीन भारत में लाई गई थी। इसके बाद करीब आठ महीने पहले हस्तिनापुर में लाई गई। मशीन संचालित होने से अब तक आरोपी करीब 40 करोड़ रुपये की सिगरेट बाजार में बेच चुके हैं। पुलिस इस मामले में अन्य आरोपियों को भी तलाश रही है।
आईटीसी कंपनी की टीम और हस्तिनापुर पुलिस ने बृहस्पतिवार को छापा मारकर एक कॉलेज के भवन में नकली सिगरेट बनाने की फैक्टरी पकड़ी थी। वहां से करीब तीन करोड़ रुपये कीमत की सिगरेट बरामद की थी। मुख्य संचालक रवि किशोर को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। वह आठ महीने से यहां यह फैक्टरी चला रहा था। पुलिस की जांच में सामने आया कि मौके से मिली मशीन आधुनिक है। मोलिंस मार्क 9.5 मॉडल की मशीन तंबाकू और सिगरेट उद्योग में इस्तेमाल होने वाली एक उच्च-गति सिगरेट बनाने वाली मशीन है।
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नेटवर्क का असली मास्टरमाइंड कौन
-हस्तिनापुर। नकली सिगरेट का कारोबार अब सिर्फ स्थानीय स्तर का खेल नहीं रह गया है। फैक्टरी में मिली मशीनों ने जांच की दिशा सीधे कंबोडिया तक पहुंचा दी है। मशीनों पर मिले तकनीकी संकेतों से विदेशी कनेक्शन सामने आने के बाद पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर इन मशीनों को भारत और फिर हस्तिनापुर तक पहुंचाने वाले नेटवर्क में कौन-कौन शामिल है और कौन मास्टरमाइंड है। पुलिस यह खंगाल रही है कि मशीनें सीधे कंबोडिया देश से मंगाई गईं या किसी दूसरे देश के रास्ते भारत पहुंचीं।
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10 करोड़ के निवेश के पीछे कौन
हस्तिनापुर। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि स्थानीय स्तर पर फैक्टरी का संचालन कौन कर रहा था और इसके पीछे कौन-कौन लोग जुड़े थे। सबसे बड़ा सवाल करीब 10 करोड़ रुपये के निवेश को लेकर है। किस-किस ने इस फैक्टरी निवेश किया था। पुलिस की प्रारंभिक जांच में फैक्टरी के संचालन से जुड़े करीब पांच लोगों के नाम सामने आने की बात कही जा रही है। इनमें हस्तिनापुर और मवाना क्षेत्र के लोग शामिल बताए जा रहे हैं। जांच में गिरफ्तार मुख्य संचालक रवि किशोर के द्वारा बताए गए तरुण और दीपक के नाम सामने आए हैं। हालांकि उनका पता उसे भी मालूम नहीं था। अब पुलिस ने दीपक का पता सत्यापित कर लिया है, जबकि तरुण के बारे में अभी पूरी जानकारी नहीं मिल सकी है। दोनों को मवाना क्षेत्र का निवासी बताया जा रहा है। थाना पुलिस के साथ सर्विलांस और स्वाट टीम समेत कई जांच टीमें पूरे नेटवर्क की पड़ताल में जुटी हैं। शनिवार को स्वाट टीम प्रभारी के नेतृत्व में टीम थाना पुलिस के साथ दूधली के समीप स्थित फैक्टरी में पहुंची। टीम ने काफी देर तक मौके पर जांच-पड़ताल की है।
वर्जन- एसपी देहात अभिजीत कुमार का कहना है कि पुलिस गहनता से जांच कर रही है। इसमें शामिल अन्य आरोपियों की भी तलाश की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि कहां-कहां पर माल की सप्लाई होती थी।