फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Ever had to keep from the liver, now with the tied chains

कभी रखती थीं कलेजे से लगाकर, आज बांधकर रखती है जंजीरों से

Mon, 12 Jun 2017 06:25 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ Updated Mon, 12 Jun 2017 06:25 PM IST
विज्ञापन
Ever had to keep from the liver, now with the tied chains
मां ने बेटे के पैरों में डाली बेड़ियां

कहते है कि दुनिया में मां ही एक ऐसी होती हैं जो अपने बेटे की खुशी के लिए कुछ भी कर सकती हैं, लेकिन यहां तो मां ने ही अपने दिल के टुकड़े को जंजीरों से बांध दिया। लेकिन क्यों? जानने के लिए आगे जरूर पढ़ें। 

विज्ञापन


मेरठ के कस्बा मवाना की शुगर मिल के सामने मौहल्ला प्रीतनगर में आप जाएंगे तो आपको एक मां 15 वर्षीय बेटे को लेकर आती-जाती हुई मिल जाएगी। बेटे के पैरे में ताले लगाकर बांधी हुई जंजीर पड़ी है। 
विज्ञापन


किशोर इस जंजीर को हाथ में पकड़कर धीमे कदमों से अपनी मां के साथ जाता नजर आता है। अजनबियों के लिए यह दृश्य चौंकाने वाला हो सकता है, लेकिन इस मौहल्ले वालों के लिए यह आम हो गया है। ये जंजीरें उसकी सजा नहीं है, बल्कि उस समाज का आइना हैं। जहां पर किसी बेबस का मजाक बनाया जाता है। मजबूर मां समाज से अपनी औलाद को बचाने के लिए ममता का गला घोंट कर खुद अपने हाथों से उसके पैरों में जंजीरें डालने को मजबूर है।

विज्ञापन
विज्ञापन

उफ! यह गरीबी

Ever had to keep from the liver, now with the tied chains
मां ने बेटे के पैरों में डाली जंजीर

किशोर सचिन की मांग सरोज ने बताया कि उसका बेटा जब छोटा था तो उसके सिर में चोट लग गयी थी, जिसमें फ्रेक्चर हो गया था। तब से सचिन मानसिक रूप से बीमार है और उसकी अपनी समझ कम है। सचिन बड़ा हुआ तो घर से बाहर निकलने लगा। इस बीच मौहल्ले के छोटे बच्चों ने उसे पत्थरों से मारना शुरू कर दिया। कुछ आवारा लड़कों ने उसे नशा तक दे डाला। आये दिन की इन हरकतों से परेशान सरोज ने सचिन को घर में बंद रखना शुरू कर दिया, लेकिन सचिन को जैसे ही मौका मिलता, वह घर से बाहर निकल जाता और फिर जब वापस लौटता तो मां का कलेजा मुंह को आ जाता। उसे कभी पत्थरों से चोट लगी होती तो कभी नशा दिया होता। इससे तंग आकर सरोज ने सचिन के पैरों में जंजीर डाल दी। सचिन को अगर बाहर जाना होता है तो उसके साथ उसकी मां ही जाती है। 
 
सचिन के पिता मजदूर हैं। सरोज ने रोते हुए बताया कि जमा किए पैसे से सचिन का इलाज कराया। लेकिन मेरी मजबूरी है कि पैसे के अभाव में आगे इलाज नहीं करा पायी। जब भी मैं उसे जंजीर बांधती हॅू तो कलेजा मुंह को आ जाता है। खुला छोड़ दूं तो डर ये कि कोई पत्थर न मार दे। कई बार तो आवारा युवकों ने सचिन के साथ हैवानियत कर उसके हाथों में कील तक गाड़ दी। कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से सरकारी सहायता से इलाज की गुहार लगायी, लेकिन किसी ने मदद नहीं की। अब कुछ समाजसेवी युवकों के माध्यम से मुख्यमंत्री को पत्र भेजा गया है।

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरों को पढ़ने के लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed