कभी रखती थीं कलेजे से लगाकर, आज बांधकर रखती है जंजीरों से
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कहते है कि दुनिया में मां ही एक ऐसी होती हैं जो अपने बेटे की खुशी के लिए कुछ भी कर सकती हैं, लेकिन यहां तो मां ने ही अपने दिल के टुकड़े को जंजीरों से बांध दिया। लेकिन क्यों? जानने के लिए आगे जरूर पढ़ें।
मेरठ के कस्बा मवाना की शुगर मिल के सामने मौहल्ला प्रीतनगर में आप जाएंगे तो आपको एक मां 15 वर्षीय बेटे को लेकर आती-जाती हुई मिल जाएगी। बेटे के पैरे में ताले लगाकर बांधी हुई जंजीर पड़ी है।
किशोर इस जंजीर को हाथ में पकड़कर धीमे कदमों से अपनी मां के साथ जाता नजर आता है। अजनबियों के लिए यह दृश्य चौंकाने वाला हो सकता है, लेकिन इस मौहल्ले वालों के लिए यह आम हो गया है। ये जंजीरें उसकी सजा नहीं है, बल्कि उस समाज का आइना हैं। जहां पर किसी बेबस का मजाक बनाया जाता है। मजबूर मां समाज से अपनी औलाद को बचाने के लिए ममता का गला घोंट कर खुद अपने हाथों से उसके पैरों में जंजीरें डालने को मजबूर है।
उफ! यह गरीबी
किशोर सचिन की मांग सरोज ने बताया कि उसका बेटा जब छोटा था तो उसके सिर में चोट लग गयी थी, जिसमें फ्रेक्चर हो गया था। तब से सचिन मानसिक रूप से बीमार है और उसकी अपनी समझ कम है। सचिन बड़ा हुआ तो घर से बाहर निकलने लगा। इस बीच मौहल्ले के छोटे बच्चों ने उसे पत्थरों से मारना शुरू कर दिया। कुछ आवारा लड़कों ने उसे नशा तक दे डाला। आये दिन की इन हरकतों से परेशान सरोज ने सचिन को घर में बंद रखना शुरू कर दिया, लेकिन सचिन को जैसे ही मौका मिलता, वह घर से बाहर निकल जाता और फिर जब वापस लौटता तो मां का कलेजा मुंह को आ जाता। उसे कभी पत्थरों से चोट लगी होती तो कभी नशा दिया होता। इससे तंग आकर सरोज ने सचिन के पैरों में जंजीर डाल दी। सचिन को अगर बाहर जाना होता है तो उसके साथ उसकी मां ही जाती है।
सचिन के पिता मजदूर हैं। सरोज ने रोते हुए बताया कि जमा किए पैसे से सचिन का इलाज कराया। लेकिन मेरी मजबूरी है कि पैसे के अभाव में आगे इलाज नहीं करा पायी। जब भी मैं उसे जंजीर बांधती हॅू तो कलेजा मुंह को आ जाता है। खुला छोड़ दूं तो डर ये कि कोई पत्थर न मार दे। कई बार तो आवारा युवकों ने सचिन के साथ हैवानियत कर उसके हाथों में कील तक गाड़ दी। कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से सरकारी सहायता से इलाज की गुहार लगायी, लेकिन किसी ने मदद नहीं की। अब कुछ समाजसेवी युवकों के माध्यम से मुख्यमंत्री को पत्र भेजा गया है।
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