फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   education ramsa

मेरठ और सहारनपुर तय करेंगे रमसा का भविष्य 

Wed, 06 Apr 2016 01:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ Updated Wed, 06 Apr 2016 01:39 AM IST
विज्ञापन
education ramsa
लोगो। - फोटो : लोगो।
विश्व बैंक की मदद से संचालित राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) की आगे की दिशा तय करने का दारोमदार अब मेरठ और सहारनपुर जिलों पर है। इन दोनों जिलों के विद्यालयों को सबसे बेहतर मानते हुए प्रदेश सरकार ने विश्व बैंक और केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की टीम को निरीक्षण का न्यौता दिया है।
विज्ञापन


इस निरीक्षण के बाद ही केंद्र सरकार बजट जारी करने के फैसले पर निर्णय लेगी। ऐसे में निरीक्षण में खामियां मिलने पर पूरे प्रदेश को दंड भुगतना होगा। मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन से एक टीम दोनों जिलों में भेजी गई है। शासन की ओर से प्रति वर्ष प्रदेश के दो जिलों का सैंपल सर्वे कराया जाता है। सर्वे के आधार पर ही ज्वाइंट रिव्यू मिशन (जेआरएम) प्रदेश में अभियान की स्थिति का आंकलन करता है। जेआरएम (विश्व बैंक और मानव संसाधन मंत्रालय की टीम) रिपोर्ट के आधार पर ही केंद्र से बजट जारी होता है।
विज्ञापन


प्रदेश सरकार को रिपोर्ट में दिए गए निर्देश पर काम करना होता है। इस बार ज्वाइंट रिव्यू मिशन 12 से 16 अप्रैल तक मेरठ और सहारनपुर जिले में रमसा के तहत संचालित सभी राजकीय और मॉडल स्कूलों का निरीक्षण करेगा। निरीक्षण से पहले ही लखनऊ से राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के सहायक निदेशक जीवेंद्र सिंह ऐरी और कार्डिनेटर अनु राठी ने मंगलवार को सहारनपुर का दौरा किया। बुधवार को यह टीम मेरठ पहुंचेगी। जीवेंद्र सिंह ऐरी ने बताया है कि यह रिव्यू है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसमें रमसा से जुड़े हर कार्यक्रम को देखा जाएगा। जेआरएम टीम किसी भी विद्यालय में जा सकती है। इस दौरान टीम विभागीय अधिकारियों से लेकर डीएम से भी वार्ता करेगी। जिला स्तर पर इस अभियान की निगरानी डीएम को ही सौंपी गई है। यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी मिली तो वह पूरे प्रदेश के लिए अच्छी नहीं होगी। इसलिए दोनों जिलों को पहले से जानकारी दे दी गई है। साथ ही व्यवस्थाओं की समीक्षा हम स्वयं कर रहे हैं। 


इन बिंदुओं पर होगी जांच 
- रमसा के तहत होने खर्च होने वाली हर राशि का ब्योरा 
- विद्यालयों में इंफ्रास्ट्रेक्चर से लेकर छात्रों और शिक्षकों की संख्या 
- शिक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों से बातचीत  
- विद्यालय संचालित होने के बाद से छात्रों की संख्या में वृद्धि 
- डीआईओएस कार्यालय की मॉनीटरिंग रिपोर्ट 

शिक्षक संख्या अहम चुनौती 
रिव्यू के बीच में राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी सबसे अहम चुनौती है। कहीं पर सात शिक्षकों की तैनाती तो कहीं पर महज दो शिक्षक ही तैनात हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग के लिए दिक्कतें हो सकती है। शहरी क्षेत्र से सटे विद्यालयों में शिक्षकों को ज्यादा तैनाती दी गई है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed