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नीट वन देने वालों को टू पड़ा भारी
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Mon, 25 Jul 2016 02:46 AM IST
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परीक्षा देने का लोगो।
- फोटो : अमर उजाला
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मेडिकल में एडमिशन के लिए रविवार को नीट (नेशनल एलिजिबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट) टू हुआ। नीट का मेरठ में सेंटर नहीं था। यहां के छात्र-छात्राओं ने दिल्ली और नोएडा में पेपर दिया। जानकारों के मुताबिक नीट टू वन से टफ रहा। जिन्होंने नीट वन देकर स्कोर बढ़ाने की वजह से टू दिया, उनको भारी पड़ा।
नीट वन एक मई को हुआ था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीपीएमटी की मनाही हो गई थी। अभ्यर्थियों को एक और एग्जाम का मौका दिया गया। नीट टू में नीट वन वालों को भी बैठने का मौका दिया गया। शर्त यह थी कि टू में बैठने पर वन की योग्यता खत्म हो जाएगी। तैयारी के लिए छात्रों को करीब दो महीने का वक्त मिला। एक्सपर्ट करमवीर सिंहल का कहना है नीट वन छोड़ने का रिस्क कई छात्रों को भारी पड़ा है। जिनका स्कोर अच्छा था तो उन्हें ज्यादा फायदा नहीं हुआ। कम स्कोर वाले बेहतर तैयारी से कुछ अप हो सकते हैं।
फिजिक्स के सवाल लंबे आए, जिस वजह से कुछ सवाल छूट गए। केमेस्ट्री में आर्गेनिक का पार्ट टफ था। एक्सपर्ट विजय अरोड़ा के मुताबिक फिजिक्स और केमेस्ट्री का पेपर टफ रहा। नीट वन के मुकाबले टू टफ है। यूपी बोर्ड के छात्र जो सीपीएमटी की तैयारी कर रहे थे, एनसीईआरटी बेस्ड पेपर होने की वजह से उन्हें भारी पड़ा। एक्सपर्ट अंकुर दत्त का कहना है बायो के पेपर एनसीईआरटी बेस्ड था। नीट टू टफ रहने की उम्मीद थी, वैसा ही हुआ।
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नीट वन एक मई को हुआ था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीपीएमटी की मनाही हो गई थी। अभ्यर्थियों को एक और एग्जाम का मौका दिया गया। नीट टू में नीट वन वालों को भी बैठने का मौका दिया गया। शर्त यह थी कि टू में बैठने पर वन की योग्यता खत्म हो जाएगी। तैयारी के लिए छात्रों को करीब दो महीने का वक्त मिला। एक्सपर्ट करमवीर सिंहल का कहना है नीट वन छोड़ने का रिस्क कई छात्रों को भारी पड़ा है। जिनका स्कोर अच्छा था तो उन्हें ज्यादा फायदा नहीं हुआ। कम स्कोर वाले बेहतर तैयारी से कुछ अप हो सकते हैं।
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फिजिक्स के सवाल लंबे आए, जिस वजह से कुछ सवाल छूट गए। केमेस्ट्री में आर्गेनिक का पार्ट टफ था। एक्सपर्ट विजय अरोड़ा के मुताबिक फिजिक्स और केमेस्ट्री का पेपर टफ रहा। नीट वन के मुकाबले टू टफ है। यूपी बोर्ड के छात्र जो सीपीएमटी की तैयारी कर रहे थे, एनसीईआरटी बेस्ड पेपर होने की वजह से उन्हें भारी पड़ा। एक्सपर्ट अंकुर दत्त का कहना है बायो के पेपर एनसीईआरटी बेस्ड था। नीट टू टफ रहने की उम्मीद थी, वैसा ही हुआ।
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