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दोस्ती जब किसी से की जाए, दुश्मनों की भी राय ली जाए...
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jun 2016 01:45 AM IST
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नौचंदी पटेल मंडप में मुशायरे में पंक्तियां सुनाते
- फोटो : अमर उजाला
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संयुक्त मेला नौचंदी समिति के तत्वाधान में बृहस्पतिवार रात पटेल मंडप में अखिल भारतीय मुशायरे का आयोजन किया गया। जिसमें विभिन्न राज्यों से आए शायर और कवियों ने अपने कलाम पेश किए। उद्घाटन सांसद राजेंद्र अग्रवाल, मेयर हरिकांत अहलूवालिया ने किया। \
कार्यक्रम में मशहूर गीतकार संतोषानंद भी पहुंचे, जिन्हें सुनने के लिए लोग उतावले रहे। संचालन मुंबई से आए दानिश जावेद ने किया।अजीमुश्शान कुल हिंद मुशायरे में राहत इंदौरी ने पढ़ा कि ‘दोस्ती जब किसी से की जाए, दुश्मनों की भी राय ली जाए, बोतलें खोल के तो पी ली बरसों, आज दिल खोल के पी ली जाए’।
अफजल मंगलौरी ने कुछ यूं पढ़ा कि ‘दिखा रहा वही आंख अब समुंदर को, जिस एक कतरे को दरिया बना लिया मैंने’। इकबाल अशहर ने कलाम पेश किया कि ‘सितम तो यह है कि हमारी सफो में शामिल है चिराग बुझते ही खीमा बदलने वाले लोग, हमारे दौर का फिरोन डूबता ही नहीं, कहां चले गए पानी पे चलने वाले लोग’।
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डॉ. एजाज पोपुलर मेरठी ने कहा कि ‘तदबीर का खोटा है मुकद्दर से कड़ा है, दुनिया इसे कहती है चालाक बड़ा है, खुद तीस का है, दुल्हन साठ बरस की, गिरती हुई दीवार के साये में खड़ा है’। डॉ. राही निजामी ने पढ़ा कि ‘समझ कर जो न कुछ समझे उसे नादान कहते हैं, हुकूमत जो करे दिल पर उसे सुल्तान कहते हैं, वो चाहे लाख हो धनवान इस से क्या गर्ज हमको, गरीबों के जो काम आए उसे धनवान कहते हैं’। कार्यक्रम में वसीम बरेलवी, डॉ. नवाज देवबंदी, हसन काजमी लखनऊ, जावेद गोंडवी, सज्जाद, तुराज मुंबई, सीमा रामपुरी भी पहुंचीं। इस मौके भाजपा महानगर अध्यक्ष करूणेश नंदन गर्ग, कमलदत्त शर्मा, एएम तुराज, संयोजक तहसीन अंसारी और मुफ्ती मोहम्मद नईम मौजूद रहे।
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कार्यक्रम में मशहूर गीतकार संतोषानंद भी पहुंचे, जिन्हें सुनने के लिए लोग उतावले रहे। संचालन मुंबई से आए दानिश जावेद ने किया।अजीमुश्शान कुल हिंद मुशायरे में राहत इंदौरी ने पढ़ा कि ‘दोस्ती जब किसी से की जाए, दुश्मनों की भी राय ली जाए, बोतलें खोल के तो पी ली बरसों, आज दिल खोल के पी ली जाए’।
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अफजल मंगलौरी ने कुछ यूं पढ़ा कि ‘दिखा रहा वही आंख अब समुंदर को, जिस एक कतरे को दरिया बना लिया मैंने’। इकबाल अशहर ने कलाम पेश किया कि ‘सितम तो यह है कि हमारी सफो में शामिल है चिराग बुझते ही खीमा बदलने वाले लोग, हमारे दौर का फिरोन डूबता ही नहीं, कहां चले गए पानी पे चलने वाले लोग’।
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डॉ. एजाज पोपुलर मेरठी ने कहा कि ‘तदबीर का खोटा है मुकद्दर से कड़ा है, दुनिया इसे कहती है चालाक बड़ा है, खुद तीस का है, दुल्हन साठ बरस की, गिरती हुई दीवार के साये में खड़ा है’। डॉ. राही निजामी ने पढ़ा कि ‘समझ कर जो न कुछ समझे उसे नादान कहते हैं, हुकूमत जो करे दिल पर उसे सुल्तान कहते हैं, वो चाहे लाख हो धनवान इस से क्या गर्ज हमको, गरीबों के जो काम आए उसे धनवान कहते हैं’। कार्यक्रम में वसीम बरेलवी, डॉ. नवाज देवबंदी, हसन काजमी लखनऊ, जावेद गोंडवी, सज्जाद, तुराज मुंबई, सीमा रामपुरी भी पहुंचीं। इस मौके भाजपा महानगर अध्यक्ष करूणेश नंदन गर्ग, कमलदत्त शर्मा, एएम तुराज, संयोजक तहसीन अंसारी और मुफ्ती मोहम्मद नईम मौजूद रहे।