मेरठ: पोस्टमार्टम हाउस से शव गायब, तीन घंटे तक जमकर बखेड़ा, फिर ऐसे मिला
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यूपी के मेरठ मेडिकल अस्पताल स्थित पोस्टमार्टम हाउस पर सोमवार दोपहर उस समय हड़कंप मच गया, जब वीरपाल नाम के व्यक्ति का शव गायब होने का शोर मच गया। वीरपाल के परिजनों ने हंगामा किया तो पुलिस और डॉक्टरों के हाथ पैर फूल गए। छानबीन शुरू हुई तो पता चला कि वीरपाल के साथ ही सरूरपुर से आए भूपेश नाम के व्यक्ति का भी पोस्टमार्टम हुआ था। भूपेश के परिजन वीरपाल का शव ले गए। इस लापरवाही पर परिजनों ने बखेड़ा कर दिया। करीब तीन घंटे बाद वीरपाल का शव वापस पहुंचने पर मामला शांत हुआ।
खरखौदा थानाक्षेत्र के खड़खड़ी गांव निवासी वीरपाल सिंह की हत्या रविवार को हुई थी। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम हाउस भिजवा दिया था। सोमवार दोपहर करीब 1:30 बजे परिजन पोस्टमार्टम के कागज लेकर पहुंचे। लेकिन वीरपाल का शव गायब मिला। पोस्टमार्टम हाउस पर तैनात कर्मचारी जब बोले कि यहां तो वीरपाल सिंह का शव आया ही नहीं, तो परिजन भड़क गए। परिजनों ने खरखौदा थाना पुलिस को सूचना दे दी। परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर स्थानीय मेडिकल थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने परिजनों को शांत कर वीरपाल का शव ढूंढना शुरू किया। पोस्टमार्टम हाउस में सील रखे पांच शवों को खोलकर देखा गया, लेकिन वीरपाल का शव नहीं मिला। हंगामा बढ़ता गया और परिजनों ने डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
भइया आप किसका शव ले गए थे
मामला तूल पकड़ने पर पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारियों ने उन लोगों को फोन करना शुरू किया जो पोस्टमार्टम कराकर शव वहां से ले जा चुके थे। कर्मचारियों ने कैथवाड़ी सरूरपुर निवासी भूपेश के परिजनों को फोन कर पूछा कि भइया आप किसका शव ले गए थे। परिजनों ने शव खोलकर देखा तो वह भूपेश के बजाय वीरपाल का निकला। बाद में भूपेश के परिजन वीरपाल का शव लेकर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और भूपेश का लेकर गए।
आखिर किसकी लापरवाही मानें
परिजनों ने पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों और कर्मचारियों की लापरवाही बताकर हंगामा किया। कहा कि शव को सुपुर्दगी में देने से पहले उसके परिजनों से पहचान करानी चाहिए थी। जबकि डॉक्टरों का कहना है कि परिजनों को पहचान करके शव लेना चाहिए था। कर्मचारी शव की पहचान कराकर ही सील करता है। यह अगर नहीं हुआ तो इसकी जांच कराई जाएगी।
पुलिस और परिजनों की लापरवाही
सीएमओ डॉ. राजकुमार का कहना है कि इसमें पुलिस और किसी एक मृतक के परिजनों की लापरवाही है। उन्हें शव को देखकर ले जाना चाहिए था। सरूरपुर के लोग किसी दूसरे का शव ले गए थे। उन्हें फोन कर बताया गया तो वह रास्ते से शव लेकर लौटे और वापस अपने परिजन शव का लेकर गए। पोस्टमार्टम भी प्रक्रिया के तहत हुआ है।
उल्लेखनीय है कि खरखौदा थाना क्षेत्र में देर रात अज्ञात हमलावरों ने वीरपाल सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी। घर के पास हत्या से रात में अफरा तफरी मच गई थी। हत्या का पता चलते ही एसपी देहात और सीओ किठौर फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया था।
खड़खडी निवासी वीरपाल पुत्र हरिचंद मोटर बाइंडिंग का काम करता था। जिसके चलते रात में घर आने का कोई समय निश्चित नहीं था। रविवार रात भी वह देरी से घर लौटा। बाइक घेर में खड़ी करने के बाद जैसे ही वह घर की ओर जाने के लिए घेर से बाहर निकला और बाहर की तरफ दरवाजा बंद करने लगा। तभी किसी ने उसे गोली मार दी। गोली चलने की आवाज से घर में सो रहे लोग हड़बड़ाकर उठ गये। वीरपाल के चिल्लाने की आवाज सुन परिजन घर के मुख्य दरवाजे की ओर दौड़े, पास जाकर देखा तो वीरपाल खून से लथपथ जमीन पर पड़ा था। परिजन उसे उठाकर अस्पताल ले जाने लगे, इसी दौरान उसने दम तोड़ दिया। परिजनों ने कंट्रोल रूम को सूचना दी।
सूचना पर एसपी देहात राजेश कुमार, सीओ किठौर चक्रपाणी त्रिपाठी, इंस्पेक्टर खरखौदा राजेंद्र त्यागी मौके पर पहुंचे। डॉग स्क्वाएड ने भी मौके पर पहुंचकर जांच पड़ताल की। रात में परिजनों का रो रो कर बुरा हाल था।
एसपी देहात राजेश कुमार ने बताया कि परिजनों ने किसी रंजिश से इंकार किया है। पुलिस कई बिंदुओं पर जांच कर रही है। शव को पीएम के लिए भेज दिया है। तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर कार्रवाई की जायेगी। एसपी देहात का कहना है कि हमलावर एक थे या दो, इसकी जांच की जा रही है। लेकिन गोली कमर के पास पीछे की तरफ से मारी गई है।
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