डीएम अंकल! मंगतपुरम आएं तो देखें कैसे लेते हैं हम सांस
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मेरठ में महानगर कूड़े के ढेर पर है। मंगतपुरम में कूड़े के पहाड़ नगर निगम और प्रशासन के अफसरों के लिए कोई समस्या ही नहीं है, लेकिन इसी कूडे़ के कारण आसपास की जनता का जीना दुश्वार है। कालोनी निवासी, स्कूल कालेज संचालक और सामाजिक संस्थाओं को जब नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों से कोई राहत नहीं मिली तो न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया।
न्यायालय से राहत भी मिली, लेकिन निगम अफसरों ने न्यायालय में ही झूठा शपथ पत्र दाखिल कर दिया कि कूडे़ के पहाड़ हटाए जा चुके हैं। जबकि मौके पर लगातार कूड़ा डाला जा रहा है। सोमवार को स्कूली बच्चों ने मानव शृंखला बनाकर कूडे़ के पहाड़ हटाने के लिए डीएम से गुहार लगायी।
कई बच्चों की तबियत भी हो चुकी है खराब
अमर उजाला ने कूड़े के पहाड़ और इसकी दुर्गंध से परेशान लाखों लोगों की आवाज को उठाया। सोमवार को मंगतपुरम स्थित भाई जोगा सिंह इंटर कालेज के छात्र-छात्राएं कूड़े के पहाड़ के विरोध में उतर आए। छात्र-छात्राओं ने कूडे़ के पहाड़ के पास पहुंचकर मानव शृंखला बनाकर नगर निगम प्रशासन को संकेत देने का प्रयास किया है। स्कूली छात्र-छात्राओं का कहना है कि उन्हें घर से स्कूल आते समय मुंह लपेट कर आना पड़ता है। कूड़े से निकलने वाली बदबू में सांस लेना भी मुश्किल है। कई बार बच्चों को तबीयत भी खराब हो जाती है। अब तो डीएम अंकल पर ही भरोसा है। वह एक बार वे यहां आएं तो वह भी जाने की हम कैसे लेते हैँं बदबू में सांस। ये स्कूल भी कूडे़ के पहाड़ के निकट ही है। यहां के छात्र छात्राएं भी कूडे़ की दुर्गंध से आजिज आ चुके हैं।
कुत्ते हो रहे खतरनाक
मंगतपुरम में कूड़े की पहाड़ी के नीचे ही मृत पशुओं को काटा जाता है। पशुओं के अवशेष खाने के लिए 100 से अधिक कुत्तों का झुंड यहां रहता है। मृत पशुओं का मांस खाकर सभी कुत्ते आदमखोर हो चुके हैं। यहां से गुजरना जान को जोखिम में डालने के बराबर है। स्थानीय लोगों की माने तो ये आदमखोर कुत्ते कई बार बच्चे और अन्य लोगों पर हमला बोल चुके हैं। इतना ही नहीं आदमखोर कुत्ते पशुओं के अवशेष को पूरे क्षेत्र में फैला देते हैं। जिससे पूरा क्षेत्र गंदगी में तब्दील है।
नगर निगम लगातार डाल रहा है कूड़ा
नगर निगम प्रशासन ने भले ही एनजीटी में जवाब दाखिल करते हुए मंगतपुरम में कूड़े की पहाड़ी न होने की बात कही हो, लेकिन धरातल पर स्थिति महानगर की 20 लाख जनसंख्या से छुपी नहीं है। अभी भी प्रतिदिन महानगर का कूड़ा मंगतपुरम में डाला जा रहा है। कूड़े को पहाड़ी के ऊपर पहुंचाने के लिए एक पोर्कलेन मशीन भी लगायी हुई है।
कुष्ठ रोगी भी न्यायालय की शरण में
मंगतपुरम में डाले जा रहे कूड़े को लेकर कुष्ठ रोगी भी न्यायालय पहुंच गए हैं। कारण है कि कूड़े से निकलने वाली गैस और बदबू में 105 कुष्ठ रोगियों के जीवन पर संकट खड़ा हो गया है। कुष्ठ रोगी बैरागी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जिसमें उन्होंने कूड़े की पहाड़ी को हटवाने और भविष्य में कूड़ा न डलवाने की मांग रखी है।
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