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मेरठ के डीआईजी के तबादले पर सियासत
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Wed, 23 Sep 2015 01:46 AM IST
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पंचायत चुनावों से पहले उत्तर प्रदेश सरकार मन मुताबिक तबादले कर रही है। इसका एक बड़ा उदाहरण मेरठ के डीआईजी रमित शर्मा का तबादला है। बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव में मेरठ रेंज के डीआईजी रमित शर्मा को पर्यवेक्षक बनाने पर पहले तो उत्तर प्रदेश सरकार ने उनकी मेरठ में तैनाती को अहम बताते हुए ऐतराज जताया, फिर उनका तबादला भी कर दिया।
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चुनाव आयोग को पत्र लिखकर यूपी सरकार ने कहा है कि पंचायत चुनाव और मेरठ की संवेदनशीलता को देखते हुए डीआईजी रमित शर्मा को बिहार भेजना ठीक नहीं होगा। डीआईजी मेरठ रेंज के तौर पर रमित शर्मा के महत्व को बताते हुए सरकार ने उनकी जगह तीन आईपीएस अफसरों के नाम का पैनल आयोग के पास भेजा। आयोग ने तो प्रदेश सरकार के इस प्रस्ताव पर अभी कोई फैसला नहीं किया लेकिन सरकार ने अचानक डीआईजी का तबादला लखनऊ कर दिया।
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बिहार चुनाव के लिए आयोग ने उत्तर प्रदेश के छह आईपीएस अधिकारियों की पर्यवेक्षक के रूप में तैनाती की है। आयोग ने अपने नेटवर्क से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर इन अफसरों का चयन किया है। मेरठ रेंज के डीआईजी की तैनाती पर यूपी शासन के सचिव एसके रघुवंशी ने आयोग को पत्र लिखा है। मंगलवार को पहुंचे पत्र में कहा गया है कि मेरठ रेंज के डीआईजी रमित शर्मा प्रदेश में होने वाले पंचायत चुनावों की तैयारियों में जुटे हैं। वह पंचायत चुनाव के लिए मेरठ परिक्षेत्र को देख रहे हैं। मेरठ परिक्षेत्र एक संवेदनशील क्षेत्र भी है, लिहाजा उनकी जगह बिहार में दूसरे आईपीएस अधिकारी को तैनात करना ठीक रहेगा।
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यूपी सरकार ने आईपीएस नवनीत कुमार राणा, संजय कक्कड़ और दलबीर सिंह यादव का नाम सुझाया है। सरकार के भेजे गए पत्र से स्पष्ट है कि उसने रमित शर्मा को मेरठ के लिए अहम बताते हुए बिहार भेजने से मना कर दिया। ऐसे में सवाल यह है कि फिर अहम दिनों में डीआईजी का एकाएक तबादला क्यों कर दिया गया। अब अचानक सरकार ने डीआईजी का तबादला करके इतना तो साफ कर ही दिया है कि उसके अपने पत्र में लिखे मजमून और मंशा में काफी अंतर है। मेरठ में कांवड़ यात्रा सहित कई अहम मामलों को पिछले लगभग 11 महीनों में अहम भूमिका निभाने वाले वरिष्ठ आईपीएस का पंचायत चुनाव से पहले तबादला भी सतर्कता अधिष्ठान यूपी के डीआईजी के तौर पर किया गया है।
सोशल मीडिया रिसर्च सेंटर स्थापित किया था
मेरठ में सोशल मीडिया रिसर्च सेंटर स्थापित करना डीआईजी मेरठ के तौर पर रमित शर्मा का अहम काम रहा। जब यह सेंटर मेरठ मेेें स्थापित हुआ तो इसे पुलिसिंग के लिए बड़ा कदम बताया गया। प्रदेश के इस पहले लैब से सोशल मीडिया पर निगरानी रखने में बड़ी मदद भी मिली है। इस लैब को बाद में पूरे प्रदेश के हिसाब से तैयार किया जाना है। कहा तो यह भी गया था कि पिछले दिनों डीआईजी रमित शर्मा को विदेश में ट्रेनिंग पर भेजने का मामला रिसर्च सेंटर को लेकर उनकी उपयोगिता के कारण टाल दिया गया था। सोशल मीडिया पर लगातार माहौल बिगाड़ने की कोशिशों के बीच यह सेंटर निगरानी रखे हुए है। पिछले दिनों ही डीआईजी ने सोशल मीडिया पर ही एसपीओ रखने के लिए प्रस्ताव भी मांगे थे। उन्हें बेहतर कार्य के लिए पिछले दिनों राष्ट्रपति पदक भी दिया गया है।