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डीआईजी ने की पहल, मां के साथ जेल में बंद बच्चे अब स्कूल जाएंगे, अफसरों को दी व्यवस्था की जिम्मेदारी

Fri, 20 Mar 2020 07:30 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर Published by: कपिल kapil Updated Fri, 20 Mar 2020 07:30 PM IST
सार

डीआईजी जेल लव कुमार ने शुक्रवार को जिला कारागार का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने एक पहल की।

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DIG Love Kumar inspected the jail and ordered the children go to school
डीआईजी ने किया जेल का निरीक्षण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

डीआईजी (जेल) लव कुमार ने शुक्रवार को जिला कारागार का निरीक्षण किया। यहां उन्होंने कोरोना वायरस के मद्देनजर जेल अस्पताल में बंदियों की हालत देखने के साथ ही बैरकों का निरीक्षण किया। उन्होंने जेल के अफसरों को निर्देश दिए कि 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग, बीमार और महिला बंदियों की विशेष निगरानी की जाए। इसके साथ ही कोरोना वायरस के मद्देनजर ही एक सप्ताह यानी 27 मार्च तक बंदियों के परिजनों की मुलाकात व्यवस्था पर रोक लगाने के निर्देश दिए। 

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इसके अलावा उन्होंने एक पहल भी की। डीआईजी ने जेल अफसरों से कहा कि मां के साथ रहने वाले बच्चों को भी स्कूल भेजने की बेहतर व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं के साथ रहने वाले बच्चों का कोई दोष नहीं होता है। इसलिए ऐसे बच्चों को चिह्नित कर यह कदम उठाया जाए।
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कारागार के निरीक्षण के दौरान डीआईजी ने सबसे पहले यहां के अस्पताल का निरीक्षण किया। यहां जेल के अफसरों ने बताया कि कोरोना के लक्षणों वाले मरीज यहां नहीं हैं। खांसी, जुकाम जैसे सामान्य रोगी हैं। यहां अधिकतर बंदी मास्क लगाए हुए मिले। डीआईजी ने कहा कि यदि कोरोना वायरस के लक्षणों के साथ कोई संदिग्ध मिले तो उसकी समय से सूचना देकर उपचार दिलाया जाए। इसके साथ ही मास्क, सैनेटाइजर आदि की व्यवस्था की जाए।

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जेल के चिकित्सक, पैरा मेडिकल स्टाफ भी मास्क लगाए हुए था। हालांकि खुद डीआईजी बिना मास्क ही निरीक्षण कर रहे थे। इस दौरान वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने कहा कि जेल में बंदियों के स्वास्थ्य के साथ ही उनकी सुरक्षा का ध्यान रखा जा रहा है।

350 से अधिक बंदियों की होगी विशेष निगरानी
जिला कारागार में 1670 बंदी हैं। इनमें 350 से अधिक बंदियों की विशेष निगरानी की जाएगी। ये ऐसे बंदी हैं जिनकी उम्र 60 साल से अधिक है और उन्हें स्वास्थ्य संबंधी अन्य समस्याएं भी पहले से रही हैं। इसलिए इन पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है।

स्वास्थ्य विभाग ने भी पहले लगाया था कैंप
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिला कारागार में फरवरी माह में क्षय रोगी खोज अभियान के तहत कैंप लगाया गया था। इसमें 1628 बंदियों का चिकित्सीय परीक्षण किया गया था। इनमें से 112 बंदियों में क्षय रोग जैसे लक्षण मिले थे। इस टीम में शामिल रहे डॉ. एमपी सिंह चावला के मुताबिक परीक्षण में किसी बंदी को टीबी नहीं मिली है।

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