देवबंदी उलमा बोले, खामियों को दूर किए बिना तीन तलाक पर बिल नामंजूर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तीन तलाक देने पर सजा के प्रावधान को लेकर केंद्र सरकार द्वारा बृहस्पतिवार को लोकसभा में बिल पेश किए जाने पर दारुल उलूम समेत देवबंदी उलमा ने सख्त नाराजगी का इजहार किया है। उलमा का कहना है कि बिल की खामियों को दूर किए बिना मौजूदा प्रारूप में इसे पेश करने से साफ है कि केंद्र सरकार वर्ष 2019 को जेहन में रखकर कार्य कर रही है। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार को मुस्लिम विरोधी भी बताया है।
केंद्र सरकार तीन तलाक पर द् मुस्लिम वीमेन प्रोटेक्शन ऑफ राइटस इन मैरिज एक्ट नाम से इस विधेयक को ला रही है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड समेत दूसरी बड़ी तंजीमे लगातार इसका विरोध कर रही हैं, लेकिन विरोध को दरकिनार कर केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को इसे लोकसभा में पेश कर दिया।
इसको लेकर मुसलमानों के सबसे बड़े दीनी इदारे दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हुकूमत को चाहिए था कि वह बिल को पेश करने से पहले ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए पत्र का संज्ञान लेकर बिल में मौजूद खामियों को दूर कर इसे पेश करती, लेकिन उन्होंने बिल को मौजूदा प्रारूप में ही पेश कर दिया। उन्होंने कहा कि वह पहले भी कह चुके हैं कि इस मामले में वह ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ हैं। इस पर अब बोर्ड का जो भी रुख होगा वह उसका समर्थन करेंगे।
पढ़ें : देवबंदी उलमा बोले, सीएम योगी आदित्यनाथ को इस्लाम की सही जानकारी नहीं
दारुल उलूम वक्फ के मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी का कहना है कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बहाना बनाकर इस बिल को पेश किया है। विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए मौलाना सूफियान ने कहा कि सेक्युलर होने का दम भरते हुए जो पार्टियां मुस्लिम परस्त होने का दावा करती हैं उनकी भी इस बिल के पेश होने से पोल खुल गई है। उन्होंने कहा कि यह बिल शरिया कानून के खिलाफ है। ये कानून बनता है तो बहुत से परिवार बर्बादी की कगार पर पहुंच जाएंगे। दारुल उलूम वक्फ के शेखुल हदीस मौलाना अहमद खिजर शाह मसूदी का कहना है कि सरकार ने मौजूदा प्रारूप में बिल को पास किया जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। अगर ये कानून शरिया कानून की रोशनी में नहीं बनाया गया तो हिंदुस्तान का मुसलमान इसे कभी तसलीम (स्वीकार) नहीं करेगा।
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के उल्लंघन पर है तीन साल की सजा
तीन तलाक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने वाली सहारनपुर के मंडी कोतवाली क्षेत्र स्थित आली की चुंगी निवासी आतिया साबरी ने ने कहा है कि संसद में आज पेश हुए तलाक बिल पर जो बहस हो रही है, इसका समर्थन कांग्रेस ने भी कर दिया है। इससे पूरे समाज को नई दिशा मिलेगी।
उन्होंने कहा कि वह समाज के लोगों को और कुछ उलमा को संदेश देना चाहत हैं कि संसद में तीन साल जेल भेजे जाने का जो बिल पारित होने जा रहा है उसका यह मतलब नहीं कि जो पत्नी को तीन तलाक बोलेगा उसे जेल भेज दिया जाएगा। इसका असल मतलब यह भी है कि जब 22 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक बताकर इसे बैन कर दिया है, और अगर 22 अक्तूबर के बाद भी कोई व्यक्ति एक बार में तीन तलाक बोलता है तो यह माना जाएगा कि उसने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है। इसे ऐसे समझा जा सकता कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने पर तीन साल के लिए जेल भेजा जाएगा। इसकेे बाद पति-पत्नी का वही रिश्ता बाकी रहेगा जो जेल जाने से पहले था। क्योंकि तीन तलाक बोलने पर तीन तलाक मान्य नहीं रहा।
शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें
https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/