दलित आंदोलन: उपद्रव में 15 सिपाहियों के खिलाफ बैठी जांच
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भारत बंद के दौरान मेरठ शहर में हुए उपद्रव को लेकर कई पुलिसकर्मियों की भूमिका संदेह के घेरे में है। एसएसपी ने 15 सिपाहियों के खिलाफ जांच बैठा दी है। उपद्रव और आगजनी के दौरान ये सिपाही मौके से भाग खड़े हुए थे, जिसके कारण सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
दो अप्रैल को दलित संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों, प्रधानों, पार्षद और दलित समाज से जुड़े बवालियों ने सुबह साढ़े नौ बजे कंकरखेड़ा थाने की शोभापुर पुलिस चौकी में दरोगा अजय देशवाल और सिपाही योगेंद्र को बंद कर तोड़फोड़ कर आग लगा दी थी। हाइवे पर भी पुलिस की दो फैंटम बाइक फूंक दी गई थीं। कचहरी स्थित आंबेडकर चौक पर इंस्पेक्टर नौचंदी धीरज शुक्ला पर हमला कर सरकारी जीप में आग लगा दी गई थी।
मौके से भाग गए थे सिपाही
जांच में सामने आया कि उपद्रव के दौरान शोभापुर चौकी पर तैनात पांच सिपाही दरोगा को छोड़कर पास के एक इंस्टीट्यूट में घुस गए थे। उसके बाद एक सीओ पथराव में घायल हुए तो मौके से फैंटम सिपाही भी भाग निकले थे। घायल सीओ अकेले जूझते रहे। कचहरी के आंबेडकर चौक पर भी नौचंदी थाने के तीन सिपाही गायब हो गए थे। उपद्रवियों के हमले में एसपी सिटी, एसपी क्राइम, दो सीओ समेत 40 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
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अफसरों के सामने बताया पिटना
कुछ सिपाहियों ने पूछताछ में उपद्रव में घायल होना तो कुछ सिपाहियों ने कहा कि वह तो लाठी लेकर भीड़ को दौड़ा रहे थे।
सुरक्षा में रखें भरोसे के सिपाही
उच्चाधिकारियों ने उपद्रव के बाद सभी एएसपी, सीओ और थाना प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि भरोसेमंद सिपाहियों को ही सुरक्षा के लिए साथ रखें। लापरवाही सिपाहियों को हमराह न बनाएं।
रिपोर्ट आने पर कार्रवाई होगी
उपद्रव में कुछ पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर जांच बैठाई गई है। संबंधित थानेदारों व सीओ से रिपोर्ट मिलने के बाद आरोपी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होगी। -मंजिल सैनी, एसएसपी
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