फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   taxi scam report

टैक्सी घोटाले में सभी जिलों से रिपोर्ट तलब

Fri, 10 Mar 2017 02:07 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 10 Mar 2017 02:07 AM IST
विज्ञापन
taxi scam report
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
 स्वास्थ्य विभाग के टैक्सी घोटाले में नेशनल हेल्थ मिशन के निदेशक ने कोर्ट के आदेश पर यूपी के सभी जिलों के डीएम से जांच रिपोर्ट मांगी है। इस मामले में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई थी।
विज्ञापन

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) में मोबाइल टीमों को मुहैया कराई गई टैक्सियों के नाम पर भारी धांधली की गई थी। फील्ड में कहने को चौपहिया वाहन चल रहे थे। लेकिन रिकॉर्ड में जिस वाहन का नंबर दर्ज था, वह जांच में स्कूटर या फिर हैवी वाहन का था। बिना टेंडर प्रक्रिया के ही ट्रांसपोर्ट एजेंसी से सेटिंग की गई और बिना फील्ड में गाड़ियां लगाए ही भुगतान होता रहा। मेरठ, गाजियाबाद, बिजनौर, बुलंदशहर जैसे तमाम जिलों में इसी तरह से खेल हुआ। बीते साल कुछ जिलों में जांच के दौरान इसका खुलासा हुआ। लेकिन स्वास्थ्य विभाग सारे मामले पर चुप्पी साध गया था। अब हाईकोर्ट में मामला पहुंचा, तो सभी जिलों में जांच बैठा दी गई है। इनमें कुछ जिलों में जिलाधिकारी ने जांच शुरू करा दी है, तो कुछ में जांच की प्रक्रिया पाइप लाइन में है।
विज्ञापन


एक और बड़े घोटाले की आहट
स्वास्थ्य विभाग में एक और बड़े घोटाले से पर्दा उठने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। क्योंकि आरबीएसके में टैक्सी लगाने में तमाम जिलों में बड़ा घोटाला हुआ है। मेरठ में भी दो टैक्सियों की जांच के दौरान बीते साल गड़बड़ी पकड़ी गई थी। साथ ही टैक्सी लगाने में स्वास्थ्य विभाग ने भारी खेल किया। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बड़ी संख्या में ऐसे वाहनों को लगाया गया, जिनके पास टैक्सी का परमिट ही नहीं था। उल्टे टैक्सी लगाने से पहले टेंडर जारी नहीं किया गया बल्कि बाजार रेट पर ही टैक्सी को हायर किया गया। उसके लिए कोटेशन तक नहीं ली गई थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


टैक्सी बनीं सुख सुविधा का जरिया  
स्कूली बच्चों के नियमित टीकाकरण से लेकर उनके बेहतर स्वास्थ्य की देखभाल के लिए लगाई गईं तमाम गाड़ियां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारियों और अन्य स्टाफ की सुख सुविधाओं का जरिया बन गई है। कागजों में जितनी गाड़ियां लगाई गई हैं, वो उपलब्ध ही नहीं हैं। बस उन्हें भुगतान हो रहा है। साथ ही जो टैक्सी उपलब्ध हैं, उनसे घरेलू कामकाज निपटाए जा रहे हैं।

प्रदेश में कई सौ करोड़ का घोटाला
टैक्सी घोटाला एनआरएचएम घोटाले के बाद सबसे बड़ा घोटाला माना जा रहा है। क्योंकि बीते साल कुछ जिलों में की गई जांच में 70 फीसदी टैक्सियों को रखने में धांधली हुई थी। कुछ गाड़ियां हवा में चल रही थीं। जब रिकॉर्ड देखा गया तो पता चला कि रिकॉर्ड में दर्ज टैक्सी नंबर किसी बाइक का है।


याचिका ने बढ़ाई हलचल
टैक्सी घोटाले को लेकर बीते साल हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई थी। जिसमें कुछ जिलों की जांच को आधार बनाकर कहा गया कि पूरे प्रदेश में आरबीएसके में रखी गई गाड़ियों में भारी अनियमितता हुई है। कोर्ट ने पीआईएल को स्वीकार करते हुए शासन से जवाब तलब कर लिया। जिसके बाद सभी जिलों को जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed