यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय सचिव-परीक्षा प्रभारी को भेजा धमकी भरा पत्र, लिखा मर्डर निश्चित
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‘आप में से किसी का मर्डर निश्चित है। चाहे कैसा भी इंतजाम कर लें, ये लाल स्याही इसी रक्तपात का स्पष्ट संकेत है। आगरा में तो जेल काटकर बच गए, किंतु इस बार किसी की भी मेरठ में नरबलि निश्चित है। सिर्फ सात फरवरी 2019 की प्रतीक्षा में। यह पत्र किसी भी जिले से हो सकता है, मथुरा से ही मत समझना।’यह भाषा यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय भेजे गए धमकी भरे पत्र की है। इसमें क्षेत्रीय सचिव राणा सहस्त्रांशु सिंह, परीक्षा प्रभारी भारत सिंह चौहान और अन्य को धमकी दी गई है। भेजने वाले का पता मथुरा का लिखा हुआ है। आठ जनवरी को डाक के जरिये यह भेजा गया है, जो मंगलवार को यूपी बोर्ड कार्यालय में प्राप्त हुआ है।
इस पत्र पर डाक विभाग आगरा कैंट की मुहर लगी है। यह लाल रंग के बॉल पेन से लिखा हुआ है। पत्र में यह भी लिखा है कि तुम्हें ठिकाने लगाने के लिए 50-60 हजार रुपये में काम हो जाएगा। एक अधिकारी के लिए लिखा है कि एक बार 16 नवंबर 2010 को आगरा में तुझे ठिकाने लगाने गया था, तब बच गया था, इस बार प्राण नहीं बच पाएंगे। एक बार वित्तविहीन विद्यालयों की ओर से नसीहत देना जरूरी है। सात फरवरी के बाद किसी भी तिथि में शो को तैयार रहें।
रद्द किए गए प्राइवेट फार्मों पर है गुस्सा
पत्र में लिखा है कि सन् 2009 तक बोर्ड द्वारा मैनुअल आवेदन हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के लिए मांगे गए। 2009 के बाद इन्हें ओएमआर शीट पर निर्धारित किया गया। 2014 के बाद पुन: इसे ऑनलाइन किया गया। इस दौरान क्षेत्रीय अधिकारी और पटल सहायक द्वारा शोषण किया गया। 2014 के बाद 4ए और 4बी कैटेगिरी के अंतर्गत आवेदन हुआ, लेकिन बाबुओं व ओएस द्वारा इस बार 4बी श्रेणी पर आपत्ति कर शोषण हुआ। इसमें सबसे ज्यादा मथुरा, आगरा, हाथरस, अलीगढ़, एटा व मैनपुरी के विद्यालयों का परेशान किया गया। परीक्षार्थियों के पक्ष में आवेदन भी लगाए, मगर सभी को अपर्याप्त मानकर रद्द कर दिया गया। यह अन्याय स्वीकार नहीं किया जाएगा।
‘परीक्षार्थियों को आवेदन आवंटित नहीं हुए, तो होगा तांडव’
पत्र में लिखा है कि नामावली के साथ अगर बाकी बचे हुए परीक्षार्थियों को अनुक्रमांक आवंटित नहीं हुए तो इस बार ऐसा तांडव होगा कि बोर्ड मुख्यालय और सभी क्षेत्रीय कार्यालयों के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ होगा।
लालकुर्ती थाने में दी गई तहरीर
क्षेत्रीय सचिव ने बताया कि इस संबंध में लालकुर्ती थाने में यह पत्र और तहरीर दी गई है, ताकि इसकी जांच हो सके और पता चल सके कि यह पत्र किसने और क्यों लिखा है।
शिक्षा माफियाओं का लग रहा पत्र
पत्र से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि यह उन शिक्षा माफिया की तरफ से है, जो फर्जी तरीके से विद्यार्थियों के फार्म भरवाते हैं। पिछली बार ऐसे व्यक्तिगत फार्म निरस्त किए गए थे, इस बार ऐसे संस्थागत फार्म निरस्त किए हैं। इसी खुन्नस में पत्र लिखा गया लगता है। - राणा सहस्त्रांशु सिंह सुमन, क्षेत्रीय सचिव
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