{"_id":"7dc720735668e2c5f8d983c59dedcd58","slug":"meerut-murder-news-hindi-news-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"मौत का चक्र भेद नहीं पाया अंशुल ","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
मौत का चक्र भेद नहीं पाया अंशुल
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Tue, 12 Jan 2016 02:05 AM IST
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जिस तरह की चौंकाने वाली जानकारियां सामने आ रही हैं, उससे माना जा रहा है कि व्यापारी अंशुल की हत्या पूर्व नियोजित थी। पूरी प्लानिंग के साथ हत्या को अंजाम दिया गया। घात लगाकर खड़े बदमाशों को अंशुल पहचान गया था। उसने वहां से बच निकलने की पूरी कोशिश की, लेकिन वह मौत के चक्र को भेद नहीं पाया। यह अभी तक बड़ा सवाल बना है कि बदमाशों ने पहले लूट की थी या हत्या।
सुनसान और सेफ इलाका
घी, तेल और चीनी के थोक व्यवसायी अंशुल अग्रवाल की बदमाश काफी दिनों से रेकी कर रहे थे। बदमाश जानते थे कि अंशुल अमूमन प्रत्येक रविवार को किला परीक्षितगढ़ से किठौर शाहजहांपुर उगाही करने जाता है। यह भी नोट किया गया कि अंशुल परीक्षितगढ़ से कितने बजे चलता है। किठौर और शाहजहांपुर में कहां-कहां कितने देर रुकने के बाद वहां से वापस परीक्षितगढ़ के लिए लौटता है। बदमाशों ने अपना टारगेट फिक्स करने के लिए किठौर-परीक्षितगढ़ मार्ग स्थित ऐंची पुल का मोड़ चुना। यह सबसे सुनसान और बदमाशों के लिए सेफ प्वाइंट माना जाता है। जब अंशुल वहां कार से पहुंचा तो बदमाशों पर नजर पड़ते ही वह उन्हें पहचान गया।
यमदूत बनकर आया भैंसा
बदमाशों को देखकर जब अंशुल ने किठौर के लिए बैक गियर लिया तो बदमाशों ने उसकी तरफ कार दौड़ा दी। बदकिस्मती यह रही कि अंशुल की कार जब कस्बे में भारत गैस गोदाम के पास पहुंची तो वहां अचानक एक भैंसा बुग्गी मुड़ने के कारण अंशुल को अपनी कार की स्पीड कम करनी पड़ी। यही वो समय था, जब बदमाशों ने ओवरटेक करते हुए अपनी कार अंशुल की कार के आगे अड़ाकर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों के अनुसार यदि अंशुल की कार के आगे भैंसा बुग्गी न आती तो थोड़ी ही दूरी पर अंशुल आबादी क्षेत्र में पहुंच जाता। संभवत: उसकी जान बच जाती।
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ऐसी पुलिस से भगवान बचाए
जिस जगह अंशुल को गोली मारी गई, वहां पास ही विवाह मंडप भी है। जब गोलियां चलीं तो मंडप से आसिफ नाम का युवक निकलकर अंशुल की मदद के लिए दौड़ा। उस समय तक अंशुल की सांसें चल रही थीं। अन्य लोगों की सहायता से आसिफ अंशुल को लहूलुहान हालत में ही कार से सबसे पहले थाने लेकर पहुंचा। उस समय अंशुल की जान के लिए हर पल कीमती था। लेकिन थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों ने अंशुल को तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाए घटना को लेकर कैसे, क्यों और कहां जैसे बेकार के सवालों में आधा घंटा खराब कर दिया। बाद में एक सिपाही अंशुल के साथ अस्पताल पहुंचा। लेकिन तब तक वह दम तोड़ चुका था।
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सुनसान और सेफ इलाका
घी, तेल और चीनी के थोक व्यवसायी अंशुल अग्रवाल की बदमाश काफी दिनों से रेकी कर रहे थे। बदमाश जानते थे कि अंशुल अमूमन प्रत्येक रविवार को किला परीक्षितगढ़ से किठौर शाहजहांपुर उगाही करने जाता है। यह भी नोट किया गया कि अंशुल परीक्षितगढ़ से कितने बजे चलता है। किठौर और शाहजहांपुर में कहां-कहां कितने देर रुकने के बाद वहां से वापस परीक्षितगढ़ के लिए लौटता है। बदमाशों ने अपना टारगेट फिक्स करने के लिए किठौर-परीक्षितगढ़ मार्ग स्थित ऐंची पुल का मोड़ चुना। यह सबसे सुनसान और बदमाशों के लिए सेफ प्वाइंट माना जाता है। जब अंशुल वहां कार से पहुंचा तो बदमाशों पर नजर पड़ते ही वह उन्हें पहचान गया।
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यमदूत बनकर आया भैंसा
बदमाशों को देखकर जब अंशुल ने किठौर के लिए बैक गियर लिया तो बदमाशों ने उसकी तरफ कार दौड़ा दी। बदकिस्मती यह रही कि अंशुल की कार जब कस्बे में भारत गैस गोदाम के पास पहुंची तो वहां अचानक एक भैंसा बुग्गी मुड़ने के कारण अंशुल को अपनी कार की स्पीड कम करनी पड़ी। यही वो समय था, जब बदमाशों ने ओवरटेक करते हुए अपनी कार अंशुल की कार के आगे अड़ाकर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों के अनुसार यदि अंशुल की कार के आगे भैंसा बुग्गी न आती तो थोड़ी ही दूरी पर अंशुल आबादी क्षेत्र में पहुंच जाता। संभवत: उसकी जान बच जाती।
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ऐसी पुलिस से भगवान बचाए
जिस जगह अंशुल को गोली मारी गई, वहां पास ही विवाह मंडप भी है। जब गोलियां चलीं तो मंडप से आसिफ नाम का युवक निकलकर अंशुल की मदद के लिए दौड़ा। उस समय तक अंशुल की सांसें चल रही थीं। अन्य लोगों की सहायता से आसिफ अंशुल को लहूलुहान हालत में ही कार से सबसे पहले थाने लेकर पहुंचा। उस समय अंशुल की जान के लिए हर पल कीमती था। लेकिन थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों ने अंशुल को तुरंत अस्पताल ले जाने के बजाए घटना को लेकर कैसे, क्यों और कहां जैसे बेकार के सवालों में आधा घंटा खराब कर दिया। बाद में एक सिपाही अंशुल के साथ अस्पताल पहुंचा। लेकिन तब तक वह दम तोड़ चुका था।