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फंसाने की खातिर मार दिए दो बेकसूर
अमर उजाला ब्यूरों
Updated Wed, 13 Jul 2016 01:46 AM IST
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पुलिस लाइन में पकड़े गये आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
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20 दिन में दो अलग-अलग जगहों पर दो युवकों की हत्या का मंगलवार को सनसनीखेज खुलासा पुलिस ने किया। आरोपियों ने इन दोनों बेकसूर युवकों की हत्या सिर्फ एक पीड़ित परिवार को फंसाने के लिये की। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर दोनों हत्याओं का खुलासा किया। आरोपियों ने भी अपना जुर्म कबूल किया।
एसपी देहात डॉ. प्रवीन रंजन ने मुकेश और जॉनी की हत्या का पुलिस लाइन में खुलासा कर अकरम और रहीसुद्दीन निवासी पबला को मीडिया से रूबरू कराया। उन्हाेंने बताया कि इंचौली थानाक्षेत्र के पबला गांव निवासी असलम की बेटी निशा डेढ़ साल पहले पड़ोसी युवक सलमान पुत्र शौकीन के साथ फरार हो गई थी। इसी मामले मेें सलमान का मर्डर हुआ और उसका शव हाफिजपुर, हापुड़ में मिला। एक महीने बाद शौकीन ने असलम व उसके भाई अकरम पुत्र फैयाज और असलम के दामाद परवेज निवासी सावई हाफिजपुर हापुड़ को नामजद किया। जिन्हें हापुड़ पुलिस ने जेल भेज दिया।
22 मार्च 2016 को तीनों आरोपी जेल से जमानत पर छूट गए। आरोपी अकरम ने शौकीन से समझौता करने की बात कही, जिस पर उन्होंने इनकार कर दिया। आरोपी ने अपने पड़ोसी रहीसुद्दीन को 20 हजार रुपये देकर कहा कि शौकीन व उसके परिवार को हत्या के मामले में फंसाना है। जिसके बाद रहीसुद्दीन ने भूरा उर्फ शेर निवासी मवाना और उस्मान निवासी संभल के साथ मिलकर बेकसूर दो लोगों की हत्या करने का प्लान बनाया।
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मुकेश का मर्डर एक अप्रैल को
एक अप्रैल 2016 को मुकेश पुत्र राजकुमार निवासी रसूलपुर औरंगाबाद भावनपुर का मर्डर हुआ था। मुकेश की हत्या क्यों और किसने की, इसकी जांच में पुलिस फेल हो गई। मुकेश रात में मजदूरी करके साइकिल से जा रहा था, तभी रहीसुद्दीन, भूरा और उस्मान ने उसे दबोच लिया और उसकी गला घाेंटकर हत्या कर दी। हत्या के बाद रहीसुद्दीन ने मुकेश की जेब में शौकीन के भतीजे वाहिद का मोबाइल नंबर लिखकर पर्ची डाल दी। ताकि मुकेश की हत्या का आरोप वाहिद पर लग जाए।
जॉनी का 22 अप्रैल को मर्डर
22 अप्रैल 2016 को जॉनी पुत्र नरेशपाल निवासी जलालपुर इंचौली का मर्डर हुआ। जॉनी 22 अप्रैल की रात एक फैक्ट्री से ड्यूटी करके सैनी गांव से बाइक से लौट रहा था। सैनी-जलालपुर मार्ग पर जॉनी की मुकेश की तरह ही गला घोंटकर हत्या की गई। जॉनी और उसके परिवार की किसी से रंजिश नहीं थी। जॉनी की हत्या के बाद रहीसुद्दीन ने उसकी जेब में भी एक पर्ची डाल दी, जिसमें शौकीन के बेटे का मोबाइल नंबर था।
सर्विलांस से पहुंचे आरोपियों तक
पुलिस का दावा है कि दोनों घटनास्थल पर रहीसुद्दीन के मोबाइल की लोकेशन मिली। मुकेश और जॉनी के परिजनों से बातचीत के बाद शौकीन के परिजनों से मामले की जानकारी ली। अकरम लगातार रहीसुद्दीन से फोन पर बातचीत करता था। रहीसुद्दीन दोनों वारदातों को अंजाम देकर कोलकाता भाग गया। उसके बाद भी अकरम और रहीसुद्दीन की बात जारी रही। उसके जरिये ही दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी हुई।
क्यों मारा हमारा बेटा
मुकेश और जॉनी की हत्या के खुलासे की जानकारी लगते ही जॉनी के परिजन पुलिस लाइन पहुंच गए। उन्होंने बताया कि जॉनी पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहा था। आरोपियों से पूछा कि बताओ तुमने हमारे बेटे को क्यों मारा। जिस पर आरोपी बोले कि हमारी तुमसे या तुम्हारे बेटे से कोई दुश्मनी नहीं थी। शौकीन से बदला लेने की खातिर तुम्हारे बेकसूर बेटे को हमने मार दिया। यह बात पीड़ित परिवार को हजम नहीं हो रही।
इन जल्लादों को तो फांसी दो
मुकेश और जॉनी के परिजनों ने पुलिस लाइन में नारे लगाए कि इन जल्लादों को फांसी दो। इन्होंने बेकसूर दो युवकों की बेवजह हत्या कर दी। इनके सामने जो आता उसी को मार देते। आरोपियों को अपनी करनी पर कोई पछतावा भी नहीं है। कुछ भी पूछने पर आरोपी बेधड़क बोल रहे थे।
पर्ची डालकर देते थे मैसेज
दोनों आरोपियों ने बताया कि हत्या के बाद जेब में पर्ची डालकर पुलिस को मैसेज देते थे कि शौकीन के परिजनों ने हत्या की है। पुलिस बार-बार शौकीन के घर जाती और पूछताछ करके लौट आती। शौकीन के परिजन भी परेशान थे। उन्होंने अकरम पर अंदेशा जताया, जिसके बाद पुलिस ने उस पर निगरानी रखनी शुरू की।
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एसपी देहात डॉ. प्रवीन रंजन ने मुकेश और जॉनी की हत्या का पुलिस लाइन में खुलासा कर अकरम और रहीसुद्दीन निवासी पबला को मीडिया से रूबरू कराया। उन्हाेंने बताया कि इंचौली थानाक्षेत्र के पबला गांव निवासी असलम की बेटी निशा डेढ़ साल पहले पड़ोसी युवक सलमान पुत्र शौकीन के साथ फरार हो गई थी। इसी मामले मेें सलमान का मर्डर हुआ और उसका शव हाफिजपुर, हापुड़ में मिला। एक महीने बाद शौकीन ने असलम व उसके भाई अकरम पुत्र फैयाज और असलम के दामाद परवेज निवासी सावई हाफिजपुर हापुड़ को नामजद किया। जिन्हें हापुड़ पुलिस ने जेल भेज दिया।
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22 मार्च 2016 को तीनों आरोपी जेल से जमानत पर छूट गए। आरोपी अकरम ने शौकीन से समझौता करने की बात कही, जिस पर उन्होंने इनकार कर दिया। आरोपी ने अपने पड़ोसी रहीसुद्दीन को 20 हजार रुपये देकर कहा कि शौकीन व उसके परिवार को हत्या के मामले में फंसाना है। जिसके बाद रहीसुद्दीन ने भूरा उर्फ शेर निवासी मवाना और उस्मान निवासी संभल के साथ मिलकर बेकसूर दो लोगों की हत्या करने का प्लान बनाया।
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मुकेश का मर्डर एक अप्रैल को
एक अप्रैल 2016 को मुकेश पुत्र राजकुमार निवासी रसूलपुर औरंगाबाद भावनपुर का मर्डर हुआ था। मुकेश की हत्या क्यों और किसने की, इसकी जांच में पुलिस फेल हो गई। मुकेश रात में मजदूरी करके साइकिल से जा रहा था, तभी रहीसुद्दीन, भूरा और उस्मान ने उसे दबोच लिया और उसकी गला घाेंटकर हत्या कर दी। हत्या के बाद रहीसुद्दीन ने मुकेश की जेब में शौकीन के भतीजे वाहिद का मोबाइल नंबर लिखकर पर्ची डाल दी। ताकि मुकेश की हत्या का आरोप वाहिद पर लग जाए।
जॉनी का 22 अप्रैल को मर्डर
22 अप्रैल 2016 को जॉनी पुत्र नरेशपाल निवासी जलालपुर इंचौली का मर्डर हुआ। जॉनी 22 अप्रैल की रात एक फैक्ट्री से ड्यूटी करके सैनी गांव से बाइक से लौट रहा था। सैनी-जलालपुर मार्ग पर जॉनी की मुकेश की तरह ही गला घोंटकर हत्या की गई। जॉनी और उसके परिवार की किसी से रंजिश नहीं थी। जॉनी की हत्या के बाद रहीसुद्दीन ने उसकी जेब में भी एक पर्ची डाल दी, जिसमें शौकीन के बेटे का मोबाइल नंबर था।
सर्विलांस से पहुंचे आरोपियों तक
पुलिस का दावा है कि दोनों घटनास्थल पर रहीसुद्दीन के मोबाइल की लोकेशन मिली। मुकेश और जॉनी के परिजनों से बातचीत के बाद शौकीन के परिजनों से मामले की जानकारी ली। अकरम लगातार रहीसुद्दीन से फोन पर बातचीत करता था। रहीसुद्दीन दोनों वारदातों को अंजाम देकर कोलकाता भाग गया। उसके बाद भी अकरम और रहीसुद्दीन की बात जारी रही। उसके जरिये ही दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी हुई।
क्यों मारा हमारा बेटा
मुकेश और जॉनी की हत्या के खुलासे की जानकारी लगते ही जॉनी के परिजन पुलिस लाइन पहुंच गए। उन्होंने बताया कि जॉनी पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहा था। आरोपियों से पूछा कि बताओ तुमने हमारे बेटे को क्यों मारा। जिस पर आरोपी बोले कि हमारी तुमसे या तुम्हारे बेटे से कोई दुश्मनी नहीं थी। शौकीन से बदला लेने की खातिर तुम्हारे बेकसूर बेटे को हमने मार दिया। यह बात पीड़ित परिवार को हजम नहीं हो रही।
इन जल्लादों को तो फांसी दो
मुकेश और जॉनी के परिजनों ने पुलिस लाइन में नारे लगाए कि इन जल्लादों को फांसी दो। इन्होंने बेकसूर दो युवकों की बेवजह हत्या कर दी। इनके सामने जो आता उसी को मार देते। आरोपियों को अपनी करनी पर कोई पछतावा भी नहीं है। कुछ भी पूछने पर आरोपी बेधड़क बोल रहे थे।
पर्ची डालकर देते थे मैसेज
दोनों आरोपियों ने बताया कि हत्या के बाद जेब में पर्ची डालकर पुलिस को मैसेज देते थे कि शौकीन के परिजनों ने हत्या की है। पुलिस बार-बार शौकीन के घर जाती और पूछताछ करके लौट आती। शौकीन के परिजन भी परेशान थे। उन्होंने अकरम पर अंदेशा जताया, जिसके बाद पुलिस ने उस पर निगरानी रखनी शुरू की।