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सल्फास से हुई थी डॉ. शालिनी की मौत
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Sat, 03 Oct 2015 01:42 AM IST
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डॉ. शालिनी आर्य की मौत से आगरा फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट ने पर्दा उठा दिया है। शालिनी की मौत सल्फास खाने से हुई थी। विसरा और गैस्ट्रिक वॉश के सैंपल का परीक्षण करने के बाद एफएसएल ने अपनी रिपोर्ट मेरठ पुलिस को भेज दी है। एफएसएल रिपोर्ट ने जहां हत्यारोपी डॉ. विशाल आर्य और उसकी मां वीना आर्य के उस दावे की पोल खोद दी, जिसमें उन्होंने डॉ. शालिनी की तबियत बिगड़ने की वजह फूड प्वाइजनिंग को बताया था।
गौरतलब है कि थापरनगर निवासी डॉ. शालिनी आर्य को उनके पति डा. विशाल आर्य ने सुशीला जसवंत राय अस्पताल में भर्ती कराया था। वेंटिलेटर पर रखी गई डॉ. शालिनी की एक सितंबर को मौत हो गई थी। डॉ. शालिनी के पिता राजेश कोड़ा ने अपने दामाद डॉ. विशाल आर्य और उसकी मां वीना आर्य पर हत्या का आरोप लगाते हुए सदर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। हाईप्रोफाइल मामले में पुलिस ने डॉ. शालिनी का पोस्टमार्टम कराकर विसरा संरक्षित कर लिया था और परीक्षण के लिए आगरा फॉरेंसिक लैब भेज दिया था। इसके कुछ दिन बाद पुलिस ने अस्पताल से उपलब्ध कराया गया गैस्ट्रिक वॉश का सैंपल भी जांच के लिए भेजा था।
आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला में वैज्ञानिकों ने पाया कि डॉ. शालिनी की मौत एल्यूमीनियम फास्फाइड (सल्फास) नाम के जहर से हुई थी। विसरा में सल्फास के तत्व मिले। गैस्ट्रिक वॉश (उल्टियों में निकला पानी) के सैंपल के परीक्षण में भी सल्फास पाया गया। वहीं हत्यारोपी डॉ. विशाल आर्य ने जब डॉ. शालिनी आर्य को अस्पताल में भर्ती कराया था, तो बताया था कि फूड प्वाइजनिंग के कारण शालिनी की तबियत खराब हुई है।
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हत्यारोपी वीना की तलाश भी बंद
पहले विशाल आर्य को भागने की छूट देने वाली सदर थाना पुलिस ने वीना आर्य को तलाशने की कोशिशें भी बंद कर दी हैं। एक महीने बाद भी वीना को पुलिस पकड़ नहीं सकी है। बता दें कि पुलिस ने डॉ. विशाल को भी भागने का मौका दिया था। बाद में कुर्की नोटिस चस्पा होने के बाद नाटकीय ढंग से कचहरी के पास विशाल को गिरफ्तार किया था।
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गौरतलब है कि थापरनगर निवासी डॉ. शालिनी आर्य को उनके पति डा. विशाल आर्य ने सुशीला जसवंत राय अस्पताल में भर्ती कराया था। वेंटिलेटर पर रखी गई डॉ. शालिनी की एक सितंबर को मौत हो गई थी। डॉ. शालिनी के पिता राजेश कोड़ा ने अपने दामाद डॉ. विशाल आर्य और उसकी मां वीना आर्य पर हत्या का आरोप लगाते हुए सदर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। हाईप्रोफाइल मामले में पुलिस ने डॉ. शालिनी का पोस्टमार्टम कराकर विसरा संरक्षित कर लिया था और परीक्षण के लिए आगरा फॉरेंसिक लैब भेज दिया था। इसके कुछ दिन बाद पुलिस ने अस्पताल से उपलब्ध कराया गया गैस्ट्रिक वॉश का सैंपल भी जांच के लिए भेजा था।
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आगरा विधि विज्ञान प्रयोगशाला में वैज्ञानिकों ने पाया कि डॉ. शालिनी की मौत एल्यूमीनियम फास्फाइड (सल्फास) नाम के जहर से हुई थी। विसरा में सल्फास के तत्व मिले। गैस्ट्रिक वॉश (उल्टियों में निकला पानी) के सैंपल के परीक्षण में भी सल्फास पाया गया। वहीं हत्यारोपी डॉ. विशाल आर्य ने जब डॉ. शालिनी आर्य को अस्पताल में भर्ती कराया था, तो बताया था कि फूड प्वाइजनिंग के कारण शालिनी की तबियत खराब हुई है।
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हत्यारोपी वीना की तलाश भी बंद
पहले विशाल आर्य को भागने की छूट देने वाली सदर थाना पुलिस ने वीना आर्य को तलाशने की कोशिशें भी बंद कर दी हैं। एक महीने बाद भी वीना को पुलिस पकड़ नहीं सकी है। बता दें कि पुलिस ने डॉ. विशाल को भी भागने का मौका दिया था। बाद में कुर्की नोटिस चस्पा होने के बाद नाटकीय ढंग से कचहरी के पास विशाल को गिरफ्तार किया था।