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प्रदेश में खुलेंगे गंगेटिक डॉल्फिन रिसोर्स सेंटर
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jun 2016 01:19 AM IST
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डॉल्फिन
- फोटो : अमर उजाला
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इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए गंगेटिक डॉल्फिन रिसोर्स सेंटर खोले जाएंगे। गंगा किनारे स्थित हस्तिनापुर समेत वाराणसी और कानपुर में भी ऐसे केंद्रों की स्थापना की जाएगी। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय गंगा स्वच्छता मिशन के तहत सेंटर फॉर एन्वॉयरमेंट एजूकेशन की पिछले दिनों लखनऊ में हुई राष्ट्रीय स्तर की बैठक में इसकी घोषणा हुई। इस बैठक में बिहार और उत्तर प्रदेश के कोऑर्डिनेटर शामिल थे।
बैठक में मेरठ से शामिल हुए कोऑर्डिनेटर संजीव ने बताया कि रिसोर्स सेंटर में डॉल्फिन से जुड़ी तस्वीरें, इतिहास सहित विस्तृत जानकारियां मिलेंगी। पांच अक्टूबर को डॉल्फिन दिवस पर हस्तिनापुर में रिसोर्स सेंटर की शुरुआत होगी। उन्होंने बताया कि रिसोर्स सेंटर के लिए हस्तिनापुर की स्थिति मुफीद है। यहां डॉल्फिन, कछुए और घड़ियाल अच्छी संख्या में हैं।
स्कूलों में गठित होंगे डॉल्फिन क्लब
स्कूलों में डॉल्फिन क्लबों का भी गठन किया जाएगा। खासकर ऐसे स्कूल चुने जाएंगे, जो गंगा किनारे हैं। छात्रों को डॉल्फिन संरक्षण के तरीके बताए जाएंगे। डॉल्फिन क्लबों में छात्रों के बीच पेंटिंग, ड्राइंग, डिबेट, लिटरेचर और डिस्प्ले बोर्ड कांटेस्ट कराए जाएंगे। छात्रों को डॉल्फिन जोन का भ्रमण कराया जाएगा, ताकि बच्चे वहां इनकी गतिविधियां देख सकें। सीबीएसई ने सभी अपने स्कूलों को डॉल्फिन से जुड़ी गतिविधियां कराने के निर्देश दिए हैं। बोर्ड की वेबसाइट पर यह सर्कुलर अपलोड भी कर दिया गया है।
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हस्तिनापुर का चयन पहले चरण में
डॉल्फिन की संख्या को आधार मानकर उन स्थानों पर डॉल्फिन रिसोर्स सेंटर स्थापित होंगे, जहां इनकी अच्छी तादाद पाई गई है। इसलिए हस्तिनापुर का चयन पहले स्थान पर हुआ है। बैराज से नरौरा तक डॉल्फिन की गणना हुई। हस्तिनापुर सेंचुरी के पांच जिलों में 22 डॉल्फिन मिली हैं। प्रदेश में 3,350 किमी के नदी क्षेत्र में 1263 डॉल्फिन मिलीं। वर्ष 2012 में यह संख्या 671 थी।
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बैठक में मेरठ से शामिल हुए कोऑर्डिनेटर संजीव ने बताया कि रिसोर्स सेंटर में डॉल्फिन से जुड़ी तस्वीरें, इतिहास सहित विस्तृत जानकारियां मिलेंगी। पांच अक्टूबर को डॉल्फिन दिवस पर हस्तिनापुर में रिसोर्स सेंटर की शुरुआत होगी। उन्होंने बताया कि रिसोर्स सेंटर के लिए हस्तिनापुर की स्थिति मुफीद है। यहां डॉल्फिन, कछुए और घड़ियाल अच्छी संख्या में हैं।
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स्कूलों में गठित होंगे डॉल्फिन क्लब
स्कूलों में डॉल्फिन क्लबों का भी गठन किया जाएगा। खासकर ऐसे स्कूल चुने जाएंगे, जो गंगा किनारे हैं। छात्रों को डॉल्फिन संरक्षण के तरीके बताए जाएंगे। डॉल्फिन क्लबों में छात्रों के बीच पेंटिंग, ड्राइंग, डिबेट, लिटरेचर और डिस्प्ले बोर्ड कांटेस्ट कराए जाएंगे। छात्रों को डॉल्फिन जोन का भ्रमण कराया जाएगा, ताकि बच्चे वहां इनकी गतिविधियां देख सकें। सीबीएसई ने सभी अपने स्कूलों को डॉल्फिन से जुड़ी गतिविधियां कराने के निर्देश दिए हैं। बोर्ड की वेबसाइट पर यह सर्कुलर अपलोड भी कर दिया गया है।
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हस्तिनापुर का चयन पहले चरण में
डॉल्फिन की संख्या को आधार मानकर उन स्थानों पर डॉल्फिन रिसोर्स सेंटर स्थापित होंगे, जहां इनकी अच्छी तादाद पाई गई है। इसलिए हस्तिनापुर का चयन पहले स्थान पर हुआ है। बैराज से नरौरा तक डॉल्फिन की गणना हुई। हस्तिनापुर सेंचुरी के पांच जिलों में 22 डॉल्फिन मिली हैं। प्रदेश में 3,350 किमी के नदी क्षेत्र में 1263 डॉल्फिन मिलीं। वर्ष 2012 में यह संख्या 671 थी।