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आरोपपत्र दाखिल होने तक गिरफ्तारी टली

Wed, 03 Aug 2016 02:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
अमर उजाला ब्यूरों Updated Wed, 03 Aug 2016 02:05 AM IST
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aaropatra daakhil
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

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 बंगला नंबर 210 बी के आरआर मॉल ध्वस्तीकरण के मामले में हाईकोर्ट ने कैंट बोर्ड अधिकारियों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। कैंट बोर्ड के सीईओ समेत पांच अधिकारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर प्राथमिकी को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में आरोपपत्र दाखिल होने तक किसी की भी गिरफ्तारी न की जाए। सीईओ राजीव श्रीवास्तव और अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति पीसी त्रिपाठी की खंडपीठ ने सुनवाई की।
हाईकोर्ट ने मेरठ कैंट क्षेत्र में अवैध रूप से बने आरआर मॉल के ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। नौ जुलाई 2016 को सुबह पांच बजकर 20 मिनट पर ध्वस्तीकरण अभियान चलाकर बिल्डिंग को ध्वस्त कर दिया। ध्वस्तीकरण के दौरान बिल्डिंग के अंदर सो रहे दीपक शर्मा, हनी शर्मा, गोविंदा सहित चार की मौत हो गई थी। दीपक शर्मा के परिजनों ने सीईओ राजीव श्रीवास्तव, सहायक अभियंता पीयूष गोयल, अवर अभियंता अवधेश यादव और अरविंद गुप्ता तथा सेनेटरी इंस्पेक्टर योगेश यादव के खिलाफ हत्या का मुकदमा सदर बाजार थाने में दर्ज कराया था।
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याचिका पर अधिवक्ता प्रशांत माथुर ने बहस की। कहा कि अधिकारियों ने हाईकोर्ट के आदेश के तहत 25 मई 2006 को मॉल सील कर दिया था। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई इसके बाद की गई। ध्वस्तीकरण जिला प्रशासन की मौजूदगी में किया गया। इस दौरान पूरी सावधानी बरती गई। कार्रवाई की रिकार्डिंग ड्रोन कैमरे और वीडियो कैमरे से की गई है। जिनकी जान गई वह सील इमारत में चुपचाप घुसे थे। कोर्ट ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल होने तक गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए याचिका निस्तारित कर दी है।
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सीईई को मिल सकती है राहत
कैंट बोर्ड सीईई अनुज सिंह 23 दिन से जेल में बंद हैं। पांच अगस्त को कोर्ट में सुनवाई है। फैसले से अनुज सिंह को राहत मिल सकती है। वहीं दूसरी ओर मामले की मजिस्ट्रियल जांच चल रही है। सभी पक्षों से पूछताछ हो चुकी है। मामले में आरोपी बनाए गए पांच अधिकारियों के बयान अभी नहीं हुए हैं। उम्मीद है जल्द ही अब इनके बयान होंगे। उधर, पुलिस की ओर से केस की जांच इंस्पेक्टर सदर बाजार थाना गजेंद्र पाल सिंह कर रहे हैं।  


31 लाख में बिका मॉल का मलबा
बंगला नंबर 210 बी आरआर मॉल का मलबा जल्द हट जाएगा। कैंट बोर्ड ने मलबा हटाने का टेंडर दे दिया है। 31 लाख 11 हजार 111 रुपये में मलबे का टेंडर हुआ है। बोर्ड के सीईओ राजीव श्रीवास्तव के मुताबिक मलबे की तीन एजेंसियों से सैंपलिंग कराई गई है, जिसकी रिपोर्ट एक महीने में आने की उम्मीद है। एजेंसी में रुड़की आईआईटी की टीम, हरियाणा और दिल्ली से एक-एक एजेंसी है। रिपोर्ट से साफ हो जाएगा कि बिल्डिंग बनाने में इस्तेमाल किया गए मैटीरियल की क्वालिटी कैसी थी। उसके बाद बोर्ड कार्रवाई करेगा। ध्वस्तीकरण में जिस तरह बिल्डिंग उम्मीद से कम समय में गिर गई, उससे लगता है कि मैटीरियल की क्वालिटी खराब थी। कैंट बोर्ड बिल्डर पर भी शिकंजा कसेगा।
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