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फर्जीवाड़े में नामजद शिक्षक गिरफ्तार
Updated Fri, 15 Sep 2017 03:15 AM IST
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मेरठ। मेरठ के सहायक अध्यापक के नाम से फर्जी तरीके से शिक्षक की नौकरी करने के आरोपी को साइबर सेल ने बृहस्पतिवार को गिरफ्तार कर लिया।
साइबर सेल प्रभारी कर्मवीर सिंह के अनुसार ब्रह्मपुरी निवासी जीआईसी में सहायक अध्यापक मनोज कुमार पुत्र सुगन चंद ने ब्रह्मपुरी थाने में केस दर्ज कराया था कि कोई व्यक्ति उनके पैन नंबर से रिटर्न दाखिल कर रहा है। जांच में सामने आया था कि यह व्यक्ति मनोज कुमार के व्यक्तिगत एवं शैक्षिक कागजों से जूनियर हाईस्कूल जंधेड़ी ब्लॉक जानसठ मुजफ्फरनगर में शिक्षक की नौकरी कर रहा है। आरोपी का खतौली और श्रद्धापुरी कंकरखेड़ा का पता भी गलत मिला। जिसके बाद साइबर सेल की टीम ने आरोपी रामअवतार उर्फ मनोज पुत्र राजवीर सिंह निवासी जलालाबाद थाना मुरादनगर जिला गाजियाबाद को गिरफ्तार कर लिया।
लिपिक की ली मदद
आरोपी राम अवतार ने पूछताछ में बताया कि बेरोजगारी और परिवार की समस्या को देखते हुए एक शिक्षक से साठगांठ कर नौकरी प्राप्त की थी। उसके नाम से फर्जी कागजात नहीं बने, तो उसने इस शिक्षक की सलाह पर मनोज कुमार निवासी ब्रह्मपुरी के नाम के एक लिपिक की मदद से कागजात निकलवाए थे। फिर एक अन्य शिक्षक की मदद से 50 हजार रुपये दिए, जिससे विभाग के अधिकारी असली कागजात न मांगें। आरोपी 1999 से बेसिक शिक्षा विभाग में इन्हीं फर्जी कागजों के आधार पर नौकरी कर रहा था। उसकी पहली पोस्टिंग छुर सरूरपुर स्थित विद्यालय में हुई। विभाग द्वारा पैन कार्ड मांगने पर वह मेरठ के मनोज कुमार के पैनकार्ड की कॉपी निकलवाकर रिटर्न दाखिल करता रहा। आरोपी का मेरठ और मुजफ्फरनगर के बीएसए ऑफिस से नियुक्ति का रिकार्ड भी नहीं मिला।
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साइबर सेल प्रभारी कर्मवीर सिंह के अनुसार ब्रह्मपुरी निवासी जीआईसी में सहायक अध्यापक मनोज कुमार पुत्र सुगन चंद ने ब्रह्मपुरी थाने में केस दर्ज कराया था कि कोई व्यक्ति उनके पैन नंबर से रिटर्न दाखिल कर रहा है। जांच में सामने आया था कि यह व्यक्ति मनोज कुमार के व्यक्तिगत एवं शैक्षिक कागजों से जूनियर हाईस्कूल जंधेड़ी ब्लॉक जानसठ मुजफ्फरनगर में शिक्षक की नौकरी कर रहा है। आरोपी का खतौली और श्रद्धापुरी कंकरखेड़ा का पता भी गलत मिला। जिसके बाद साइबर सेल की टीम ने आरोपी रामअवतार उर्फ मनोज पुत्र राजवीर सिंह निवासी जलालाबाद थाना मुरादनगर जिला गाजियाबाद को गिरफ्तार कर लिया।
लिपिक की ली मदद
आरोपी राम अवतार ने पूछताछ में बताया कि बेरोजगारी और परिवार की समस्या को देखते हुए एक शिक्षक से साठगांठ कर नौकरी प्राप्त की थी। उसके नाम से फर्जी कागजात नहीं बने, तो उसने इस शिक्षक की सलाह पर मनोज कुमार निवासी ब्रह्मपुरी के नाम के एक लिपिक की मदद से कागजात निकलवाए थे। फिर एक अन्य शिक्षक की मदद से 50 हजार रुपये दिए, जिससे विभाग के अधिकारी असली कागजात न मांगें। आरोपी 1999 से बेसिक शिक्षा विभाग में इन्हीं फर्जी कागजों के आधार पर नौकरी कर रहा था। उसकी पहली पोस्टिंग छुर सरूरपुर स्थित विद्यालय में हुई। विभाग द्वारा पैन कार्ड मांगने पर वह मेरठ के मनोज कुमार के पैनकार्ड की कॉपी निकलवाकर रिटर्न दाखिल करता रहा। आरोपी का मेरठ और मुजफ्फरनगर के बीएसए ऑफिस से नियुक्ति का रिकार्ड भी नहीं मिला।
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