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एसएसपी को धमकी देने वाला फर्जी मुख्य सचिव गिरफ्तार
Updated Mon, 31 Jul 2017 02:30 AM IST
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मेरठ। एसएसपी और उनके पीआरओ को फोन पर धमकाने वाला पीएमओ का फर्जी मुख्य सचिव रविवार को पुलिस के हत्थे चढ़ गया। एसएसपी के अनुसार आरोपी ने तत्कालीन एसओ गंगानगर को दोबारा चार्ज न देने पर उनसे फोन पर अभद्रता की थी।
एसएसपी मंजिल सैनी दहल के अनुसार 25 जुलाई की दोपहर 3:05 बजे वह मीटिंग में थीं। उनका सरकारी फोन पीआरओ दयाशंकर द्विवेदी के पास था। उस समय कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को प्रधानमंत्री ऑफिस (पीएमओ) नई दिल्ली से मुख्य सचिव अरुण मिश्रा बताते हुए मुझसे बात कराने को कहा। पीआरओ ने कहा कि एसएसपी मैडम मीटिंग में हैं, आप मुझे बता दें। जिस पर अरुण मिश्रा ने भड़कते हुए कहा कि ओमवीर गुप्ता का थानाध्यक्ष गंगानगर से जो क्राइम ब्रांच तबादला किया है उसे तुरंत रुकवा दें, नहीं तो अंजाम ठीक नहीं होगा। उसके बाद फोन काट दिया गया। मीटिंग के बाद मैंने अपने ऑफिस के लैंडलाइन फोन से उस नंबर पर कॉल की तो आरोपी ने धमकी भरे लहजे में कहा कि एसओ ओमवीर गुप्ता को हटाकर ठीक नहीं किया। आपके लिए मुश्किल हो जाएगी। एसएसपी के अनुसार ट्रू कॉलर पर सर्च में इस नंबर के आगे लखनऊ का एक न्यायिक अधिकारी लिखा आया। मामला संदिग्ध पाते हुए इस नंबर की सीडीआर निकालने के निर्देश दिए गए थे।
गंगानगर की निकली आईडी
एसएसपी के अनुसार सीडीआर में इस नंबर की आईडी अरुण मिश्रा निवासी बी-559 डिफेंस कॉलोनी गंगानगर मेरठ के नाम निकली। जिस स्थान से कॉल की गई, सर्विलांस में उसकी लोकेशन भी गंगानगर मेरठ की आयी। जांच में पता चला कि कॉल किसी मुख्य सचिव ने नहीं बल्कि आरोपी अरुण मिश्रा ने गंगानगर से ही फर्जी मुख्य सचिव बनकर की थी। शनिवार को पीआरओ की तरफ से सिविल लाइन थाने में आरोपी के खिलाफ लोकसेवक को धमकाने, पहचान छिपाकर आपराधिक उद्देश्य से छल करने की संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। रविवार को आरोपी को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।
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दरोगा लाइन हाजिर, शासन को लिखा पत्र
एसएसपी के अनुसार इस प्रकरण की जांच में थाना गंगानगर के पूर्व एसओ ओमवीर गुप्ता और थाने में तैनात दरोगा विशंभर दयाल की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। जिसके चलते दरोगा विशंभर दयाल को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया है। इस संबंध में शासन और आला अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। जिसमें दरोगा विशंभर को सिविल पुलिस से हटाकर जीआरपी में ट्रांसफर करने की संस्तुति की गई है। वहीं, ओमवीर गुप्ता को पहले ही थानाध्यक्ष पद से हटाकर क्राइम ब्रांच ट्रांसफर किया गया था। ओमवीर गुप्ता का भी शासन से प्रशासनिक आधार पर मेरठ से गैर जिले में ट्रांसफर करने की संस्तुति कर दी गई है। एसएसपी ने बताया कि दोनों दरोगाओं और अन्य पुलिसकर्मियों के आरोपी अरुण मिश्रा से कनेक्शन की जांच की जा रही है।
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एसएसपी मंजिल सैनी दहल के अनुसार 25 जुलाई की दोपहर 3:05 बजे वह मीटिंग में थीं। उनका सरकारी फोन पीआरओ दयाशंकर द्विवेदी के पास था। उस समय कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को प्रधानमंत्री ऑफिस (पीएमओ) नई दिल्ली से मुख्य सचिव अरुण मिश्रा बताते हुए मुझसे बात कराने को कहा। पीआरओ ने कहा कि एसएसपी मैडम मीटिंग में हैं, आप मुझे बता दें। जिस पर अरुण मिश्रा ने भड़कते हुए कहा कि ओमवीर गुप्ता का थानाध्यक्ष गंगानगर से जो क्राइम ब्रांच तबादला किया है उसे तुरंत रुकवा दें, नहीं तो अंजाम ठीक नहीं होगा। उसके बाद फोन काट दिया गया। मीटिंग के बाद मैंने अपने ऑफिस के लैंडलाइन फोन से उस नंबर पर कॉल की तो आरोपी ने धमकी भरे लहजे में कहा कि एसओ ओमवीर गुप्ता को हटाकर ठीक नहीं किया। आपके लिए मुश्किल हो जाएगी। एसएसपी के अनुसार ट्रू कॉलर पर सर्च में इस नंबर के आगे लखनऊ का एक न्यायिक अधिकारी लिखा आया। मामला संदिग्ध पाते हुए इस नंबर की सीडीआर निकालने के निर्देश दिए गए थे।
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गंगानगर की निकली आईडी
एसएसपी के अनुसार सीडीआर में इस नंबर की आईडी अरुण मिश्रा निवासी बी-559 डिफेंस कॉलोनी गंगानगर मेरठ के नाम निकली। जिस स्थान से कॉल की गई, सर्विलांस में उसकी लोकेशन भी गंगानगर मेरठ की आयी। जांच में पता चला कि कॉल किसी मुख्य सचिव ने नहीं बल्कि आरोपी अरुण मिश्रा ने गंगानगर से ही फर्जी मुख्य सचिव बनकर की थी। शनिवार को पीआरओ की तरफ से सिविल लाइन थाने में आरोपी के खिलाफ लोकसेवक को धमकाने, पहचान छिपाकर आपराधिक उद्देश्य से छल करने की संबंधित धाराओं में रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। रविवार को आरोपी को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।
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दरोगा लाइन हाजिर, शासन को लिखा पत्र
एसएसपी के अनुसार इस प्रकरण की जांच में थाना गंगानगर के पूर्व एसओ ओमवीर गुप्ता और थाने में तैनात दरोगा विशंभर दयाल की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। जिसके चलते दरोगा विशंभर दयाल को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया है। इस संबंध में शासन और आला अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। जिसमें दरोगा विशंभर को सिविल पुलिस से हटाकर जीआरपी में ट्रांसफर करने की संस्तुति की गई है। वहीं, ओमवीर गुप्ता को पहले ही थानाध्यक्ष पद से हटाकर क्राइम ब्रांच ट्रांसफर किया गया था। ओमवीर गुप्ता का भी शासन से प्रशासनिक आधार पर मेरठ से गैर जिले में ट्रांसफर करने की संस्तुति कर दी गई है। एसएसपी ने बताया कि दोनों दरोगाओं और अन्य पुलिसकर्मियों के आरोपी अरुण मिश्रा से कनेक्शन की जांच की जा रही है।