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मंत्री को भी अंधेरे में रख विभाग ने कराया निरीक्षण
Updated Sun, 02 Sep 2018 02:32 AM IST
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मेरठ। देवरिया कांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सूबे के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए थे कि वह बाल गृह व नारी निकेतन आदि पर विशेष नजर रखें। वहां पर किसी भी प्रकार के शोषण व अनियमितता की घटनाएं न होने पाएं। इसी के चलते अधिकारियों द्वारा अपने जनपदों में बाल गृहों व नारी निकेतनों की जांच शुरू कर दी गई थी। लेकिन अधिकारियों के साथ ही मंत्री के निरीक्षण की भी बाल संरक्षण गृह में हुई कुकर्म की घटना ने सारी पोल खोल दी। इससे साफ हो गया कि अधिकारियों ने मंत्री तक को अंधेरे में रखा।
मेरठ में 11 अगस्त को महिला एवं बाल कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी के द्वारा उत्तर रक्षा गृह व नारी निकतेन का निरीक्षण किया गया था। वहां की व्यवस्थाओं को पूरी तरह से दुरुस्त पाते हुए उन्होंने डीपीओ एके गुप्ता की पीठ थपथपाई थी। लेकिन मंत्री के निरीक्षण के 13 दिन बाद ही विभागीय अधिकारियों की पोल खुल गई। सूरजकुंड स्थित बाल गृह में वहीं के कर्मचारी द्वारा एक बालक के साथ कुकर्म की घटना को अंजाम दिया गया। बात यहीं समाप्त नही होती। उक्त पूरे मामले को जिला प्रशासन के साथ विभागीय अधिकारियों द्वारा करीब एक सप्ताह तक दबाये रखा गया तथा मामले की कलई उस समय खुली, जब एक न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा बाल गृह का निरीक्षण किया गया तथा उसके बाद पीड़ित बालक ने उन्हें सारी बात बताई।
इस मामले मेें डीएम अनिल ढींगरा द्वारा भले ही दोषी कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा कायम कराकर उसे जेल भिजवा दिया गया हो और अधीक्षक व डीपीओ के निलंबन को कहा गया हो। लेकिन यह कहना गलत न होगा कि इस मामले में प्रोबेशन विभाग की घोर लापरवाही रही है। उसने मामले को दबाने में कोई कसर नही छोड़ी। बालक के यौन शोषण का यह मामला जुलाई माह का है और विभागीय मंत्री द्वारा अगस्त में विभाग का निरीक्षण किया गया। तब उन्हें सब कुछ चाक चौबंद मिला। सूत्रों के अनुसार विभागीय अधिकारियों को यह पता था कि बाल गृह में बच्चों के साथ गलत काम हो रहा है। लेकिन उनके द्वारा इस मामले को पूरी तरह से दबा दिया गया। जिससे साफ हो गया कि विभागीय अधिकारियों द्वारा मंत्री रीता बहुगुणा को भी गुमराह करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी गयी। अहम बात ये है कि प्रदेश सरकार के इतना सख्त होने के बावजूद भी बाल गृह में इस प्रकार की घटना का होना निश्चित रूप से ही जिला प्रशासन व प्रोबेशन विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिह्न लगाता है।
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मेरठ में 11 अगस्त को महिला एवं बाल कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी के द्वारा उत्तर रक्षा गृह व नारी निकतेन का निरीक्षण किया गया था। वहां की व्यवस्थाओं को पूरी तरह से दुरुस्त पाते हुए उन्होंने डीपीओ एके गुप्ता की पीठ थपथपाई थी। लेकिन मंत्री के निरीक्षण के 13 दिन बाद ही विभागीय अधिकारियों की पोल खुल गई। सूरजकुंड स्थित बाल गृह में वहीं के कर्मचारी द्वारा एक बालक के साथ कुकर्म की घटना को अंजाम दिया गया। बात यहीं समाप्त नही होती। उक्त पूरे मामले को जिला प्रशासन के साथ विभागीय अधिकारियों द्वारा करीब एक सप्ताह तक दबाये रखा गया तथा मामले की कलई उस समय खुली, जब एक न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा बाल गृह का निरीक्षण किया गया तथा उसके बाद पीड़ित बालक ने उन्हें सारी बात बताई।
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इस मामले मेें डीएम अनिल ढींगरा द्वारा भले ही दोषी कर्मचारी के खिलाफ मुकदमा कायम कराकर उसे जेल भिजवा दिया गया हो और अधीक्षक व डीपीओ के निलंबन को कहा गया हो। लेकिन यह कहना गलत न होगा कि इस मामले में प्रोबेशन विभाग की घोर लापरवाही रही है। उसने मामले को दबाने में कोई कसर नही छोड़ी। बालक के यौन शोषण का यह मामला जुलाई माह का है और विभागीय मंत्री द्वारा अगस्त में विभाग का निरीक्षण किया गया। तब उन्हें सब कुछ चाक चौबंद मिला। सूत्रों के अनुसार विभागीय अधिकारियों को यह पता था कि बाल गृह में बच्चों के साथ गलत काम हो रहा है। लेकिन उनके द्वारा इस मामले को पूरी तरह से दबा दिया गया। जिससे साफ हो गया कि विभागीय अधिकारियों द्वारा मंत्री रीता बहुगुणा को भी गुमराह करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी गयी। अहम बात ये है कि प्रदेश सरकार के इतना सख्त होने के बावजूद भी बाल गृह में इस प्रकार की घटना का होना निश्चित रूप से ही जिला प्रशासन व प्रोबेशन विभाग की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिह्न लगाता है।
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