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नरसी ने कारबाइन, धीरज ने पिस्टल से बरसाई गोलियां
Updated Wed, 30 May 2018 02:39 AM IST
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मेरठ। कुख्यात हिमांशु उर्फ नरसी का गाजियाबाद में आतंक था। दिल्ली-मेरठ हाइवे पर लूटपाट करना उसका पेशा बन चुका था। घटना के दौरान इस शातिर के सामने जो आता था, उस पर गोलियां चला देता था। मंगलवार तड़के हुई मुठभेड़ के दौरान नरसी ने एसटीएफ पर कारबाइन से तो धीरज ने पिस्टल से गोलियां बरसाई थीं।
एएसपी एसटीएफ आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि दुल्हन महविश परवीन की लूट के दौरान हत्या करने के बाद से हिमांशु उर्फ नरसी उनके टारगेट पर था। नरसी हाईवे पर फिर वारदात करेगा, ऐसी जानकारी लगातार मिलती थी। लेकिन सटीक जानकारी नहीं मिलती थी। सोमवार रात जैसे ही एसटीएफ को मुखबिर द्वारा सूचना मिली तो वह एकदम एक्टिव हो गई। मौके पर पहुंचकर मुखबिर द्वारा पहचान कराने के बाद एसटीएफ ने नरसी व धीरज को चेतावनी दी कि वह सरेंडर कर दें। इतना सुनते ही नरसी ने कारबाइन से गोलियां बरसानी शुरू कर दी थी। वहीं, धीरज भी पिस्टल से गोलियां चलाने लगा। जिसमें एक गोली सिपाही को लगने से बची। एसटीएफ ने दोनों बदमाशों की गोलियों का जवाब गोलियों से ही दिया। जिसमें दोनों बदमाशों की गोली लगने से मौत हो गई।
साथियों का इंतजार कर रहे थे दोनों
सीओ एसटीएफ बृजेश सिंह का दावा है कि दोनों बदमाशों के तीन साथी भी इस खंडहरनुमा घर में आने थे। उसके बाद यह बदमाश हाइवे पर लूट की वारदात करने जाते। मुखबिर की सटीक सूचना पर एसटीएफ ने इनामी दोनों बदमाशों को घेर लिया। मुठभेड़ में दोनों कुख्यात मारे गए। कुख्यात धीरज के साथ नरसी कई महीने से हाइवे पर वारदात कर रहा था।
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एक महीने से लगे थे पीछे
दुल्हन हत्याकांड में तीन आरोपियों को एसटीएफ जेल भेज चुकी थी। गिरोह का सरगना हिमांशु उर्फ नरसी था। जिसकी तलाश में एसटीएफ एक महीने से लगी थी। एसटीएफ का दावा है कि नरसी की तलाश में रोजाना एक टीम गाजियाबाद जाती थी। नरसी बहुत शातिर था, उसके ठिकाने तक एसटीएफ नहीं पहुंच रही थी। मोदीनगर को छोड़कर उसने मेरठ में ठिकाना बनाया था।
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एएसपी एसटीएफ आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि दुल्हन महविश परवीन की लूट के दौरान हत्या करने के बाद से हिमांशु उर्फ नरसी उनके टारगेट पर था। नरसी हाईवे पर फिर वारदात करेगा, ऐसी जानकारी लगातार मिलती थी। लेकिन सटीक जानकारी नहीं मिलती थी। सोमवार रात जैसे ही एसटीएफ को मुखबिर द्वारा सूचना मिली तो वह एकदम एक्टिव हो गई। मौके पर पहुंचकर मुखबिर द्वारा पहचान कराने के बाद एसटीएफ ने नरसी व धीरज को चेतावनी दी कि वह सरेंडर कर दें। इतना सुनते ही नरसी ने कारबाइन से गोलियां बरसानी शुरू कर दी थी। वहीं, धीरज भी पिस्टल से गोलियां चलाने लगा। जिसमें एक गोली सिपाही को लगने से बची। एसटीएफ ने दोनों बदमाशों की गोलियों का जवाब गोलियों से ही दिया। जिसमें दोनों बदमाशों की गोली लगने से मौत हो गई।
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साथियों का इंतजार कर रहे थे दोनों
सीओ एसटीएफ बृजेश सिंह का दावा है कि दोनों बदमाशों के तीन साथी भी इस खंडहरनुमा घर में आने थे। उसके बाद यह बदमाश हाइवे पर लूट की वारदात करने जाते। मुखबिर की सटीक सूचना पर एसटीएफ ने इनामी दोनों बदमाशों को घेर लिया। मुठभेड़ में दोनों कुख्यात मारे गए। कुख्यात धीरज के साथ नरसी कई महीने से हाइवे पर वारदात कर रहा था।
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एक महीने से लगे थे पीछे
दुल्हन हत्याकांड में तीन आरोपियों को एसटीएफ जेल भेज चुकी थी। गिरोह का सरगना हिमांशु उर्फ नरसी था। जिसकी तलाश में एसटीएफ एक महीने से लगी थी। एसटीएफ का दावा है कि नरसी की तलाश में रोजाना एक टीम गाजियाबाद जाती थी। नरसी बहुत शातिर था, उसके ठिकाने तक एसटीएफ नहीं पहुंच रही थी। मोदीनगर को छोड़कर उसने मेरठ में ठिकाना बनाया था।