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बेगुनाहों को पहले जेल भेजती फिर उनको छुड़वाती पुलिस
Updated Fri, 25 May 2018 02:04 AM IST
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थोड़ा दबाव पड़ते ही हत्या, लूट व डकैती जैसे संगीन अपराधोें में पुलिस बेगुनाहों को जेल भेज देती है। बाद में जांच के दौरान असली मुल्जिम सामने आने पर बेगुनाहों को पुलिस अपनी रिपोर्ट लगाकर जेल से छुड़वाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि जो बेकसूर लोग जेल कटते है, उसकी भरपाई कौन करेगा। इसका जवाब किसी के पास नहीं है। जबकि साल में 50-60 से अधिक लोगों के साथ ऐसा होता है।
घटना होते ही पुलिस का जोर नामजदगी कराने पर होता है। घटना को लेकर थोड़ा आक्रोश हो गया तो बस नामजद लोगों को उठाकर पुलिस जेल भेज देती है। पुलिस यह भी जानने की कोशिश नहीं करती कि जेल में भेजने वाले लोग कसूरवार हैं या बेकसूर। जिसका नतीजा यह है कि वेस्ट यूपी की जेलों में अधिकांश लोग बेगुनाह बंद हैं।
बृहस्पतिवार को प्रेसवार्ता में एसएसपी राजेश कुमार पांडेय ने बताया पुलिस की लापरवाही के चलते बबलू हत्याकांड में सुंदर जेल भेजा। जबकि उनका ऐसा नहीं करना चाहिए था। थोड़ी सी जांच तो होनी चाहिए थी। दो अप्रैल को उपद्रव में पुलिस ने छह लोग जेल भेजे व बाद में जेल से छुड़वाया। लालकुर्ती के तेजाबी हमले में पुलिस ने बेगुनाह एक महिला को जेल भेजा। इसके अलावा भी दर्जनों घटना ऐसी होती हैं, जिसमें खुद पुलिस 169 की रिपोर्ट लगाकर छुड़वाती है।
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पुलिस पर होगी कार्रवाई
पुलिस भले ही वारदात के बाद जेल भेजे लोगों को छुड़वा देती है। लेकिन जेल जाने के बाद बेकसूर लोगों के करियर पर एक प्रश्न चिह्न लग जाता है। एसएसपी राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि बगैर जांच या दबाव में आकर किसी बेगुनाह को जेल भेजना भी अपराध की श्रेणी में आता है। अगर पुलिस वालेे ऐसा करते है तो उनके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई होगी। बबलू हत्याकांड में बेगुनाह सुंदर को जेल भेजा। जांच होगी और पुलिसवालों पर कार्रवाई होगी।
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थोड़ा दबाव पड़ते ही हत्या, लूट व डकैती जैसे संगीन अपराधोें में पुलिस बेगुनाहों को जेल भेज देती है। बाद में जांच के दौरान असली मुल्जिम सामने आने पर बेगुनाहों को पुलिस अपनी रिपोर्ट लगाकर जेल से छुड़वाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि जो बेकसूर लोग जेल कटते है, उसकी भरपाई कौन करेगा। इसका जवाब किसी के पास नहीं है। जबकि साल में 50-60 से अधिक लोगों के साथ ऐसा होता है।
घटना होते ही पुलिस का जोर नामजदगी कराने पर होता है। घटना को लेकर थोड़ा आक्रोश हो गया तो बस नामजद लोगों को उठाकर पुलिस जेल भेज देती है। पुलिस यह भी जानने की कोशिश नहीं करती कि जेल में भेजने वाले लोग कसूरवार हैं या बेकसूर। जिसका नतीजा यह है कि वेस्ट यूपी की जेलों में अधिकांश लोग बेगुनाह बंद हैं।
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बृहस्पतिवार को प्रेसवार्ता में एसएसपी राजेश कुमार पांडेय ने बताया पुलिस की लापरवाही के चलते बबलू हत्याकांड में सुंदर जेल भेजा। जबकि उनका ऐसा नहीं करना चाहिए था। थोड़ी सी जांच तो होनी चाहिए थी। दो अप्रैल को उपद्रव में पुलिस ने छह लोग जेल भेजे व बाद में जेल से छुड़वाया। लालकुर्ती के तेजाबी हमले में पुलिस ने बेगुनाह एक महिला को जेल भेजा। इसके अलावा भी दर्जनों घटना ऐसी होती हैं, जिसमें खुद पुलिस 169 की रिपोर्ट लगाकर छुड़वाती है।
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पुलिस पर होगी कार्रवाई
पुलिस भले ही वारदात के बाद जेल भेजे लोगों को छुड़वा देती है। लेकिन जेल जाने के बाद बेकसूर लोगों के करियर पर एक प्रश्न चिह्न लग जाता है। एसएसपी राजेश कुमार पांडेय ने बताया कि बगैर जांच या दबाव में आकर किसी बेगुनाह को जेल भेजना भी अपराध की श्रेणी में आता है। अगर पुलिस वालेे ऐसा करते है तो उनके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई होगी। बबलू हत्याकांड में बेगुनाह सुंदर को जेल भेजा। जांच होगी और पुलिसवालों पर कार्रवाई होगी।