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पैर छूए, हाथ मिलाया और सीने में उतार दी गोली
Updated Fri, 17 Aug 2018 02:52 AM IST
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मेरठ। बृहस्पतिवार शाम 5:45 बजे स्टेडियम का ग्राउंड खिलाड़ियों से खचाखच भरा था। सभी खिलाड़ी प्रैक्टिस कर रहे थे। वहीं ग्राउंड में कुर्सी पर एथलेटिक कोच संदीव रंधावा बैठे खिलाड़ियाें को टिप्स दे रहे थे। तभी शेखर, मनीष व अंशुल कोच के पास पहुंचे। तीनों खिलाड़ी है और रोजाना स्टेडियम में दौड़ लगाने आते थे। आरोपी शेखर ने संदीप पैर छूए तो वह कुर्सी से खड़े हो गए। दोनों ने हाथ मिलाए। तभी शेखर ने संदीप के सीने पर सटाकर गोली मार दी। जबकि मनीष व अंशुल पास में खड़े इधर उधर देखते रहे, ताकि कोई बचाव में न आए। गोली लगते ही संदीप जमीन पर गिर पड़े। यह देख प्रैक्टिस कर रहे खिलाड़ी अतुल यादव, अमित और संदीप दौड़कर वहां पर पहुंचे। तभी तीनों आरोपी हवाई फायरिंग करते हुए भाग गए। वहीं वारदात के बाद ग्राउंड में अफरातफरी मच गई। खिलाड़ी स्टेडियम छोड़कर जाने लगे। ग्राउंड में पुलिस फोर्स लगाई गई। लेकिन खिलाड़ी वहां से चले गए
कोई बोलने को तैयार नहीं
मौके पर पहुंचे एसएसपी और पुलिस फोर्स ने कई खिलाड़ियों से बातचीत की, लेकिन कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं हुआ। जबकि कई खिलाड़ी हमलावरों को जानते थे। कोई हमलावरों के नाम बताने को भी तैयार नहीं था। एसएसपी ने कई खिलाड़ियों को समझाया कि तुम लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं करेेंगे। तब जाकर दो खिलाड़ियों ने जानकारी दी।
खिलाड़ियों ने दी जानकारी
स्टेडियम के ग्राउंड में चश्मदीद खिलाड़ियों से अमर उजाला ने बातचीत की। जिसमें कई खिलाड़ियों ने कहा कि उनके सामने शेखर ने गोली मारी। सैकड़ों खिलाड़ियों ने इसको देखा है। विवाद क्या था, इसकी जानकारी उनको नहीं है। इस खिलाड़ियों ने पुलिस को कोई भी बात बताने से साफ इंकार कर दिया।
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शेखर ने मारी मुझे गोली
जसवंतराय हॉस्पिटल में लहूलुहान हालत में संदीप रंधावा ने पुलिस को बयान दिया कि उसको शेखर ने गोली मारी है। शेखर के साथ मनीष व अंशुल थे। पुलिस ने गोली मारने का कारण भी पूछा। लेकिन संदीप की हालत ज्यादा खराब थी, इस कारण वह नहीं बोल पाए। पुलिस ने बताया कि एक आरोपी दबुथआ सरधना का निवासी है। दबुथआ गांव में दबिश दी, लेकिन वह हत्थे नहीं चढ़ा। पुलिस ने तीनों हमलावरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
पुलिस की रही लापरवाही
मेरठ। एथलेटिक कोच पर हमले में पुलिस की लापरवाही सामने आई है। स्टेडियम के क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी से भी शिकायत की थी कि कई खिलाड़ी कोच को धमकी देते है। उनका रजिस्टेशन भी नहीं है। कोच और स्टेडियम की ओर से दो बार सिविल लाइन थाने में तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। आरोपी अंशुल बंसल बार बार धमकी देता था कि वह स्टेडियम छोड़कर चला जाए, अन्यथा मारा जाएगा।
आखिर क्यों नहीं लिखी रिपोर्ट
क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी आले हैदर ने बताया कि जून महीने में संदीप ने इसकी जानकारी मुझे दी थी। संदीप की तरफ से सिविल लाइन थाने में शिकायत पत्र दिया गया था। वारदात के बाद पुलिस अधिकारी पहुंचे थे तो उनको भी इसके बारे में बताया गया। रिपोर्ट क्यों नहीं दर्ज की, इसको लेकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
हम दलित है, शोषण हो रहा था
अस्पताल में पहुंचे संदीप के भाई ने स्टेडियम प्रशासन और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उसने कहा कि हम दलित हैं, इसलिए मेरे र्भाई का शोषण हो रहा था। हमलावर कहते थे कि स्टेडियम में दलित कोच नहीं हो सकता। एक सप्ताह से लगातार संदीप को धमकियां मिल रही थीं। कई बार उसने स्टेडियम प्रशासन व पुलिस को बताया, लेकिन किसी ने मामले की गंभीरता से नहीं लिया।
कोई बोलने को तैयार नहीं
मौके पर पहुंचे एसएसपी और पुलिस फोर्स ने कई खिलाड़ियों से बातचीत की, लेकिन कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं हुआ। जबकि कई खिलाड़ी हमलावरों को जानते थे। कोई हमलावरों के नाम बताने को भी तैयार नहीं था। एसएसपी ने कई खिलाड़ियों को समझाया कि तुम लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं करेेंगे। तब जाकर दो खिलाड़ियों ने जानकारी दी।
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खिलाड़ियों ने दी जानकारी
स्टेडियम के ग्राउंड में चश्मदीद खिलाड़ियों से अमर उजाला ने बातचीत की। जिसमें कई खिलाड़ियों ने कहा कि उनके सामने शेखर ने गोली मारी। सैकड़ों खिलाड़ियों ने इसको देखा है। विवाद क्या था, इसकी जानकारी उनको नहीं है। इस खिलाड़ियों ने पुलिस को कोई भी बात बताने से साफ इंकार कर दिया।
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शेखर ने मारी मुझे गोली
जसवंतराय हॉस्पिटल में लहूलुहान हालत में संदीप रंधावा ने पुलिस को बयान दिया कि उसको शेखर ने गोली मारी है। शेखर के साथ मनीष व अंशुल थे। पुलिस ने गोली मारने का कारण भी पूछा। लेकिन संदीप की हालत ज्यादा खराब थी, इस कारण वह नहीं बोल पाए। पुलिस ने बताया कि एक आरोपी दबुथआ सरधना का निवासी है। दबुथआ गांव में दबिश दी, लेकिन वह हत्थे नहीं चढ़ा। पुलिस ने तीनों हमलावरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है।
पुलिस की रही लापरवाही
मेरठ। एथलेटिक कोच पर हमले में पुलिस की लापरवाही सामने आई है। स्टेडियम के क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी से भी शिकायत की थी कि कई खिलाड़ी कोच को धमकी देते है। उनका रजिस्टेशन भी नहीं है। कोच और स्टेडियम की ओर से दो बार सिविल लाइन थाने में तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। आरोपी अंशुल बंसल बार बार धमकी देता था कि वह स्टेडियम छोड़कर चला जाए, अन्यथा मारा जाएगा।
आखिर क्यों नहीं लिखी रिपोर्ट
क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी आले हैदर ने बताया कि जून महीने में संदीप ने इसकी जानकारी मुझे दी थी। संदीप की तरफ से सिविल लाइन थाने में शिकायत पत्र दिया गया था। वारदात के बाद पुलिस अधिकारी पहुंचे थे तो उनको भी इसके बारे में बताया गया। रिपोर्ट क्यों नहीं दर्ज की, इसको लेकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
हम दलित है, शोषण हो रहा था
अस्पताल में पहुंचे संदीप के भाई ने स्टेडियम प्रशासन और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उसने कहा कि हम दलित हैं, इसलिए मेरे र्भाई का शोषण हो रहा था। हमलावर कहते थे कि स्टेडियम में दलित कोच नहीं हो सकता। एक सप्ताह से लगातार संदीप को धमकियां मिल रही थीं। कई बार उसने स्टेडियम प्रशासन व पुलिस को बताया, लेकिन किसी ने मामले की गंभीरता से नहीं लिया।