चरित्र निर्माण से बदलेगा भारत, सीसीएसयू के ज्ञानोत्सव कार्यक्रम में बोले मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह
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वे बुधवार को सीसीएसयू में आयोजित ज्ञानोत्सव कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए थे। कार्यक्रम का आयोजन शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास एवं शिक्षा विभाग चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है।
सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योग व खादी एवं ग्रामोद्योग कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कहा कि यह साधारण कार्यक्रम नहीं है। मुख्यमंत्री को इसमें स्वयं आना था, लेकिन किन्हीं कारणों से वह नहीं आ पाए। यह कार्यक्रम बदलाव की शुरुआत है। मैकाले ने जो भारत में कान्वेंट शिक्षा का बीज बोया उससे वह भी अछूते नहीं रहे।
उनकी शिक्षा भी कान्वेंट स्कूल से हुई, लेकिन इसकेलिए वह दोषी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारत का निर्माण करना है तो चरित्र का निर्माण करना होगा। स्वामी विवेकानंद जब अमेरिका गए तो उनकी वेशभूषा देखकर सबने मजाक बनाया था लेकिन जब उन्होंने बोलना शुरू किया तो सब चुप रह गए।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि नेहरू जी की विचारधारा कोलोनियम सोच से ज्यादा प्रभावित थी, लेकिन अब माहौल बदल गया है। अब लोगों में राष्ट्रवाद की भावना बढ़ी है। उन्होंने कहा कि मेरठ शहीदोें की धरती है। यहीं से क्रांति भी हुई। जब पुलवामा होता है तो और देश के किसी भी कोने में कोई बेटा शहीद होता है तो पूरे देश कैंडल मार्च निकालता है।
लोग सड़कों पर झंडा लेकर निकल पड़ते है। यह बदलाव हमने आजादी के बाद अब देखा है। कोलोनियम सोच का जो बीज देश में बोया गया था, अब उसमें राष्ट्रवाद की नींव डलने का काम हो गया है। उन्होंने खुद के बारे में कहा कि लोग कहते हैं कि वह भी तो कान्वेंट से पढ़े हैं तो मैं सबको बता देना चाहता हूं कि मैं अंग्रेजी के दम पर नहीं बल्कि चरित्र निर्माण से आगे बढ़ा हूं।
अयोध्या मामले में फैसले का इंतजार
मीडिया से बातचीत में उन्होेंने ने कहा कि उनको भी सुप्रीमकोर्ट के फैसले का इंतजार है। जो भी फैसला आएगा उसका सम्मान किया जाएगा। बिजली चोरी में फंसे अधिकारियों के मामले में उन्होंने कहा कि अफसर हों या नेता जो भी जांच में दोषी होंगे सभी पर कार्रवाई होगी।
शिक्षा, संस्कृति के उत्थान से होगा बुराई का अंत : अतुल कोठारी
शिक्षा उत्थान संस्कृति न्यास के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी ने कहा कि शिक्षा के आधार पर ही भारत विश्व गुरु बने। लोग फिर से यहां पढ़ने के आएं ऐसी शिक्षा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ज्ञानोत्सव का उद्देश्य सकारात्मक कार्य करने वालों को एक मंच पर लाना है।
अच्छाई की लकीर को बड़ा करना होगा। ज्ञानोत्सव एक आंदोलन है। उन्होंने कहा कि मनुष्य का आंकलन चरित्र के आधार पर किया जाता है। गांवों में अभी अच्छाई बहुत है। यदि बुद्धिजीवी सरकार पर निर्भर होंगे तो लोकतंत्र सफल नहीं हो पाएगा। उन्होंने कहा कि पाश्चात्य वर्ग में तरक्की का आधार भौतिक प्रगति माना जाता है। लेकिन भारत में चरित्र के आधार पर व्यक्तित्व का आंकलन होता है।
शिक्षक शिक्षा में लाएं गुणवत्ता : प्रो. तनेजा
कार्यक्रम के अध्यक्ष कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने कहा कि शिक्षक शिक्षा में गुणवत्ता लाने का प्रयास करें। लोगों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा अच्छी नहीं होती है। इस प्रदर्शनी ने यह सिद्ध कर दिया कि सरकारी स्कूलों में किस प्रकार से नवाचार किए जा रहे हैं। नवाचार प्रदर्शनी में सरकारी स्कूल के बच्चों ने जिस प्रकार से सृजनात्मक क्षमता दिखाई है लोग आकर देखें। अटल टंकरिंग लैब से जुड़कर बच्चे आगे बढे़ं। इस समय गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा की आवश्यकता है।