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किराए के कमरे में चलती मिली नकली दवा फैक्ट्री
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Thu, 19 Nov 2015 02:06 AM IST
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शहर में बड़ी मात्रा में नकली दवाएं तैयार करने का गोरखधंधा चल रहा है। बुधवार को पटना की प्राइवेट डिटेक्टिव कंपनी की सूचना पर एफडीए की टीम ने मेडिकल कॉलेज के पास शिवशक्ति विहार कॉलोनी में छापा मारा। किराए के कमरे में चल रही इस फैक्ट्री से भारी मात्रा में नकली दवाएं पकड़ी गईं। जिनमें ब्रांडेड कंपनियों से लेकर छोटी-बड़ी कंपनियों की प्रमुख दवाएं तैयार की जा रही थीं। एफडीए ने सभी दवाओं को सील कर दिया है। नकली दवा तैयार करने के आरोपी अमन कुमार के खिलाफ थाना भावनपुर में एफआईआर दर्ज करा दी गई है।
एफडीए टीम को बड़ी संख्या में ऐसी दवाएं मिली हैं जिनका इस्तेमाल नशे के तौर पर किया जाता है। कई जगहों पर उनकी अच्छी खासी मांग है। जिसमें कोरेक्स कप सिरप और आयोडेक्स (डबल पावर) शामिल है। कोरेक्स की 60 एमएल की करीब 250 से अधिक शीशी मौके से तैयार मिलीं। जबकि बिटाडिन की 500 एमएल की भरी हुई 15 बोतल पकड़ी गईं। इसके अलावा करीब डेढ़ से दो हजार खाली बोतलें और लेबल (स्टीकर) पकड़े गए। स्टीकर अधिकांश बिटाडिन, डाईजीन, कोरेक्स और आयोडेक्स के थे। इन नकली दवाओं को मेरठ सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सप्लाई किया जाता था।
खुफिया जानकारी पर हुई कार्रवाई
पफीजर कंपनी को कुछ डीलरों के माध्यम से सूचना मिली थी कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उसके नाम की नकली दवाएं बेची जा रही हैं। कंपनी ने पटना की प्राइवेट डिटेक्टिव कंपनी को इस पता लगाने की जिम्मेदारी सौंपी। झोला छाप डॉक्टर और निचले स्तर के दवा प्रतिनिधियों से पता चला कि शिवशक्ति विहार में नकली दवा बनती हैं। कई दिनों तक पूछताछ के बाद पता चला कि यहां राम लाल के मकान में एक कमरा अमन नाम के व्यक्ति ने किराये पर ले रखा है, जहां प्रमुख कंपनियों की नकली दवा बनती हैं।
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तोड़ डाला ताला
पुख्ता जानकारी के बाद जब बुधवार दोपहर इस मकान पर छापा मारा गया तो कमरे पर ताला लगा मिला। काफी देर तक पुलिस मकान मालिक से ताला खोलने के लिए कहती रही लेकिन वह कहता रहा कि चाबी किराएदार के पास ही है। बाद में हथोड़े से ताला तोड़ा गया। टीम में ड्रग इंस्पेक्टर संदीप चौधरी, लवकुश आदि मौजूद रहे।
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एफडीए टीम को बड़ी संख्या में ऐसी दवाएं मिली हैं जिनका इस्तेमाल नशे के तौर पर किया जाता है। कई जगहों पर उनकी अच्छी खासी मांग है। जिसमें कोरेक्स कप सिरप और आयोडेक्स (डबल पावर) शामिल है। कोरेक्स की 60 एमएल की करीब 250 से अधिक शीशी मौके से तैयार मिलीं। जबकि बिटाडिन की 500 एमएल की भरी हुई 15 बोतल पकड़ी गईं। इसके अलावा करीब डेढ़ से दो हजार खाली बोतलें और लेबल (स्टीकर) पकड़े गए। स्टीकर अधिकांश बिटाडिन, डाईजीन, कोरेक्स और आयोडेक्स के थे। इन नकली दवाओं को मेरठ सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सप्लाई किया जाता था।
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खुफिया जानकारी पर हुई कार्रवाई
पफीजर कंपनी को कुछ डीलरों के माध्यम से सूचना मिली थी कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उसके नाम की नकली दवाएं बेची जा रही हैं। कंपनी ने पटना की प्राइवेट डिटेक्टिव कंपनी को इस पता लगाने की जिम्मेदारी सौंपी। झोला छाप डॉक्टर और निचले स्तर के दवा प्रतिनिधियों से पता चला कि शिवशक्ति विहार में नकली दवा बनती हैं। कई दिनों तक पूछताछ के बाद पता चला कि यहां राम लाल के मकान में एक कमरा अमन नाम के व्यक्ति ने किराये पर ले रखा है, जहां प्रमुख कंपनियों की नकली दवा बनती हैं।
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तोड़ डाला ताला
पुख्ता जानकारी के बाद जब बुधवार दोपहर इस मकान पर छापा मारा गया तो कमरे पर ताला लगा मिला। काफी देर तक पुलिस मकान मालिक से ताला खोलने के लिए कहती रही लेकिन वह कहता रहा कि चाबी किराएदार के पास ही है। बाद में हथोड़े से ताला तोड़ा गया। टीम में ड्रग इंस्पेक्टर संदीप चौधरी, लवकुश आदि मौजूद रहे।