मेरठ मेडिकल में अव्यवस्थाओं की भरमार.., मरीजों को नहीं मिल रहा बेहतर इलाज, अब आंकड़ों में बाजीगरी
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चिकित्सा शिक्षा मंत्री के निरीक्षण के बाद पॉजिटिव मिले सात मरीजों को स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार की कोरोना की रिपोर्ट में शामिल ही नहीं किया। मंगलवार रात तक कोरोना के 14 मरीज ही बताते रहे। उसी की रिपोर्ट भी जारी की। लेकिन उसमें न तो ब्रह्मपुरी की मृतका का उल्लेख किया न ही इमरजेंसी में मिले कोरोना के छह मरीजों का।
हालांकि सीएमओ ने मंगलवार देर रात कोरोना से 28वीं मौत और इमरजेंसी में मिले कोरोना के 6 मरीजों की पुष्टि कर दी थी। लेकिन उन्हें रिपोर्ट में शामिल नहीं किया गया। मेडिकल सूत्रों का कहना है कि इमरजेंसी के मरीजों की रिपोर्ट की जानकारी तो मंगलवार को दिन में ही स्वास्थ्य विभाग को दे दी गई थी।
वहीं, इस संबंध में सीएमओ डॉ. राजकुमार का कहना है कि रिपोर्ट देर से आई, इसलिए रिपोर्ट को अपडेट नहीं किया जा सका। बुधवार की रिपोर्ट में उन्हें जोड़ दिया गया। उन्होंने बताया कि मंगलवार को कुल 21 मरीज मिले थे, जिनमें से एक की मौत हो गई थी।
इनमें से दो का मंत्री ने हाल भी पूछा था। इससे मेडिकल अस्पताल में हड़कंप मच गया था। हालांकि मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसके गर्ग और सीएमओ का कहना था कि चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने मास्क लगाया हुआ था और वह मरीजों से काफी दूर थे, जो सुरक्षित तरीका है।
मेडिकल में हैं अव्यवस्थाएं.. नहीं मिल रहा बेहतर इलाज
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज कराने वाले अधिकांश लोगों या उनके परिजनों का अनुभव अच्छा नहीं रहा है। बीमार लोग मेडिकल में भर्ती होने से कतरा रहे हैं। हरिनगर ब्रह्मपुरी निवासी वृद्धा के परिजनों का कहना है कि उन्हें तो चारों दिनों मेडिकल में अव्यवस्थाएं और लापरवाही दिखी जिसके चलते वृद्धा की मौत हुई।
मोहल्ला हरिनगर ब्रह्मपुरी निवासी वृद्धा (60) को 31 मई को मेडिकल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का कहना है कि वृद्धा को इमरजेंसी में रखा गया था। रविवार को कोरोना की जांच कराई गई जो नेगेटिव बताई।
उसके बाद डॉक्टरों द्वारा कहा गया कि रिपोर्ट मिल नहीं रही है। दोबारा टेस्ट करना पड़ेगा। सोमवार को दोबारा सैंपल लिया, जिसकी रिपोर्ट मंगलवार रात आई जो कोरोना पॉजिटिव थी। रात करीब 10 बजे इन्हें इमरजेंसी से कोरोना वार्ड में शिफ्ट किया गया।
वृद्धा के दामाद ने बताया कि बुधवार सुबह करीब 6:30 पर मेडिकल से फोन आया कि वृद्धा की तबियत खराब है, उन्हें वेंटिलेटर पर ले रहे हैं। फिर आठ बजे फोन आया कि उनकी मृत्यु हो गई है। परिजनों का आरोप है कि मेडिकल में न तो बेहतर इलाज दिया जा रहा है और ना हीं व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं।
मेडिकल में लापरवाही का आलम यह है कि कोई भी कोरोना संदिग्ध वार्ड में आ-जा सकता था। ना सैनिटाइजर की व्यवस्था थी न ही मास्क की। पहले भी कई मरीजों के परिजन ऐसे आरोप लगा चुके हैं। मेडिकल के प्राचार्य डॉ. एसके गर्ग का कहना है कि बेहतर इलाज देने की कोशिश की जा रही है। वहीं, नोडल अधिकारी डॉ. टीवीएस आर्य के अनुसार धर्मवती को बचाने की कोशिश की गई। मगर बचा नहीं सके।