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बाढ़ में हुए नुकसान का मिले मुआवजा, ऋण माफ हो
Sat, 30 Aug 2025 10:48 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Sat, 30 Aug 2025 10:48 PM IST
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भाकियू संघर्ष मोर्चा के कार्यकर्ता सीएम के नाम एस डी एम को ज्ञापन देते हुए। (मवाना)
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मवाना। भारतीय किसान यूनियन संघर्ष मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को दिए ज्ञापन भेजकर बाढ़ प्रभावित किसानों के ऋण माफ करने की मांग की। बाढ़ के कटान में हुए नुकसान का मुआवजा दिलाने का भी अनुरोध किया।
यूनियन के युवा मंडल अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह जयंत और जिलाध्यक्ष ठाकुर नवनीत चौहान के नेतृत्व में एसडीएम संतोष कुमार सिंह को ज्ञापन दिया। जिसमें बताया कि गांव जलालपुर जोरा, किशोरपुर मामेपुर, मखदूमपुर, पहाड़पुर, बस्तोरा नारंग, दुधली, चेतावला, लतीफपुर, मानपुर दब खेड़ी, शहजादपुर, खेड़ी खुर्द आदि खादर के गांव गंगा का पानी आने से प्रभावित हैं। दुधली, बस्तोरा नारंग, मखदूमपुर, जलालपुर जोरा की भूमि व मकान सहित गंगा में कट रही है। उन्होंने बाढ़ पीड़ित किसानों का किसान ऋण माफ किए जाए। इन सभी किसानों की भूमि जो गंगा में विलीन हो गई है, उसका मुआवजा दिलाने की मांग की। रहने के लिए सुरक्षित स्थान पर जमीन सहित घर दिया जाए। गांव को गंगा के तेज बहाव कटान से रोकने के लिए तमाम खादर क्षेत्र से गुजरने वाली गंगा मेंं खनन फ्री किया जाए। जिससे गंगा गहरी होगी और कटान रोकने में राहत मिलेगी और पक्का तटबंध बनाया जाए।
ग्रामीणों ने बताया कि सन 1984 से पूर्व गंगा नदी गांव मनोहरपुर की आबादी से लगभग तीन किमी. दूर पूरब दिशा में बह रही थी। 1984 में नदी में आई भीषण बाढ व तेज कटान के कारण गंगा ने अपना मार्ग बदल लिया। जिससे गांव मनोहरपुर के लगभग पांच सौ अनुसूचित जाति के किसानों के मकान, आबादी, कृषि लगान की लगभग 220 हेक्टेयर गंगा नदी के प्रलय में डूब गई। वर्तमान में गंगा मनोहरपुर व व माजरा बधवी की लगानी भूमि पर बह रही है। ऐसे किसानों को पुर्नस्थापना एवं पुर्नवास कराने या सर्किल रेट से चार गुना मुआवजा दिलाने की मांग की है। मांगे पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। ज्ञापन देने वालों में सुभाषचंद, सुनील, अशोक, महेंद्र, सुरेंद्र, सचिन कुमार आदि काफी संख्या में थे।
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यूनियन के युवा मंडल अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह जयंत और जिलाध्यक्ष ठाकुर नवनीत चौहान के नेतृत्व में एसडीएम संतोष कुमार सिंह को ज्ञापन दिया। जिसमें बताया कि गांव जलालपुर जोरा, किशोरपुर मामेपुर, मखदूमपुर, पहाड़पुर, बस्तोरा नारंग, दुधली, चेतावला, लतीफपुर, मानपुर दब खेड़ी, शहजादपुर, खेड़ी खुर्द आदि खादर के गांव गंगा का पानी आने से प्रभावित हैं। दुधली, बस्तोरा नारंग, मखदूमपुर, जलालपुर जोरा की भूमि व मकान सहित गंगा में कट रही है। उन्होंने बाढ़ पीड़ित किसानों का किसान ऋण माफ किए जाए। इन सभी किसानों की भूमि जो गंगा में विलीन हो गई है, उसका मुआवजा दिलाने की मांग की। रहने के लिए सुरक्षित स्थान पर जमीन सहित घर दिया जाए। गांव को गंगा के तेज बहाव कटान से रोकने के लिए तमाम खादर क्षेत्र से गुजरने वाली गंगा मेंं खनन फ्री किया जाए। जिससे गंगा गहरी होगी और कटान रोकने में राहत मिलेगी और पक्का तटबंध बनाया जाए।
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ग्रामीणों ने बताया कि सन 1984 से पूर्व गंगा नदी गांव मनोहरपुर की आबादी से लगभग तीन किमी. दूर पूरब दिशा में बह रही थी। 1984 में नदी में आई भीषण बाढ व तेज कटान के कारण गंगा ने अपना मार्ग बदल लिया। जिससे गांव मनोहरपुर के लगभग पांच सौ अनुसूचित जाति के किसानों के मकान, आबादी, कृषि लगान की लगभग 220 हेक्टेयर गंगा नदी के प्रलय में डूब गई। वर्तमान में गंगा मनोहरपुर व व माजरा बधवी की लगानी भूमि पर बह रही है। ऐसे किसानों को पुर्नस्थापना एवं पुर्नवास कराने या सर्किल रेट से चार गुना मुआवजा दिलाने की मांग की है। मांगे पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। ज्ञापन देने वालों में सुभाषचंद, सुनील, अशोक, महेंद्र, सुरेंद्र, सचिन कुमार आदि काफी संख्या में थे।
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