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कमीशनखोरी के मेनहोल में समाए सरकार के 2 करोड़ रुपये

Thu, 01 Sep 2016 02:06 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
अमर उजाला ब्यूरों Updated Thu, 01 Sep 2016 02:06 AM IST
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commission khori ke main haal
शहर में बनाये गये मेनहाल - फोटो : अमर उजाला
 जल निगम में सीवर लाइन पर मेनहोल लगाने के नाम पर घोटाला किया जा रहा है। जिस मेनहोल को बनाने में मुश्किल से तीन-चार हजार रुपये की लागत आनी चाहिए, उस मेनहोल के लिए ठेकेदार को 15 हजार रुपये का भुगतान किया जा रहा है। इतना ही नहीं निर्माण में घटिया सामग्री का भी प्रयोग हो रहा है। साथ ही मेनहोल के लिए शहर की सड़कों को खोद दिया गया है। सड़कों की खुदाई और बाद में पैचवर्क के लिए भी अलग से सरकारी धन खर्च हो रहा है। ध्यान देने वाली बात ये है कि शहर में 10,000 मेनहोल बनाने के नाम पर 17.5 करोड़ रुपये सरकार से पास करा लिए हैं। 1,000 मेनहोल बनाए जा चुके हैं, जिसके लिए 2 करोड़ रुपये का भुगतान सरकार से ले लिया गया है।
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कनेक्टिविटी के लिए बन रहे मेनहोल
जेएनएनयूआरएम योजना के तहत जल निगम शहर में सीवर लाइन डालने के साथ भवनों को सीवर लाइन से जोड़ने के लिए मेनहोल बनवा रहा है। मेन सीवर लाइन पर पहले ही मेनहोल बन चुके हैं। अब गली-मोहल्लों में भवनों का गंदा पानी सीवर लाइन में डालने के लिए कनेक्टिविटी की जा रही है। शहर के प्रभात नगर, नंगलाबट्टू, संजय नगर, रफीपुरा, बलवंत नगर, जेलचुंगी, सर्वोदय कालोनी सहित एक दर्जन कालोनियों में मेनहोल बनाने का काम चल रहा है।
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डीपीआर की भी अवहेलना
बुधवार को अमर उजाला की टीम ने बलवंत नगर सहित कई कालोनियों में स्थलीय निरीक्षण किया। 15 हजार रुपये की लागत से तैयार किए जा रहे मेनहोल को देखा, तो असलियत सामने आ गई। अधिकतर मेनहोल डेढ़ फीट गहरे और दो फीट चौड़े मिले। मेनहोल बनाए जाते समय डीपीआर और शासनादेश का भी ध्यान नहीं रखा गया। अगर गंभीरता से जांच की गई, तो बड़े घोटाले का खुलासा होगा।  
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डीपीआर के मुताबिक मानक
- दो घरों पर बनना चाहिए एक मेनहोल
- 2 फीट गहरा और 2 फीट चौड़ा होना चाहिए
- मेनहोल को मेन लाइन से पाइप डालकर जोड़ना
- ढक्कन आईएसआई का मार्का होना
- निर्माण सामग्री की क्वालिटी अच्छी होना
- ठेकेदार को करना होगा एक साल तक रखरखाव

नियमों की अनदेखी
- दो मकानों पर एक नहीं, बल्कि प्रत्येक मकान पर एक या दो मेनहोल बनाए जा रहे
- मेनहोल पर डाले जा रहे ढक्कनों पर नहीं है किसी कंपनी की मुहर
- पहले सड़क तोड़ने और बनाने पर किया जा रहा सरकारी खजाना खर्च
- निर्माण सामग्री भी घटिया

प्रस्ताव और खर्च
शहर में छोटी सीवर लाइन पर बनने हैं 10 हजार मेनहोल
जल निगम के बजट प्रस्ताव 20 करोड़ पर सरकार ने लगाई 17.5 करोड़ रुपये पर मुहर
गली मोहल्लों में मेनहोल बनाने को उप्र सरकार ने दिए दो करोड़
जल निगम ने एक हजार मेनहोल पर ही खर्च कर दिए दो करोड़

सीवर लाइन में भी धोखाधड़ी
- प्रस्ताव के तहत 21.5 किमी डलनी थी मेन सीवर लाइन, डाली गई 19.5 किमी
- 215 किमी डालनी थी छोटी सीवर लाइन, डाली गई 172 किमी

पाइप लाइन का प्रस्तावित बजट - 231.2 करोड़
जल निगम को मिला- 184.55 करोड़

आंकड़ों की जुबानी
एक मेनहोल पर ठेकेदार को भुगतान 15 हजार रुपये। 10 हजार मेनहोल पर भुगतान 15 करोड़। जबकि प्रस्ताव है 17.5 करोड़ रुपये का। शेष बचे 2.5 करोड़ रुपये। कुल बजट की 12.5 प्रतिशत धनराशि (करीब 2.18 करोड़) का भुगतान जल निगम को किया जाना है। इसके अलावा प्रस्ताव में निर्माण सामग्री की लागत बढ़ने की भी संभावना को देखा जाता है।
 
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