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शहर के विकास पथ पर चलेगा ऑनलाइन नगर निगम

Thu, 20 Apr 2017 10:13 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ Updated Thu, 20 Apr 2017 10:13 AM IST
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city development programme follow nagar nigam
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

नगर निगम में बड़े बदलाव की तैयारी है। सिस्टम ऑनलाइन होने से जनता को सभी सुविधाएं ऑनलाइन मिलेंगी। किसी भी सुविधा का लाभ लेने के लिए निगम के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। निगम के वाहनों में तेल चोरी और कर्मचारियों की फर्जी उपस्थिति पर भी शिकंजा कसा जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्देश पर नगर प्रशासन ने कार्यवाही शुरू कर दी है। जून माह से पहले ही नगर निगम विकास पथ पर चलना शुरू हो जाएगा। 

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ई-मास सुविधा
यहां पर निगम की सभी जनहितकारी योजनाएं और शासनादेश मिलेंगे। जनता हाउस टैक्स, पानी टैक्स, पथ प्रकाश, सीवर, पानी, सफाई आदि सभी की शिकायत ऑनलाइन कर सकेगी। शिकायतकर्ता के मोबाइल पर अपडेट मेसेज आएगा। ई-मास सुविधा पर शिकायतकर्ता जानकारी हासिल कर सकेगा कि उसकी शिकायत कहां पर अटकी है और कौन अधिकारी निस्तारण करने में लापरवाही कर रहा है। 
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स्मार्ट कार्ड योजना
यह स्मार्ट कार्ड नगर निगम के अधिकारी व कर्मचारी को दिया जाएगा। जिसके लिए कर्मचारी को अपने परिवार के सभी सदस्यों का ग्रुप फोटो देना होगा। सभी सदस्यों के आधार कार्ड से जोड़ा जाएगा। कर्मचारी को उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा फ्री मिलेगी। इसके लिए पैनल में शहर ही नहीं बाहर के शहरों के भी कई अस्पतालों को जोड़ा जाएगा। इससे जहां निगम कर्मचारियों को अच्छी चिकित्सा सुविधा मिलेगी, वहीं बीमारी के फर्जी बिलों के नाम पर होने वाले लाखों रुपये के भुगतान से भी मुक्ति मिलेगी। निगम को लाभ होगा। 
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बायोमेट्रिक हाजिरी
निगम में अधिकारी व कर्मचारियों की हाजिरी अब मैन्युअल के बजाय बायोमेट्रिक सिस्टम से लगेगी। निगम के सभी अफसरों और कर्मचारियों की थंब या फिंगर इंप्रेशन से ही हाजिरी लगेगी। सफाई कर्मियों की निगम में उपस्थिति का समय सुबह सात बजे होगा। जबकि कार्यालय स्टाफ के आने का समय फिलहाल 10-11 बजे के बीच होगा। इसके बाद हाजिरी लगाने वाले कर्मचारियों से जवाब तलब होगा। कार्यालय छोड़ने का समय शाम पांच बजे होगा। ये मशीन निगम के सभी विभागों में अलग-अलग लगेगी। इसे सभी स्थायी और अस्थायी सफाई कर्मियों से अनिवार्य रूप से जोड़ा जाएगा। हाजिरी का एक मेसेज क्षेत्रीय पार्षद, नगरायुक्त, नगर स्वास्थ्य अधिकारी और एकाउंट विभाग के अधिकारियों के मोबाइल पर पहुंच जाएगा। उसी के आधार पर कर्मचारी को वेतन मिल पाएगा। इससे दो फायदे होंगे। सफाई कर्मी अपने क्षेत्र में समय से पहुंचेंगे। फर्जीवाड़ा खत्म होगा। कोई भी कर्मचारी अपनी मर्जी से गायब नहीं रहेगा। साठगांठ करके एक बार में पूरे महीने की फर्जी हाजिरी लगाकर वेतन पाने का भी रास्ता बंद हो जाएगा। 

जीपीएस
निगम के सभी 116 वाहनों को जीपीएस (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) से जोड़ा जाएगा। खासकर सफाई वाहनों में इस टेक्नालाजी का प्रयोग होगा। इससे पता चल सकेगा कि वाहन किन रास्तों से गुजरते हुए कितने किमी. चला और कहां पहुंचकर बंद हुआ। इससे निगम के वाहनों से तेल चोरी बंद होगी। 

दोहरी लेखा प्रणाली
इस प्रणाली से जहां निगम की आय-व्यय का समस्त लेखाजोखा ऑनलाइन जनता को दिखाई देगा। वहीं जनता द्वारा की गई किसी भी शिकायत का पता लगाया जा सकेगा कि वह किस अधिकारी ने कितने समय से रोकी हुई है। इससे भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। 


ई- टेंड्रिंग 
यह सुविधा निगम के निर्माण विभाग में तो चालू है, जो अब निगम के जलकल, स्ट्रीट लाइट, नगर स्वास्थ्य विभाग सभी में शुरू होगी। किसी भी कार्य को लेने का अवसर छोटे से छोटे और बड़े से बड़े ठेकेदार को मिलेगा। 
 

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