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चीनी स्टॉक कम, गन्ना भुगतान ज्यादा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 18 May 2016 01:47 AM IST
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चीनी. फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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तमाम कोशिशों के बावजूद किसानों का संपूर्ण गन्ना बकाया भुगतान होने के आसार कम है। अधिकतर बड़ी बकायेदार शुगर मिलों ने खेल करते हुए चीनी स्टॉक को ठिकाने लगा दिया है। वर्तमान पेराई सत्र की चीनी से गत वर्ष का बकाया भुगतान कर दिया है। अब इन मिलों के पास देय गन्ना मूल्य भुगतान के लिए पर्याप्त चीनी नहीं बची है। ऐसे में इस सत्र के संपूर्ण गन्ना बकाया भुगतान पर भी तलवार लटक गई है।
मंडल की शुगर मिलों पर वर्तमान पेराई सत्र 2015-16 का एसएपी की दर से करीब 1580 करोड़ रुपये बकाया है। गन्ना भवन से मिले आंकड़ों के अनुसार शुगर मिलों के पास 48 लाख 53 हजार 868 कुंतल चीनी का स्टॉक है। 85 फीसदी टैगिंग आदेश के तहत इस स्टॉक से 41 लाख 25 हजार 780 कुंतल चीनी बिक्री की जानी है।
थोक में चीनी के औसतन दाम 3200 रुपये प्रति कुंतल की दर से करीब 1320 करोड़ रुपये कीमत बैठती है। इस स्टॉक में उन चीनी मिलों का स्टॉक सबसे ज्यादा है जो मिलें गन्ना भुगतान करने में अव्वल है। भुगतान में फिसड्डी चल रही मिलों के पास चीनी स्टॉक बकाया गन्ना भुगतान के सापेक्ष न के बराबर बचा है। इन शुगर मिलों ने इस वर्ष उत्पादित चीनी बेचकर गत वर्ष का बकाया भुगतान किया है। इन मिलों के पास भुगतान के लिए पर्याप्त चीनी नहीं है।
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गलत नीतियों का खामियाजा भुगत रहे किसान
शासन ने शुगर इंडस्ट्री को 2 हजार करोड़ से ज्यादा की रियायत तो दे दी, लेकिन शर्तों और गन्ना खरीद एवं आपूर्ति एक्ट का उल्लंघन करने वाली मिलों पर शिकंजा नहीं कसा। एक्ट के मुताबिक वर्तमान पेराई सत्र से उत्पादित चीनी की बिक्री से वर्तमान सत्र का ही गन्ना भुगतान किया जा सकता है, लेकिन मवाना, मोदीनगर, मलकपुर, नंगलामल, सिंभावली, बृजनाथपुर आदि शुगर मिल ने खेल कर इस साल की चीनी से पिछले साल का गन्ना मूल्य कर दिया।
इनके पास चीनी का स्टॉक गन्ना भुगतान से कम
मिल स्टॉक बकाया
मवाना 3.14 258
नंगलामल 3.73 114
मोदीनगर 0.53 137
मलकपुर 0.69 259
सिंभावली 3.33 218
बृजनाथपुर 1.08 81
(नोट : स्टॉक लाख कुंतल में और बकाया करोड़ रुपये में है)
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मंडल की शुगर मिलों पर वर्तमान पेराई सत्र 2015-16 का एसएपी की दर से करीब 1580 करोड़ रुपये बकाया है। गन्ना भवन से मिले आंकड़ों के अनुसार शुगर मिलों के पास 48 लाख 53 हजार 868 कुंतल चीनी का स्टॉक है। 85 फीसदी टैगिंग आदेश के तहत इस स्टॉक से 41 लाख 25 हजार 780 कुंतल चीनी बिक्री की जानी है।
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थोक में चीनी के औसतन दाम 3200 रुपये प्रति कुंतल की दर से करीब 1320 करोड़ रुपये कीमत बैठती है। इस स्टॉक में उन चीनी मिलों का स्टॉक सबसे ज्यादा है जो मिलें गन्ना भुगतान करने में अव्वल है। भुगतान में फिसड्डी चल रही मिलों के पास चीनी स्टॉक बकाया गन्ना भुगतान के सापेक्ष न के बराबर बचा है। इन शुगर मिलों ने इस वर्ष उत्पादित चीनी बेचकर गत वर्ष का बकाया भुगतान किया है। इन मिलों के पास भुगतान के लिए पर्याप्त चीनी नहीं है।
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गलत नीतियों का खामियाजा भुगत रहे किसान
शासन ने शुगर इंडस्ट्री को 2 हजार करोड़ से ज्यादा की रियायत तो दे दी, लेकिन शर्तों और गन्ना खरीद एवं आपूर्ति एक्ट का उल्लंघन करने वाली मिलों पर शिकंजा नहीं कसा। एक्ट के मुताबिक वर्तमान पेराई सत्र से उत्पादित चीनी की बिक्री से वर्तमान सत्र का ही गन्ना भुगतान किया जा सकता है, लेकिन मवाना, मोदीनगर, मलकपुर, नंगलामल, सिंभावली, बृजनाथपुर आदि शुगर मिल ने खेल कर इस साल की चीनी से पिछले साल का गन्ना मूल्य कर दिया।
इनके पास चीनी का स्टॉक गन्ना भुगतान से कम
मिल स्टॉक बकाया
मवाना 3.14 258
नंगलामल 3.73 114
मोदीनगर 0.53 137
मलकपुर 0.69 259
सिंभावली 3.33 218
बृजनाथपुर 1.08 81
(नोट : स्टॉक लाख कुंतल में और बकाया करोड़ रुपये में है)