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संतान के लिए रखा निर्जल उपवास
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Tue, 17 Nov 2015 01:56 AM IST
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पूर्वांचल सहित बिहार में प्रमुख रूप से मनाया जाने वाले पर्व ‘छट पूजा’ के दूसरे दिन सोमवार को शहर में विभिन्न स्थानों पर ‘खरना’ का दिन मनाया गया। भगवान भास्कर की उपासना करते हुए दिन भर श्रद्धालुओं निर्जल रहकर उपवास किया। शहर में लगभग पांच हजार से अधिक परिवारों ने विभिन्न स्थानों पर और घरों में पूजा अर्चना कर प्रसाद ग्रहण किया।
गंगानगर, मोदीपुरम, यूनिवर्सिटी सहित विभिन्न स्थानों पर पूजन कार्यक्रम हुए। व्रती महिलाओं ने पंचमी के दिन निर्जल उपवास किया। शाम को गन्ने के रस की खीर बनाकर देवकरी में पांच जगह मिट्टी के बर्तन में रखकर सूर्य देव को भोग लगाया और फिर प्रसाद स्वरूप ग्रहण किया।
आज पर्व के तीसरे दिन व्रती कार्तिक शुक्ल षष्ठी को 24 घंटे का निर्जल व्रत रखेंगे। गगोल तीर्थ, गंगानगर आई ब्लाक, रामताल वाटिका, पल्लवपुरम, युनिवर्सिटी कैंपस और पांडव नगर सहित विभिन्न स्थानों पर सूर्य अस्त से पूर्व व्रती महिलाएं अपने परिवार के साथ पहुंचेंगी। बांस की टोकरी में व्रत सामग्री रखकर पूजा अर्चना की जाएगी।
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पवित्र तिथि है सूर्योपासना का पर्व
कार्तिक शुक्ल मास की छठी तिथि को पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रीराम के राज्याभिषेक के बाद माता सीता ने और पांडवों के छिने राज्य को वापस दिलाने के लिए द्रोपदी ने यह व्रत रखा था। षष्ठी देवी ग्रहराज सूर्य की बहन हैं। स्त्रियां सूर्य जैसे तेजस्वी पुत्र एवं षष्ठी देवी जैसी आयु, विद्या, बल, तेज वाली संतान की प्राप्ति के लिए व्रत तप करती हैं। पवित्रता के इस त्योहार में दीपावली के बाद दोबारा सफाई होने से स्वच्छता अधिक रहती है। इस कारण व्रत, उपवास, पूजा और अर्घ्य देने में पवित्रता बनी रहती है।
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गंगानगर, मोदीपुरम, यूनिवर्सिटी सहित विभिन्न स्थानों पर पूजन कार्यक्रम हुए। व्रती महिलाओं ने पंचमी के दिन निर्जल उपवास किया। शाम को गन्ने के रस की खीर बनाकर देवकरी में पांच जगह मिट्टी के बर्तन में रखकर सूर्य देव को भोग लगाया और फिर प्रसाद स्वरूप ग्रहण किया।
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आज पर्व के तीसरे दिन व्रती कार्तिक शुक्ल षष्ठी को 24 घंटे का निर्जल व्रत रखेंगे। गगोल तीर्थ, गंगानगर आई ब्लाक, रामताल वाटिका, पल्लवपुरम, युनिवर्सिटी कैंपस और पांडव नगर सहित विभिन्न स्थानों पर सूर्य अस्त से पूर्व व्रती महिलाएं अपने परिवार के साथ पहुंचेंगी। बांस की टोकरी में व्रत सामग्री रखकर पूजा अर्चना की जाएगी।
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पवित्र तिथि है सूर्योपासना का पर्व
कार्तिक शुक्ल मास की छठी तिथि को पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रीराम के राज्याभिषेक के बाद माता सीता ने और पांडवों के छिने राज्य को वापस दिलाने के लिए द्रोपदी ने यह व्रत रखा था। षष्ठी देवी ग्रहराज सूर्य की बहन हैं। स्त्रियां सूर्य जैसे तेजस्वी पुत्र एवं षष्ठी देवी जैसी आयु, विद्या, बल, तेज वाली संतान की प्राप्ति के लिए व्रत तप करती हैं। पवित्रता के इस त्योहार में दीपावली के बाद दोबारा सफाई होने से स्वच्छता अधिक रहती है। इस कारण व्रत, उपवास, पूजा और अर्घ्य देने में पवित्रता बनी रहती है।