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झूठी शान के पीछे भागकर बढ़ रहा असंतोष : भाव भूषण महाराज
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कैलाश पर्वत मंदिर पर पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ का 36वां दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख-शांति-समृद्धि के लिए चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 36वें दिन विधानाचार्य सौरभ शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया।
विधान के मध्य गुरुवर भाव भूषण महाराज ने कहा कि आज समाज में बढ़ते असंतोष का एक बड़ा कारण मनुष्य का अस्वाभाविक जीवन जीने का तरीका है। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में व्यक्ति ने अपनी अपेक्षाओं का विस्तार बहुत अधिक कर लिया है। इस कारण जीवन का संतुलन बिगड़ता जा रहा है। पहले मनुष्य का जीवन सरल, स्वाभाविक और संतुलित हुआ करता था, लेकिन आज सामाजिक स्तर बनाए रखने के नाम पर लोग ऐसी कई बातें अपने जीवन में ओढ़ लेते हैं, जिनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं होता। उन्होंने कहा कि केवल दिखावे और झूठी शान के कारण लोग अनावश्यक इच्छाओं और अपेक्षाओं को बढ़ा लेते हैं।
स्वर्ण कलश से अभिषेक सुशील जैन, मुनीष जैन हर्ष, समर्थ जैन ने किया। शांतिधारा दिनेश जैन, नितिन जैन, अरिहंत जैन, प्रवीण जैन, मयंक जैन ने की। दीप का प्रज्ज्वलन मेघा, सोनिका, शीनू जैन, प्रिया जैन ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया।
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आदिनाथ भगवान की पूजा के बाद सभी तीर्थंकरों के अर्घ्य चढ़ाने के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। 48 अर्घ्य चढ़ाए गए। 105 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया।
विधान का विसर्जन कुसुमलता जैन व महेंद्र जैन, पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन मेघा जैन, हर्ष, सोनिया, समर्थ जैन, आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन नीना जैन, संजय जैन और भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन कांता जैन, प्रवीण जैन, सुनीता जैन ने किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के कैलाश पर्वत दिगंबर जैन मंदिर में विश्व की सुख-शांति-समृद्धि के लिए चल रहे 48 दिवसीय भक्तामर विधान एवं पाठ के 36वें दिन विधानाचार्य सौरभ शास्त्री ने मांगलिक मंत्रों से क्रियाओं का शुभारंभ किया।
विधान के मध्य गुरुवर भाव भूषण महाराज ने कहा कि आज समाज में बढ़ते असंतोष का एक बड़ा कारण मनुष्य का अस्वाभाविक जीवन जीने का तरीका है। उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली में व्यक्ति ने अपनी अपेक्षाओं का विस्तार बहुत अधिक कर लिया है। इस कारण जीवन का संतुलन बिगड़ता जा रहा है। पहले मनुष्य का जीवन सरल, स्वाभाविक और संतुलित हुआ करता था, लेकिन आज सामाजिक स्तर बनाए रखने के नाम पर लोग ऐसी कई बातें अपने जीवन में ओढ़ लेते हैं, जिनका वास्तविक जीवन से कोई संबंध नहीं होता। उन्होंने कहा कि केवल दिखावे और झूठी शान के कारण लोग अनावश्यक इच्छाओं और अपेक्षाओं को बढ़ा लेते हैं।
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स्वर्ण कलश से अभिषेक सुशील जैन, मुनीष जैन हर्ष, समर्थ जैन ने किया। शांतिधारा दिनेश जैन, नितिन जैन, अरिहंत जैन, प्रवीण जैन, मयंक जैन ने की। दीप का प्रज्ज्वलन मेघा, सोनिका, शीनू जैन, प्रिया जैन ने किया। सुनीता दीदी ने शांतिधारा का उच्चारण किया।
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आदिनाथ भगवान की पूजा के बाद सभी तीर्थंकरों के अर्घ्य चढ़ाने के बाद भक्तामर विधान का शुभारंभ हुआ। 48 अर्घ्य चढ़ाए गए। 105 परिवारों की ओर से विधान का आयोजन कराया गया।
विधान का विसर्जन कुसुमलता जैन व महेंद्र जैन, पंच परमेष्ठी की आरती का दीप प्रज्ज्वलन मेघा जैन, हर्ष, सोनिया, समर्थ जैन, आदिनाथ भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन नीना जैन, संजय जैन और भगवान की आरती का दीप प्रज्ज्वलन कांता जैन, प्रवीण जैन, सुनीता जैन ने किया।