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चैत्र नवरात्र 2026: कन्या पूजन की तैयारियां तेज बृहस्पतिवार को अष्टमी, शुक्रवार को नवमी

Wed, 25 Mar 2026 11:44 AM IST
Dimple Sirohi राजकुमार सैनी, अमर उजाला, मेरठ
राजकुमार सैनी, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 25 Mar 2026 11:44 AM IST
सार

 चैत्र नवरात्र 2026 के अंतिम दिनों में महाअष्टमी और नवमी का विशेष महत्व है। जानिए कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसका धार्मिक महत्व।

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Chaitra Navratri 2026: Kanya Pujan preparations intensify, Ashtami on Thursday, Navami on Friday
चैत्र नवरात्र 2026 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आस्था, भक्ति और उल्लास का प्रतीक चैत्र नवरात्र अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। महाअष्टमी और नवमी के विशेष संयोग ने इस बार पर्व का महत्व और बढ़ा दिया है। घरों में कन्या पूजन की तैयारियां तेज हैं, जबकि मंदिरों में विशेष पूजा और अनुष्ठान जारी हैं। 

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महाअष्टमी पर मां महागौरी की आराधना
इस वर्ष महाअष्टमी गुरुवार को और नवमी शुक्रवार को मनाई जाएगी। महाअष्टमी के दिन मां दुर्गा के अष्टम स्वरूप मां महागौरी की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि मां महागौरी की उपासना से जीवन के कष्ट, दुख और दरिद्रता दूर होती है और भक्तों को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। उनका वर्ण अत्यंत गौर बताया गया है, इसी कारण उन्हें महागौरी कहा जाता है। श्वेत वस्त्र धारण करने के कारण उन्हें श्वेतांबरधरा और वृषभ पर सवार होने से वृषारूढ़ा भी कहा जाता है।

कन्या पूजन का विशेष महत्व
नवरात्र में अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इस दिन श्रद्धालु 5, 7, 9, 11 या 24 कन्याओं का विधिवत पूजन कर उन्हें भोजन कराते हैं। कई स्थानों पर यह पूजन अष्टमी के दिन किया जाता है, जबकि कुछ जगहों पर नवमी को भी यह परंपरा निभाई जाती है। प्रसाद के रूप में सूखा नारियल, मखाना, मूंगफली और मिश्री अर्पित की जाती है। मान्यता है कि कन्या पूजन से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।
 
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कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त
कन्या पूजन के लिए दो विशेष मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं। पहला मुहूर्त सूर्योदय से सुबह 7 बजे तक और दूसरा सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक है। इन समयों में विधिपूर्वक पूजन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

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